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Manipur: काकचिंग में हथियारबंद उग्रवादी समूहों के बीच गोलीबारी, सीएम बीरेन सिंह ने विधानसभा में दी जानकारी
Fri, 09 Aug 2024 02:23 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 09 Aug 2024 02:23 PM IST
सार
मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने बताया कि गुरुवार को हथियारबंद लोगों ने मजदूरों की एक टीम पर गोलीबारी की। यह गोलीबारी तब हुई, जब वे बिष्णुपुर के तोरबुंग के पास सीआरपीएफ की तैनाती के लिए एक पूर्व-निर्मित घर बनाने गए थे।
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मणिपुर के सीएम एन. बीरेन सिंह
- फोटो : ANI
विस्तार
मणिपुर के काकचिंग जिले में हथियारबंद उग्रवादी समूहों के बीच शुक्रवार को गोलीबारी हुई। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने विधानसभा में कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को मौके पर भेजा गया। दोनों उग्रवादी समूह एक ही समुदाय के थे।
मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने बताया, "गुरुवार को हथियारबंद लोगों ने मजदूरों की एक टीम पर गोलीबारी की। यह गोलीबारी तब हुई, जब वे बिष्णुपुर के तोरबुंग के पास सीआरपीएफ की तैनाती के लिए एक पूर्व-निर्मित घर बनाने गए थे।" सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलीबारी की। आधे घंटे तक गोलीबारी हुई, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ। फिलहाल स्थिति शांत है।
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एक साल से जारी है हिंसा
बता दें कि मणिपुर में पिछले एक साल से ही हिंसा जारी है। दरअसल, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में पिछले साल तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
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मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने बताया, "गुरुवार को हथियारबंद लोगों ने मजदूरों की एक टीम पर गोलीबारी की। यह गोलीबारी तब हुई, जब वे बिष्णुपुर के तोरबुंग के पास सीआरपीएफ की तैनाती के लिए एक पूर्व-निर्मित घर बनाने गए थे।" सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए गोलीबारी की। आधे घंटे तक गोलीबारी हुई, जिसमें कोई हताहत नहीं हुआ। फिलहाल स्थिति शांत है।
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एक साल से जारी है हिंसा
बता दें कि मणिपुर में पिछले एक साल से ही हिंसा जारी है। दरअसल, मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में पिछले साल तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।