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Manipur: हिंसा के खतरे के कारण 31 तक इंटरनेट बैन, शिक्षा मंत्री बोले, 15,641 बच्चों का स्कूल में दोबारा दाखिला
Thu, 26 Oct 2023 09:45 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 26 Oct 2023 09:45 PM IST
सार
मणिपुर में हिंसा के कारण हजारों बच्चों की पढ़ाई बाधित हुई। हालात पहले से बेहतर होने का दावा कर मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की सरकार में मंत्री ने कहा, स्कूल से वंचित हजारों बच्चों का दोबारा दाखिला कराया गया है। हालांकि, इंटरनेट बैन 31 अक्तूबर तक बढ़ा।
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मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह
- फोटो : ANI
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विस्तार
मणिपुर के चुराचांदपुर और कुछ अन्य पहाड़ी जिलों में भड़की हिंसा के कारण बच्चों पर काफी बुरा असर पड़ा है। करीब छह महीने पहले शुरू हुई हिंसा में मैतेई और कुकी समुदाय के लोगों का संघर्ष हुआ। नाजुक हालात के कारण लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। हजारों बच्चों की पढ़ाई छूट गई। ताजा घटनाक्रम में हालात पहले से बेहतर होने का दावा कर रही मणिपुर सरकार में शिक्षा मंत्री ने कहा कि 15,641 बच्चों को पास के स्कूलों में फिर से भर्ती कराया गया है।
15 हजार से अधिक बच्चों का दोबारा दाखिला
मणिपुर के शिक्षा मंत्री थौनाओजम बसंतकुमार सिंह ने गुरुवार को कहा कि 347 राहत शिविरों में 15,915 छात्रों ने शरण ली थी। इनमें से 15,641 को पास के स्कूलों में दोबारा प्रवेश दिया गया है। थौनाओजम ने कहा कि जब 3 मई को राज्य में हिंसा भड़की, तो स्कूल गर्मी की छुट्टियों के लिए बंद थे। बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण स्कूलों की छुट्टियों को बढ़ा दिया गया था। उन्होंने कहा, हालात सामान्य होने पर "कक्षा एक से 8वीं तक क्लास 5 जुलाई से फिर से खुल गई। उच्च कक्षाएं 10 अगस्त से शुरू हुईं।"
केवल 26 स्कूल बंद हैं, 77 फीसदी अटेंडेंस
शिक्षा मंत्री के अनुसार 23 अक्टूबर को स्कूलों में उपस्थिति 77 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर, चुराचांदपुर में 18 और इंफाल पूर्व और जिरीबाम जिलों में 26 स्कूलों को फिर से खोला जाना बाकी है। इनका उपयोग राहत शिविरों के रूप में या केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों के लिए किया जा रहा था।"
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दोबारा सर्टिफिकेट के लिए सरकारी मदद
विस्थापित छात्रों के कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदमों पर, थौनाओजम ने कहा, "छात्रों को पास के स्कूलों में मुफ्त में प्रवेश दिया गया है। मुफ्त प्रवेश सुनिश्चित करने और पाठ्यपुस्तकें, नोटबुक, स्टेशनरी आइटम और यूनिफॉर्म के लिए स्कूल शिक्षा विभाग से नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।" उन्होंने कहा कि विस्थापित छात्रों को पहचान पत्र जारी किए गए हैं और मणिपुर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद मणिपुर दोनों हिंसा के दौरान नष्ट हुए दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों को दोबारा प्राप्त करने में समन्वय कर रहे हैं।
छात्रों को मुफ्त ई-लर्निंग सामग्री
शिक्षा मंत्री थौनाओजम ने कहा, "100 प्रतिशत पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए शीतकालीन छुट्टियों में कटौती की जाएगी। शनिवार को पूरे दिन की कक्षाएं होंगी। इस संबंध में जल्द ही एक नया आदेश जारी किया जाएगा।" उन्होंने बताया कि जियो टीवी पर "लैरिक" नामक एक समर्पित शैक्षिक टीवी चैनल छात्रों को मुफ्त ई-लर्निंग सामग्री प्रदान कर रहा है।
कॉलेज छात्र पुनर्वास योजना 2023
उन्होंने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की सरकार की तरफ से की गई पहल के बारे में कहा कि मुख्यमंत्री कॉलेज छात्र पुनर्वास योजना 2023 शुरू की गई है जिसके तहत मुफ्त प्रवेश प्रदान किया जाएगा। शिक्षा मंत्री थौनाओजम ने कहा कि सरकार जल्द ही मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा, "सरकार एक दो दिनों के भीतर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की इच्छुक है। सुरक्षा एजेंसियों से भी इनपुट लिया गया है।"
31 अक्तूबर तक बढ़ाई गई इंटरनेट पर पाबंदी
हालांकि, गुरुवार देर शाम आई रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने इंटरनेट पर पाबंदियों को बढ़ाने का फैसला लिया है। अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि मणिपुर सरकार ने मोबाइल इंटरनेट प्रतिबंध को अगले पांच दिनों के लिए- 31 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है।
CM बीरेन सिंह ने क्या कहा?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने बमुश्किल एक हफ्ते पहले कहा था कि सरकार अगले कुछ दिनों में प्रतिबंध वापस ले लेगी। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, "इस आशंका के बाद प्रतिबंध बढ़ा दिया गया था कि कुछ असामाजिक तत्व जनता की भावनाओं को भड़काने वाली तस्वीरें, नफरत भरे भाषण और नफरत भरे वीडियो प्रसारित करने के लिए बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर असर हो सकता है।"
पुलिस महानिदेशक का बयान
आयुक्त (गृह) टी रणजीत सिंह की तरफ से जारी अधिसूचना के अनुसार 25 अक्तूबर को लिखे पत्र में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने बताया था कि अभी भी पुलिस स्टेशनों के सामने, सुरक्षा बलों के साथ जनता के टकराव, निर्वाचित सदस्यों के आवासों पर भीड़ के प्रयास और नागरिक विरोध प्रदर्शन जैसी हिंसा की घटनाओं की रिपोर्टें हैं।"
सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का प्रयास
अधिसूचना में कहा गया है, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से दुष्प्रचार और अफवाहें फैलने की आशंका है। "देश-विरोधी और समाज-विरोधी लोगों के मंसूबों और गतिविधियों को विफल करने, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और जीवन के किसी भी नुकसान को रोकने के लिए, प्रसार को रोककर सार्वजनिक हित में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त उपाय करना जरूरी हो गया है।"
पिछले छह महीने में केवल चार दिन चला इंटरनेट
बता दें कि तीन मई को हिंसा भड़कने के बाद मणिपुर में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालात की समीक्षा के बाद 23 सितंबर को इंटरनेट बहाल कर दिया गया था। हालांकि, केवल चार दिन बाद- 26 सितंबर को दो लापता युवकों के शवों की तस्वीरें सामने आईं। स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के साथ छात्रों की झड़प हुई, जिसके बाद मोबाइल इंटरनेट पर फिर से पाबंदी लगानी पड़ी।
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15 हजार से अधिक बच्चों का दोबारा दाखिला
मणिपुर के शिक्षा मंत्री थौनाओजम बसंतकुमार सिंह ने गुरुवार को कहा कि 347 राहत शिविरों में 15,915 छात्रों ने शरण ली थी। इनमें से 15,641 को पास के स्कूलों में दोबारा प्रवेश दिया गया है। थौनाओजम ने कहा कि जब 3 मई को राज्य में हिंसा भड़की, तो स्कूल गर्मी की छुट्टियों के लिए बंद थे। बिगड़ती कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण स्कूलों की छुट्टियों को बढ़ा दिया गया था। उन्होंने कहा, हालात सामान्य होने पर "कक्षा एक से 8वीं तक क्लास 5 जुलाई से फिर से खुल गई। उच्च कक्षाएं 10 अगस्त से शुरू हुईं।"
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केवल 26 स्कूल बंद हैं, 77 फीसदी अटेंडेंस
शिक्षा मंत्री के अनुसार 23 अक्टूबर को स्कूलों में उपस्थिति 77 प्रतिशत थी। उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर, चुराचांदपुर में 18 और इंफाल पूर्व और जिरीबाम जिलों में 26 स्कूलों को फिर से खोला जाना बाकी है। इनका उपयोग राहत शिविरों के रूप में या केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों के लिए किया जा रहा था।"
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दोबारा सर्टिफिकेट के लिए सरकारी मदद
विस्थापित छात्रों के कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदमों पर, थौनाओजम ने कहा, "छात्रों को पास के स्कूलों में मुफ्त में प्रवेश दिया गया है। मुफ्त प्रवेश सुनिश्चित करने और पाठ्यपुस्तकें, नोटबुक, स्टेशनरी आइटम और यूनिफॉर्म के लिए स्कूल शिक्षा विभाग से नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।" उन्होंने कहा कि विस्थापित छात्रों को पहचान पत्र जारी किए गए हैं और मणिपुर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा परिषद मणिपुर दोनों हिंसा के दौरान नष्ट हुए दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों को दोबारा प्राप्त करने में समन्वय कर रहे हैं।
छात्रों को मुफ्त ई-लर्निंग सामग्री
शिक्षा मंत्री थौनाओजम ने कहा, "100 प्रतिशत पाठ्यक्रम को पूरा करने के लिए शीतकालीन छुट्टियों में कटौती की जाएगी। शनिवार को पूरे दिन की कक्षाएं होंगी। इस संबंध में जल्द ही एक नया आदेश जारी किया जाएगा।" उन्होंने बताया कि जियो टीवी पर "लैरिक" नामक एक समर्पित शैक्षिक टीवी चैनल छात्रों को मुफ्त ई-लर्निंग सामग्री प्रदान कर रहा है।
कॉलेज छात्र पुनर्वास योजना 2023
उन्होंने मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह की सरकार की तरफ से की गई पहल के बारे में कहा कि मुख्यमंत्री कॉलेज छात्र पुनर्वास योजना 2023 शुरू की गई है जिसके तहत मुफ्त प्रवेश प्रदान किया जाएगा। शिक्षा मंत्री थौनाओजम ने कहा कि सरकार जल्द ही मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा, "सरकार एक दो दिनों के भीतर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की इच्छुक है। सुरक्षा एजेंसियों से भी इनपुट लिया गया है।"
31 अक्तूबर तक बढ़ाई गई इंटरनेट पर पाबंदी
हालांकि, गुरुवार देर शाम आई रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने इंटरनेट पर पाबंदियों को बढ़ाने का फैसला लिया है। अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि मणिपुर सरकार ने मोबाइल इंटरनेट प्रतिबंध को अगले पांच दिनों के लिए- 31 अक्तूबर तक बढ़ा दिया है।
CM बीरेन सिंह ने क्या कहा?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने बमुश्किल एक हफ्ते पहले कहा था कि सरकार अगले कुछ दिनों में प्रतिबंध वापस ले लेगी। सरकारी अधिसूचना के अनुसार, "इस आशंका के बाद प्रतिबंध बढ़ा दिया गया था कि कुछ असामाजिक तत्व जनता की भावनाओं को भड़काने वाली तस्वीरें, नफरत भरे भाषण और नफरत भरे वीडियो प्रसारित करने के लिए बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसका कानून और व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर असर हो सकता है।"
पुलिस महानिदेशक का बयान
आयुक्त (गृह) टी रणजीत सिंह की तरफ से जारी अधिसूचना के अनुसार 25 अक्तूबर को लिखे पत्र में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने बताया था कि अभी भी पुलिस स्टेशनों के सामने, सुरक्षा बलों के साथ जनता के टकराव, निर्वाचित सदस्यों के आवासों पर भीड़ के प्रयास और नागरिक विरोध प्रदर्शन जैसी हिंसा की घटनाओं की रिपोर्टें हैं।"
सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने का प्रयास
अधिसूचना में कहा गया है, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से दुष्प्रचार और अफवाहें फैलने की आशंका है। "देश-विरोधी और समाज-विरोधी लोगों के मंसूबों और गतिविधियों को विफल करने, शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने और जीवन के किसी भी नुकसान को रोकने के लिए, प्रसार को रोककर सार्वजनिक हित में कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त उपाय करना जरूरी हो गया है।"
पिछले छह महीने में केवल चार दिन चला इंटरनेट
बता दें कि तीन मई को हिंसा भड़कने के बाद मणिपुर में मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालात की समीक्षा के बाद 23 सितंबर को इंटरनेट बहाल कर दिया गया था। हालांकि, केवल चार दिन बाद- 26 सितंबर को दो लापता युवकों के शवों की तस्वीरें सामने आईं। स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के साथ छात्रों की झड़प हुई, जिसके बाद मोबाइल इंटरनेट पर फिर से पाबंदी लगानी पड़ी।