नगा संगठन पर लगेगा प्रतिबंध, विधानसभा चुनाव पर संशय के बादल
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मणिपुर सरकार ने नगा संगठन यूनाइटेड नगा कौंसिल (यूएनसी) को गैरकानूनी घोषित करने की तैयारी कर ली है। इस संगठन ने राज्य में नए जिलों के गठन के सरकार के फैसले के विरोध में बीते नवंबर से ही बेमियादी आर्थिक नाकेबंदी कर रखी है। इससे राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले दोनों हाइवे पर वाहनों की आवाजाही लगभग ठप है और जरूरी वस्तुओं की किल्लत से आम लोगों का जीवन दूभर हो गया है। इस नाकेबंदी की वजह से मार्च में होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों पर भी संशय के बादल घिर आए हैं।
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता के. जयकिशन ने बताया कि सरकार ने इस संगठन को गैरकानूनी घोषित करने का प्रारूप तैयार कर लिया है। अब यह प्रस्ताव जल्दी ही केंद्र को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य और आम लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला किया है।
जयकिशन ने आरोप लगाया कि नगा उग्रवादी संगठन एनएससीएन (आई-एम) गुट को खुश करने के लिए ही केंद्र ने अब तक इस संकट को दूर करने की दिशा में पहल नहीं की है। कांग्रेस ने मौजूदा संकट के लिए केंद्र और भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर वे गंभीर होते तो नाकेबंदी कब की खत्म हो जाती। केंद्र एनएससीएन के साथ शांति वार्ता कर रहा है और यूएनसी इसी उग्रवादी संगठन से संबद्ध है।
नगालैंड में बेमियादी बंद
एक फरवरी को होने वाले निकाय चुनावों का बायकाट करने वाले कई आदिवासी संगठनों ने शनिवार से नगालैंड में बेमियादी बंद की अपील की है। इन संगठनों ने महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के मुद्दे पर निकाय चुनावों के बायकाट का एलान किया है। इनके विरोध के बावजूद राज्य सरकार ने चुनाव समय पर कराने का फैसला किया है।
कई संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर गठित ज्वायंट कोआर्डिनेशन कमिटी (जेसीसी) ने पहले शुक्रवार से ही बंद की अपील की थी। लेकिन मुख्यमंत्री टीआर जेलियांग की अपील पर इसे एक दिन के लिए टाल दिया था। लेकिन शुक्रवार शाम को मंत्रिमंडल की बैठक में दस साल बाद होने वाले इन चुनावों को कराने को मंजूरी दे दी गई।
नगा संगठनों की दलील है कि उनके लिए सदियों पुराने पारंपरिक कानून ही वैध है। संविधान की धारा 371 (ए) के तहत उन कानूनों को सुरक्षा मिली है। उनका कहना है कि महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान पारंपरिक कानूनों में हस्तक्षेप करना है। इन संगठनों की धमकियों की वजह से लगभग डेढ़ सौ उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए हैं।