मणिपुर: उग्रवादियों का काल बनेंगे कोबरा कमांडो, जंगल वॉरफेयर में माहिर CRPF के दो हजार जवान रवाना
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' की विशेष इकाई 'कोबरा', जिसे जंगल वॉरफेयर में खासी महारत हासिल है, अब ये कमांडो मणिपुर में सक्रिय उग्रवादी समूहों का काल बनेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पुलिस-2 डिवीजन द्वारा कोबरा की दो बटालियन को मणिपुर भेजने के प्रपोजल को मंजूरी दे दी गई है। पिछले दिनों सीआरपीएफ की तरफ से मणिपुर में ऑपरेशनल ड्यूटी के लिए एक प्रपोजल दिया गया था। इस प्रपोजल पर गृह मंत्रालय में विचार करने के बाद सीआरपीएफ कोबरा की दो बटालियनों को मणिपुर के लिए रवाना कर दिया गया है। असम और पश्चिम बंगाल में तैनात सीआरपीएफ कोबरा की एक-एक बटालियन को मणिपुर भेजा गया है।
संयुक्त ऑपरेशनों को प्रभावी बनाने पर जोर
बता दें कि पिछले दिनों सबसे पहले अमर उजाला ने यह खबर प्रकाशित की थी कि सीआरपीएफ की कोबरा बटालियनों को मणिपुर में भेजने की तैयारी हो रही हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी सफलता मिलने के बाद केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' को कई बड़े मोर्चों पर अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। आने वाले दिनों में बीएसएफ और असम राइफल को सेना के साथ नई भूमिका में देखा जा सकता है। मणिपुर में मौजूद सेना, सीएपीएफ, असम राइफल और पुलिस के बीच समन्वय को बेहतर बनाने व संयुक्त ऑपरेशनों को प्रभावी बनाने की दिशा में नई प्लानिंग के तहत काम प्रारंभ किया गया है। मणिपुर में तीन मई 2023 को दो समूहों के बीच हिंसा भड़की उठी थी। अभी तक वहां तीन सौ से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। हिंसा की वारदातों में लगभग 1500 व्यक्ति घायल हुए हैं।
ड्रग माफिया पर भी बड़ा प्रहार होगा
म्यांमार से लगते मणिपुर के बॉर्डर एरिया में घुसपैठियों पर नकेल कसी जाएगी। ड्रग माफिया पर भी बड़ा प्रहार होगा। इसके लिए मणिपुर के हिंसाग्रस्त इलाकों में 300 से ज्यादा बुलेटप्रूफ बख्तरबंद गाड़ियां भी तैनात की जाएंगी। देश में दो तीन जिलों को छोड़कर बाकी क्षेत्रों में नक्सलियों का खात्मा हो चुका है। हालांकि नक्सलियों द्वारा सरेंडर करने की प्रक्रिया अभी तक जारी है। सैंकड़ों 'फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस' (एफओबी), जो नक्सलियों की घेराबंदी में सबसे ज्यादा कारगर साबित हुए हैं, सीएपीएफ जवान एक साल तक वहां से नहीं हटेंगे।
ऑपरेशनल ड्यूटी में कई बदलाव संभव .
केंद्रीय बलों के एक अधिकारी ने बताया, फिलहाल मणिपुर में कोबरा को ऑपरेशनल ड्यूटी पर तैनात करने का यह पहला चरण है। अगले कुछ दिनों में इस ड्यूटी को लेकर कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शानदार काम करने वाली सीआरपीएफ की दर्जनों कंपनियों को मणिपुर में तैनात किया जा सकता है। सीआरपीएफ की जंगल वॉरफेयर के लिए प्रशिक्षित 'कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन' (कोबरा) की कई दूसरी यूनिटों को भी मणिपुर के लिए रवाना किया जा सकता है।
उग्रवादी समूहों को सरेंडर के लिए करेंगे मजबूर
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की तरह मणिपुर में भी कम दूरी पर एफओबी स्थापित करने की योजना है। वहां पर उग्रवादी समूहों की दोतरफा घेराबंदी होगी। एक बॉर्डर एरिया से उग्रवादियों की सप्लाई चेन खत्म की जाएगी। दूसरा, आंतरिक क्षेत्रों में एफओबी के जरिए सुरक्षा बल, उग्रवादियों की कमर तोड़ेंगे। सुरक्षा बलों की नई रणनीति इस तरह से तैयार की जा रही है कि उग्रवादियों को कहीं छिपने की जगह ही न मिल सके। भारत-म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन तलाशी अभियान चलेगा। सेना और बीएसएफ, बॉर्डर एरिया में मोर्चा संभालेगी, जबकि सीआरपीएफ, कोबरा, असम राइफल और लोकल पुलिस, मणिपुर के भीतरी इलाकों में उग्रवादी समूहों को सरेंडर करने के लिए मजबूर करेगी।
9.214 किमी क्षेत्र में ही फेंसिंग लगी है
भारत-म्यांमार अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 1643 किलोमीटर है। अभी तक वहां 9.214 किमी क्षेत्र में ही फेंसिंग लग सकी है। बॉर्डर का बाकी हिस्सा अभी तक खाली है। पिछले साल लगभग 30000 करोड़ रुपये की लागत से फेंसिंग लगाने का काम प्रारंभ किया गया है। यह काम 10 वर्ष में पूरा होगा। इसके साथ ही बॉर्डर पर हाइब्रिड निगरानी प्रणाली (एचएसएस) के माध्यम से बाड़ लगाने की दो पायलट परियोजनाएं भी चल रही हैं। इसके तहत अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में एक-एक किलोमीटर के हिस्से पर बाड़ लगाई जा रही है। मणिपुर में लगभग 20 किलोमीटर के क्षेत्र में बाड़ लगाने के कार्य को मंजूरी मिल चुकी है।