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Manipur: मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने ट्विटर पर कुकी यूजर्स से की बहस, फिर डिलीट किए मैसेज

Sat, 01 Jul 2023 02:07 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल
अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 01 Jul 2023 02:07 PM IST
सार

राज्य में दो महीने की जातीय हिंसा के बाद, जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए थे, एन बीरेन सिंह शुक्रवार को राज्यपाल अनुसुइया उइके से मिलने के लिए त्याग पत्र के साथ अपने आवास से निकले थे...

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Manipur CM N Biren Singh argued with cookie users on Twitter, then deleted the messages
मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

हिंसाग्रस्त मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह शुक्रवार देर रात एक कुकी टि्वटर यूजर्स से बहस में उलझ गए। उन्होंने म्यांमार सीमा पार समुदायों के साथ जातीय समूह के संबंधों पर जोर दिया। शनिवार सुबह पोस्ट किए गए ट्विट कुछ घंटों बाद हटा दिए लिए गए।

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इससे पहले शुक्रवार को, एन बीरेन सिंह ने अपने समर्थकों के प्रदर्शन के बाद मणिपुर का मुख्यमंत्री बने रहने की घोषणा की थी, जिसमें उनसे पद न छोड़ने का आग्रह किया गया था। राज्य में दो महीने की जातीय हिंसा के बाद, जिसमें 100 से अधिक लोग मारे गए थे, सिंह शुक्रवार को राज्यपाल अनुसुइया उइके से मिलने के लिए त्याग पत्र के साथ अपने आवास से निकले थे। उनके घर के बाहर प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने उनका त्यागपत्र फाड़ दिया।

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कुछ घंटों बाद, सिंह ने ट्विटर पर कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को जवाब दिया, जिन्होंने उनके पोस्ट पर इस्तीफा न देने के बारे में टिप्पणी की थी। एक यूजर, थांग कुकी ने टिप्पणी की थी, आपको बहुत पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था।

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इस पर सिंह ने जवाब दिया, क्या आप भारत या म्यांमार से हैं?

मणिपुर के मुख्यमंत्री ने कम से कम दो अन्य ट्वीट्स में म्यांमार का संदर्भ दिया। एक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने कहा कि मैतेई की एक बड़ी आबादी पड़ोसी देश में भी रहती है, सिंह ने जवाब दिया, मैतेई कभी भी म्यांमार में अपनी मातृभूमि के बारे में नहीं पूछते।

एक अन्य व्यक्ति ने खुद को कुकी जनजाति के लिए अलग राज्य के प्रस्तावित नाम ज़ेलेंगम का नागरिक बताया। सिंह ने उन्हें जवाब दिया, म्यांमार में हो सकते हैं।

एक अन्य ट्विटर ने लिखा कि सिंह अपना त्याग पत्र फैक्स के माध्यम से राज्यपाल को भेजना सकते थे। उन्हें इसे भौतिक रूप से सौंपने की कोई आवश्यकता नहीं थी।

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