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Hindi News ›   India News ›   Manipur Assembly Election 2022 AFSPA may become a hindrance in the way of BJP this is the biggest issue of Northeast

Manipur Assembly Election 2022: अफ्स्पा बन सकता है भाजपा की राह में रोड़ा, पूर्वोत्तर का यह सबसे बड़ा मुद्दा

Sun, 09 Jan 2022 06:21 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 09 Jan 2022 06:21 AM IST
सार

इस बार भाजपा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा अफ्स्पा है। नगालैंड में सेना की फायरिंग में 14 नागरिकों की मौत के बाद पूर्वोत्तर भारत में अफस्पा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

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Manipur Assembly Election 2022 AFSPA may become a hindrance in the way of BJP this is the biggest issue of Northeast
सीएम बीरेन सिंह और ओकराम आयोबी सिंह (कांग्रेस) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीती हुई बाजी पलट दी थी। बहुमत से महज तीन कदम दूर कांग्रेस सत्ता का स्वाद चखते-चखते चूक गई थी। तब भाजपा ने अचानक एनपीपी, बीपीपी सहित निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल कर कांग्रेस को सत्ता से दूर कर दिया था। हालांकि इस बार भाजपा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा अफ्स्पा है। नगालैंड में सेना की फायरिंग में 14 नागरिकों की मौत के बाद पूर्वोत्तर भारत में अफस्पा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

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इस घटनाक्रम के बाद भाजपा की सहयोगी एनपीपी, बीपीपी असहज है। कांग्रेस सार्वजनिक तौर पर अफ्स्पा को वापस लेने की मांग कर रही है। पूरे पूर्वोत्तर में अफ्स्पा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में भाजपा के सामने अफ्स्पा से जुड़े मुद्दे को हल करने की चुनौती है। बड़ी सच्चाई है कि अगर समय रहते भाजपा ने इस मामले का हल नहीं निकाला तो विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा पार्टी पर भारी पड़ सकता है।
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तब कांग्रेस को चौंकाया था
बीते चुनाव में कांग्रेस बहुमत हासिल करने से महज तीन कदम दूर थी। राज्य के 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 21 सीटें हासिल हुई थी। हालांकि भाजपा ने रातोंरात एनपीपी, बीपीपी, एलजेपी और दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल कर कांग्रेस को हतप्रभ कर दिया था।
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मणिपुर चुनाव बेहद अहम
असम को पूर्वोत्तर की आत्मा तो मणिपुर को मुकुट कहा जाता है। इन दो राज्यों के जनादेश का असर शेष पांच राज्यों पर पड़ता है। बीते साल सीएम एन बीरेन सिंह के खिलाफ बगावत हुई थी। हालांकि तब भाजपा नेतृत्व ने बेहतर प्रबंधन के जरिए बगावत को थाम लिया था।

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