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Politics: ममता बोलीं- डीवीसी मुख्यालय के बंगाल से स्थानांतरित होने पर कोई आपत्ति नहीं; भाजपा ने किया पलटवार
Tue, 24 Sep 2024 07:41 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Tue, 24 Sep 2024 07:41 PM IST
सार
इस बीच खबर है कि ममता बनर्जी गुरुवार को सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और वाइस प्रिंसिपल (एमएसवीपी) के साथ बैठक कर सकती हैं। इस दौरान सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाएगी।
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ममता बनर्जी
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) मुख्यालय को कोलकाता से बाहर स्थानांतरित कर सकती है। वह नहीं चाहतीं कि यहां ऐसा निकाय रहे जो जलाशयों से राज्य में पानी छोड़ता है, जिससे लोगों की मौत होती है। ममता की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत काम करने वाले डीवीसी द्वारा प्रबंधित बांधों से पानी छोड़े जाने के बाद राज्य के दक्षिणी हिस्से के कई जिले जलमग्न हो गए।
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मामले में केंद्रीय मंत्री सुकांता मजूमदार ने कहा कि DVC के कानून के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार DVC का अभिन्न अंग है, लेकिन ममता बनर्जी हमेशा किसी न किसी तरह से ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करती हैं कि पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा नहीं है। बंगाल के लोग उन्हें सबक सिखाएंगे। ममता बनर्जी हमेशा दूसरों पर जिम्मेदारी डालती हैं, उनसे पूछें कि क्या उन्होंने इस DVC चीज का मुकाबला करने के लिए कोई पहल की है। पिछली बार भी ममता बनर्जी ने यही शब्द गढ़ा था कि यह मानव निर्मित बाढ़ है, अगर उन्हें इसकी जानकारी है तो उन्हें कोई पहल करनी चाहिए थी।
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मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा कि केंद्र को डीवीसी मुख्यालय ले जाने दीजिए। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कोलकाता से सब कुछ हटा दिया है और कुछ भी नहीं बचा है। वे कोलकाता में डीवीसी मुख्यालय रखेंगे, लेकिन कोलकाता की बात नहीं सुनेंगे और पानी छोड़ना जारी रखेंगे, जिससे बंगाल में बाढ़ आएगी और लोग मरेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में बाढ़ में 28 लोगों ने अपनी जान गंवाई।
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बीरभूम के आधिकारिक दौरे पर पहुंची ममता ने कहा कि हमें ऐसा निकाय नहीं चाहिए, जो पानी छोड़े और लोगों को मारे। डीवीसी की स्थापना लोगों को बाढ़ के कहर से बचाने के लिए की गई थी। ममता बनर्जी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक के बाद एक दो पत्र भेजे थे, जिसमें बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए हस्तक्षेप करने और केंद्रीय धन जारी करने का आग्रह किया गया था।
ममता का दावा है कि बाढ़ डीवीसी की ओर से अपने बांधों से अनावश्यक रूप से पानी छोड़े जाने के कारण आई थी। हालांकि, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने ममता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि डीवीसी के जलाशयों से पानी छोड़ते समय सभी मानदंडों का पालन किया गया था। इस बीच रविवार को पश्चिम बंगाल सरकार के दो अधिकारियों ने दामोदर घाटी जलाशय विनियमन समिति (डीवीआरआरसी) के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था।
मेडिकल कॉलेजों के अधिकारियों से मिल सकती हैं ममता
इस बीच खबर है कि ममता बनर्जी गुरुवार को सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और वाइस प्रिंसिपल (एमएसवीपी) के साथ बैठक कर सकती हैं। इस दौरान सुरक्षा उपायों की समीक्षा की जाएगी। बैठक सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टरों द्वारा एक महीने तक चले आंदोलन के बाद बुलाई गई थी।