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Maldives: भारत आना चाहते थे मालदीव के राष्ट्रपति, फिर बदला मन; अब मदद के लिए चीन के आगे हाथ फैलाने को मजबूर
Tue, 09 Jan 2024 10:08 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/फुजियान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/फुजियान
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Tue, 09 Jan 2024 10:08 PM IST
सार
मालदीव की नई सरकार ने माले में भारतीय उच्चायोग को बताया कि मुइज्जू भारत की यात्रा करना चाहते हैं। हालाँकि, इस पर कोई प्रगति नहीं हुई। हालांकि इस दौरान भी यह द्वीपीय देश माले से भारतीय सैनिकों की वापसी का दबाव बनाए हुए था।
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चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग और मालदीव के नए राष्ट्रपति मुइज्जू (फाइल)
- फोटो : amar ujala
विस्तार
मालदीव के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयानों के बाद शुरू विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच, सामने आया है कि मालदीव ने पिछले साल नवंबर में अपने राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के भारत दौरे का प्रस्ताव केंद्र सरकार के सामने रखा था। हालांकि इसे लेकर आगे कोई प्रगति नहीं हुई।
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मुइज्जू करना चाहते थे भारत यात्रा
सूत्रों ने बताया कि मालदीव की नई सरकार ने माले में भारतीय उच्चायोग को बताया कि मुइज्जू भारत की यात्रा करना चाहते हैं। हालाँकि, इस पर कोई प्रगति नहीं हुई। हालांकि इस दौरान भी यह द्वीपीय देश माले से भारतीय सैनिकों की वापसी का दबाव बनाए हुए था। यह आग्रह 17 नवंबर को मुइज्जू के मालदीव के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद किया गया था। हालांकि यह प्रस्ताव मौखिक था। बाद में वहां की सरकार इस प्रस्ताव पर आगे नहीं बढ़ी।
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चीन से की मुइज्जू ने की पर्यटकों को मालदीव भेजने के प्रयासों को तेज करने की अपील
गौरतलब है कि मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू इस समय चीन की पांच दिवसीय यात्रा पर हैं। यहां उन्होंने भारतीय पर्यटकों द्वारा मालदीव की यात्रा रद्द किए जाने की घटनाओं के बीच चीन से उनके देश में अधिक पर्यटकों को भेजने के प्रयासों को 'तेज' करने का अनुरोध किया। फुजियान प्रांत में मालदीव बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए उन्होंने चीन को अपना निकटतम सहयोगी बताया। उन्होंने कहा कि चीन हमारे सबसे करीबी सहयोगियों और विकास साझेदारों में से एक बना हुआ है।
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चीन की बीआरआई परियोजना पर भी बोले
यहां बोलते हुए उन्होंने 2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा शुरू की गई बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजनाओं की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि चीन हमारे सबसे करीबी सहयोगियों और विकास भागीदारों में से एक है। इस परियोजना ने मालदीव को इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं प्रदान कीं। अपने संबोधन में मालदीव के राष्ट्रपति ने चीन से मालदीव में अपने पर्यटकों को अधिक से अधिक संख्या में भेजने का आग्रह किया। इस दौरान, दोनों देशों ने मालदीव में एक एकीकृत पर्यटन क्षेत्र विकसित करने के लिए 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर की परियोजना पर भी हस्ताक्षर किए।
भारत के साथ बढ़ा तनाव
गौरतलब है कि हाल ही में मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय सैनिकों की उनके देश से वापसी की बात कही थी जिसके बाद से दोनों देशों के बीच सबकुछ ठीक नहीं है। इस बीच मालदीव के नेताओं द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए आपत्तिजनक बयानों के बाद शुरू हुए विवाद से दोनों के बीच तनाव और बढ़ गया है। इसके बाद, एक ओर जहां इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) ने पर्यटन और व्यापार संघ से मालदीव को बढ़ावा देना बंद करने का आग्रह किया है तो दूसरी ओर मालदीव की टूरिज्म इंडस्ट्री ने भारत विरोधी टिप्पणियों को लेकर अपने ही नेताओं को लताड़ लगाई है।
इस विवाद के बीच कई टूर ऑपरेटर्स ने द्वीपीय देश के लिए सेवा बंद करने का एलान कर दिया है। इसके बजाय ऑपरेटर्स ने लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही है। उधर लोगों ने भी इंटरनेट पर लक्षद्वीप सर्च करना शुरू कर दिया है।
क्या था मामला
दरअसल, दो जनवरी को पीएम मोदी ने केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप का दौरा किया था और इस दौरे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर किए थे। उन्होंने स्नॉर्कलिंग पर हाथ आजमाने के अपने अनुभव को भी उल्लेख किया था। पीएम मोदी के इस पोस्ट पर लक्षद्वीप की मंत्री मरियम शिउमा ने भारत के प्रधानमंत्री पर अपमानजनक टिप्पणी के साथ उनका मजाक उड़ाया था। उनकी पोस्ट में पीएम मोदी की लक्षद्वीप दौरे की तस्वीरें भी थी।