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अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष दर्जा नहीं, विशेष भेदभाव था: अजीत डोभाल

Sat, 07 Sep 2019 01:09 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Sat, 07 Sep 2019 01:09 PM IST
सार

  • अधिकतर कश्मीरी अनुच्छेद 370 के हटने से खुश हैं। 
  • पाकिस्तान परेशानी खड़ी करने की कोशिश में, 230 पाकिस्तानी आतंकियों का पता चला है।
  • हम पाकिस्तानी आतंकवादियों से कश्मीरियों के जीवन की रक्षा के लिए दृढ़ हैं।
  • जम्मू-कश्मीर के 92.5 फीसदी इलाके में कोई प्रतिबंध नहीं लगा है।

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Majority of Kashmiris support the abrogation of article said NSA Ajit Doval
अजीत डोभाल - फोटो : ANI

विस्तार

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का कहना है कि वह इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हैं कि अधिकतर कश्मीरी अनुच्छेद 370 के हटने से खुश हैं। वे अधिक से अधिक अवसर, भविष्य, आर्थिक प्रगति और रोजगार के अवसरों को देख रहे हैं, केवल कुछ शरारती तत्व ही इसका विरोध कर रहे हैं।

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डोभाल ने कहा कि सेना के अत्याचारों का कोई सवाल नहीं उठता, राज्य (जम्मू-कश्मीर) पुलिस और कुछ केंद्रीय बल सार्वजनिक व्यवस्था संभाल रहे हैं। भारतीय सेना वहां आतंकियों से लड़ने के लिए है। जम्मू-कश्मीर के 199 पुलिस स्टेशन एरिया में से केवल 10 में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी हैं। बाकी पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

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230 आतंकियों का पता चला

एनएसए ने आगे कहा कि पाकिस्तान परेशानी खड़ी करने की कोशिश कर रहा है। 230 पाकिस्तानी आतंकियों का पता चला है। उनमें से कुछ ने घुसपैठ की थी और कुछ को गिरफ्तार किया गया है।

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हम पाकिस्तानी आतंकवादियों से कश्मीरियों के जीवन की रक्षा के लिए दृढ़ हैं, भले ही हमें प्रतिबंध लगाने पड़ें। आतंक एकमात्र ऐसा साधन है जिससे पाकिस्तान अशांति पैदा करता है। 

डोभाल ने आगे बताया कि सीमा के पास 20 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तानी संचार टावर हैं। वो संदेश भेजने की कोशिश कर रहे हैं, हमने बातचीत सुनी है वो यहां अपने आदमियों से कह रहे थे, "कितने सेब के ट्रक चल रहे हैं, क्या तुम उन्हें रोक नहीं सकते? क्या हमें तुम्हारे लिए चूड़ियां भेजनी चाहिए?"  जम्मू-कश्मीर के 92.5 फीसदी इलाके में कोई प्रतिबंध नहीं लगा है।

सब कानून के दायरे में हो रहा है

डोभाल ने नेताओं को नजरबंद किए जाने पर कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने में समस्याएं हो सकती थीं और अगर सभाएं होतीं तो आतंकवादी हालात का फायदा उठाते। उनमें (जम्मू-कश्मीर के नेता) से किसी को भी देशद्रोह या फिर किसी अपराध के आरोप के साथ नजरबंद नहीं किया गया है। जब तक लोकतंत्र के लायक वातावरण नहीं बन जाता वो तब तक ही नजरबंदी में हैं, जिसका मुझे विश्वास है कि जल्द होगा। सबकुछ कानून के दायरे में हो रहा है, वह अपनी नजरबंदी को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।

डोभाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हालात उनकी उम्मीदों से बेहतर हैं, केवल एक ही घटना सामने आई है। जिसमें छह अगस्त को एक लड़के की मौत हो गई, उसकी मौत बुलेट की चोट से नहीं हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया है कि उसकी मौत किसी मजबूत चीज से टकराने के कारण हुई है। इतने सारे दिनों में केवल एक घटना सामने आई है, हम आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों की बात कर रहे हैं और केवल एक घटना सामने आई है।

उन्होंने आगे कहा कि हम सभी प्रतिबंधों को हटते हुए देखना चाहते हैं, ये उसपर निर्भर करता है कि पाकिस्तान कैसे व्यवहार करता है। अगर पाकिस्तान बर्ताव करने लगे कि आतंकी घुसपैठ ना करें और पाकिस्तान अपने टावरों के माध्यम से ऑपरेटर्स को सिग्नल भेजना बंद कर देता है तो हम प्रतिबंध हटा सकते हैं।

दो आतंकी फरार

श्रीनगर से रोजाना 750 से अधिक ट्रक आ-जा रहे हैं, कल दो आतंकी आए थे, जो एक प्रमुख फल व्यापारी हमीदुल्लाह राथर को निशाना बनाना चाहते थे। लेकिन वह उसे (फल व्यापारी) ढूंढ नहीं पाए क्योंकि वह नमाज पढ़ने या फिर किसी और काम से चला गया था। वे उसके दो कर्मियों को सोपोर के भीतर 5 किलोमीटर दूर उसके घर से ले गए। जहां उन्होंने उसके बेटे मोहम्मद इरशाद और ढाई साल की बेटी अस्मा जान पर गोली चलाई। दोनों पाकिस्तानी आतंकियों के पास पिस्टल थी और पंजाबी बोल रहे थे, दोनों ही फरार हैं।





एनएसए ने आगे कहा कि एक और घटना हुई है, जब दुकानदार ने अपनी दुकान खोलने की कोशिश की तो उसे आतंकियों ने गोली मार दी। पाकिस्तान ऐसी स्थिति बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि बाद में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कह सके कि यहां आशांति है। पाकिस्तान झूठे और काले प्रचार में लिप्त है और कुछ बेखबर लोग एक या दो घटनाओं को जनता की राय मान रहे हैं।

डोभाल ने कहा कि आधुनिक और आगामी समाजों के लिए कई कानून थे जिन्हें जम्मू और कश्मीर के लोगों से वंचित रखा गया था, जैसे शिक्षा के अधिकार और संपत्ति के अधिकार से वंचित रखा गया था। ऐसे 106 कानून पांच अगस्त से पहले अनुच्छेद 370 का संरक्षण कर रहे थे। यह विशेष दर्जा नहीं था, यह विशेष भेदभाव था।

पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकवाद को उत्प्रेरित करने के लिए धारा 370 का इस्तेमाल किया है। साल 1988 में उसने ऑपरेशन टोपाज लॉन्च किया था, ताकि वह पॉलिटिकल स्पेस को नुकसान पहुंचा सके। ऑपरेशन टोपाज का तरीका बिल्कुल वैसा था, जैसा अफगानिस्तान में पाकिस्तानी असामाजिक तत्वों ने इस्तेमाल किया था।

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