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डीआरडीओ की बड़ी सफलता: अब आसमान से आने वाले खतरे और समुद्र में छिपे दुश्मन; अब दोनों के लिए तैयार है भारत
Sat, 13 Jun 2026 10:23 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sat, 13 Jun 2026 10:23 AM IST
सार
DRDO Success: भारत ने डीआरडीओ के जरिए रक्षा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 10 और 11 जून को हुए तीन सफल परीक्षणों में बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली और नई नेवल एंटी-शिप मिसाइल का प्रदर्शन किया गया। इंटरसेप्टर मिसाइलों ने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया। इन परीक्षणों के बाद भारत उन्नत मिसाइल रक्षा क्षमता वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में और मजबूती से शामिल हो गया है।
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डीआरडीओ ने किया सफल परीक्षण।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल और लगातार उभरते मिसाइल खतरों के बीच भारत ने अपनी रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई पर पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली और नई नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल का सफल परीक्षण कर देश की रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। इन सफल परीक्षणों ने न केवल भारत की सुरक्षा तैयारियों को मजबूत किया है, बल्कि स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि दर्ज कराई है।
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डीआरडीओ की नई उपलब्धि क्यों है खास?
रक्षा मंत्रालय के अनुसार 10 और 11 जून को लगातार तीन उड़ान परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों में बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया गया। परीक्षण के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता के साथ निशाना बनाकर नष्ट किया। यह प्रणाली आधुनिक तकनीकों से विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य भविष्य में सामने आने वाले जटिल मिसाइल खतरों का मुकाबला करना है। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत की सामरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।
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क्या भारत अब दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में शामिल हो गया है?
इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता मौजूद है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह प्रणाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल श्रेणी तक के खतरों से निपटने की क्षमता रखती है। इसका मतलब यह है कि लंबी दूरी से दागी जाने वाली मिसाइलों को भी भारतीय सुरक्षा तंत्र हवा में ही रोक सकता है। यह उपलब्धि भारत की प्रतिरोधक क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को नई मजबूती देती है।
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समुद्री मोर्चे पर कौन सी नई ताकत मिली है?
मिसाइल रक्षा प्रणाली के अलावा डीआरडीओ ने पहली बार नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज का भी सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल भारतीय सशस्त्र बलों, विशेषकर नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक युद्ध में समुद्री सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह मिसाइल दुश्मन के युद्धपोतों और समुद्री लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से निशाना बनाने में मदद करेगी। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।ये भी पढ़ें- West Bengal: तृणमूल का अस्तित्व बना यक्ष प्रश्न, पार्टी की दुर्गति के खलनायक बने भावी युवराज अभिषेक बनर्जी