चुनावी राज्यों में बड़े बदलाव: बिहार, बंगाल से लेकर तमिलनाडु तक नए राज्यपाल; किन्हें मिले दायित्व? जानिए सबकुछ
इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संवैधानिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपाल और उपराज्यपाल नियुक्त किए हैं। इसके तहत आरएन रवि को पश्चिम बंगाल, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु की जिम्मेदारी मिली है। आइए यहां अन्य राज्यों में नियुक्त किए गए नए राज्यपाल के बारे में जानते हैं।
इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा संवैधानिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपाल और उपराज्यपाल नियुक्त किए हैं। इसके तहत आरएन रवि को पश्चिम बंगाल, राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु की जिम्मेदारी मिली है। आइए यहां अन्य राज्यों में नियुक्त किए गए नए राज्यपाल के बारे में जानते हैं।
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देश की सांविधानिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपाल और उपराज्यपाल नियुक्त किए हैं। यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जब कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और आने वाले समय में चुनावी माहौल भी बनने वाला है।
पूर्व नौकरशाहों और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाली हस्तियों को जिम्मेदारी
केंद्र ने इस फेरबदल में अनुभवी राजनेताओं, पूर्व नौकरशाहों और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को जिम्मेदारी देकर संवैधानिक संस्थाओं को और मजबूत करने का संदेश दिया है। आइए उनके बारे में जानते हैं।
जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल बनाया गया है। वे त्रिपुरा के पूर्व उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और लंबे समय तक संगठनात्मक राजनीति में सक्रिय रहे हैं। इससे पहले वे तेलंगाना के राज्यपाल के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। वहीं तेलंगाना के नए राज्यपाल के रूप में शिव प्रताप शुक्ल को जिम्मेदारी दी गई है। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद रह चुके हैं तथा लंबे समय से भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं। इसके साथ ही नंद किशोर यादव को नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव रह चुके हैं और आंतरिक सुरक्षा व प्रशासनिक मामलों में उनका लंबा अनुभव रहा है।

सीवी आनंद बोस के इस्तीफे के बाद आर एन रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल बनाया गया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रवि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम पदों पर भी काम कर चुके हैं और इससे पहले तमिलनाडु के राज्यपाल रहे हैं। तमिलनाडु के लिए राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे पहले बिहार और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके हैं और लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। इसके साथ ही बिहार के नए राज्यपाल के रूप में अनुभवी नेता जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को नियुक्त किया गया है। इससे पहले इन्होंने कश्मीर में भी कमांडर के रूप में बड़ी जिम्मेदारी निभाई है।
इसके साथ ही कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया गया है। वे जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं तथा लंबे समय से सक्रिय राजनीति में भूमिका निभाते रहे हैं। इसी फेरबदल में तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं और कूटनीति के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं। वहीं कविंदर गुप्ता को लद्दाख का उपराज्यपाल भी बनाया गया है।
तरणजीत सिंह संधू के बारे में जानिए
पूर्व राजनयिक तरणजीत सिंह संधू को गुरुवार को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। उन्होंने वीके सक्सेना की जगह ली है, जिन्हें अब लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है। 63 वर्षीय संधू 1988 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी रहे हैं और अमेरिका से जुड़े मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। वे फरवरी 2020 से जनवरी 2024 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के राजदूत रहे।
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इससे पहले भी वे कई बार वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। 2013 से 2017 तक वे वहां उप-मिशन प्रमुख रहे और 1997 से 2000 के बीच प्रथम सचिव (राजनीतिक) के रूप में अमेरिकी कांग्रेस से समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा वे 2005 से 2009 तक संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी मिशन में भी कार्य कर चुके हैं।
2024 लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं
संधू ने 2024 के लोकसभा चुनाव में अमृतसर सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वहीं उनके पूर्ववर्ती वीके. सक्सेना करीब चार साल तक दिल्ली के उपराज्यपाल रहे। 26 मई 2022 को पद संभालने के बाद उन्होंने कहा था कि वे राज निवास तक सीमित रहने के बजाय शहर की सड़कों पर सक्रिय रूप से नजर आएंगे। उनके कार्यकाल के दौरान जी20 का सफल आयोजन भी राजधानी में हुआ। हालांकि इस दौरान दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के साथ प्रशासनिक और नीतिगत मुद्दों को लेकर कई बार टकराव भी देखने को मिला।
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क्या कहना है राजनीतिक विश्लेषकों का?
ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह फेरबदल केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि केंद्र की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्यों में अनुभवी व्यक्तियों की नियुक्ति से केंद्र-राज्य समन्वय मजबूत होने और संवैधानिक दायित्वों के बेहतर निर्वहन की उम्मीद जताई जा रही है।
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