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महात्मा गांधी: राजनीति सत्ता प्राप्ति ना होकर मानव सेवा की भावना है, इसका उद्देश्य स्वराज की स्थापना
Fri, 02 Oct 2020 12:29 AM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 02 Oct 2020 12:29 AM IST
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महात्मा गांधी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
महात्मा गांधी ने राजनीति का आधार धर्म को स्वीकार किया था। महात्मा गांधी ने मानवीय धर्म के अंगों में सत्य, अहिंसा और निर्भयता को प्राथमिकता दी। राजनीति में भी महात्मा गांधी ने इन तीनों अंगों को शामिल किया। वह राजनीति का उद्देश्य स्वराज की स्थापना को मानते थे।
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महात्मा गांधी कूटनीति को राजनीति का अंग मानने के पक्ष में नहीं थे। इसके अलावा वो इस बात से भी सहमत नहीं थे कि राजनीति में सच्चाई का कोई स्थान नहीं है। उनका मत था कि लड़ाई तो अकेले ही लड़नी ही चाहिए और आत्मबल के बिना कोई भी व्यक्ति अकेले नहीं लड़ सकता।
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सशक्त और स्वावलंबी बनना उनकी राजनीति के प्रमुख लक्ष्य थे। महात्मा गांधी का मानना था कि इन दोनों के दम पर ही स्वाधीनता हासिल की जा सकती है। अशक्त की उचित प्रार्थना भी अनसुनी रह जाती है। निर्बल का कोई सहायक नहीं होता है। अपने देशवासियों पर विश्वास कर और स्वंय सशक्त बन अपने देश को सबल और समर्थ बनाने का दृढ़संकल्प लेने से ही देश की स्वाधीनता की रक्षा संभव है।
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महात्मा गांधी की राजनीति का मूलविचार सत्ता प्राप्ति ना होकर मानव सेवा की भावना है। गांधी इस बात से बिस्कुल सहमत नहीं थे कि राजनीति में सच्चाई के लिए कोई जगह नहीं है।