Maharashtra: इस बार अजित पवार को नहीं मिली मोदी-शाह की बधाई, क्या महाराष्ट्र की स्क्रिप्ट में अभी बाकी है सीन?
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति में मची उथल-पुथल अभी जारी है। अजित पवार, डिप्टी सीएम बन गए हैं। इसके बाद एनसीपी सहित विभिन्न दलों की बैठकों के दौर चल रहे हैं। एनसीपी प्रमुख शरद पवार कह रहे हैं कि वे एक समय भोजन करेंगे, लेकिन दोबारा से अपनी पार्टी को खड़ा करेंगे। इन सबके बीच महाराष्ट्र में 'बधाई', चर्चा का विषय बनी है। नवंबर 2019 में महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के दौरान भी एक बड़ा उलटफेर हुआ था। सुबह चार बजे एकाएक राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया। इसके बाद सुबह आठ बजे देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिला दी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई दी थी। भाजपा के तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उस घटनाक्रम को प्रजातंत्र की जीत करार दिया था। इस बार भी अजित पवार जब डिप्टी सीएम बनें हैं, तो मोदी और शाह की तरफ से 'बधाई' देखने को नहीं मिली। राजनीतिक चर्चा में इस बात को अहम माना जा रहा है। कई लोग कयास लगा रहे हैं कि क्या महाराष्ट्र की स्क्रिप्ट में अभी एक 'सीन' बाकी है।
यह भी पढ़ें: Maharashtra News LIVE: पुणे एनसीपी ने शरद पवार के समर्थन में पेश किया प्रस्ताव, अजित पवार की बढ़ेंगी मुश्किलें
अजित पवार को इस बार पीएम या शाह का बधाई संदेश नहीं मिला है। इस बात को मौजूदा राजनीतिक स्थिति के मद्देनजर अहम माना जा रहा है। ऐसे कयास लग रहे हैं कि अभी कुछ बाकी है। जब से अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली है, तभी से महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल मची है। 2019 में जब तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अल सुबह ही देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और अजित पवार को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी, तो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ी हलचल मच गई थी। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक ट्वीट में लिखा, महाराष्ट्र के सीएम और डिप्टी सीएम के रूप में शपथ लेने पर क्रमश: देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार को बधाई। मुझे विश्वास है कि वे महाराष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए लगन से काम करेंगे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी दोनों को बधाई दी थी।
2019 में उप मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले अजित पवार ने भी अपने ट्वीट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रिया अदा किया था। उन्होंने लिखा था कि पीएम नरेंद्र मोदी का शुक्रिया। हम स्थिर सरकार देंगे, जो महाराष्ट्र के विकास के लिए कड़ी मेहनत करेगी। इतना ही नहीं, अजित पवार ने उस वक्त केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण, राजनाथ सिंह और पीयूष गोयल सहित भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े नेताओं का भी शुक्रिया अदा किया। उक्त नेताओं ने भी अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनने की बधाई दी थी। उस वक्त एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने अपने भतीजे अजित पवार के उस कदम से दूरी बना ली थी। पवार का कहना था कि भाजपा का समर्थन करना, अजित पवार का निजी फैसला है। इसमें एनसीपी की कोई भूमिका नहीं है। बता दें कि उस वक्त अजित पवार को एनसीपी विधायक दल के नेता पद से हटा दिया गया था। महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थीं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस बार अजित पवार को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की बधाई न मिलना, इससे कई तरह के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर हो सकता है। वजह, शिवसेना से बगावत कर सीएम पद हासिल करने वाले एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम अजित पवार से खुश नहीं हैं। महाविकास अघाड़ी की सरकार में भी वे अजित पवार से नाराज थे। महाराष्ट्र के ताजा घटनाक्रम के बाद अब एकनाथ शिंदे, खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं। डिप्टी सीएम अजित पवार चाहते हैं कि उन्हें वित्त और सिंचाई जैसे विभाग दिए जाएं। पूर्व में सिंचाई विभाग में रहते हुए अजित पवार के खिलाफ मामले दर्ज हुए थे। इन सबके मद्देनजर, अभी महाराष्ट्र की राजनीति में बदलाव संभव है।