महाराष्ट्र सत्ता संग्राम : मुख्यमंत्री पद पाकर भी बहुत कुछ खो देगी शिवसेना
- अहम मंत्रालयों और स्पीकर पद पर होगा कांग्रेस-एनसीपी का कब्जा
- हिंदुत्व के मुद्दे पर नरम रुख अपनाने के लिए पार्टी होगी मजबूर
- जयपुर भेजे गए अपने विधायकों को कांग्रेस ने वापस मुंबई बुलाया
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विस्तार
महाराष्ट्र में बनते नए राजनीतिक समीकरणों में भले ही शिवसेना अपना मुख्यमंत्री बनाने की हसरत पूरी कर ले, लेकिन कई मोर्चे पर उसके हाथ खाली रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक, अगर सरकार बनती है तो गृह, कृषि, वित्त जैसे अहम मंत्रालय के अलावा स्पीकर का पद भी कांग्रेस और एनसीपी के पास होगा। पूरे कार्यकाल में शिवसेना को जहां हिंदुत्व के मुद्दे पर रक्षात्मक रुख अपनाना होगा, वहीं हिंदुत्व की सियासत पर अकेले कब्जा करने के लिए भाजपा इससे जुड़े मुद्दों को लगातार हवा देती रहेगी।
नए फार्मूले में शिवसेना को ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी। भाजपा से तीन दशक पुरानी दोस्ती टूटने की वजह भी यही कुर्सी बनी। कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने की स्थिति में शिवसेना की सबसे बड़ी जिद तो पूरी होगी, मगर अन्य मोर्चों पर उसे लगातार कांग्रेस-एनसीपी का दबाव झेलना होगा। राज्यसभा, विधानसभा की सीटों में बंटवारे में भी शिवसेना को घाटा उठाना होगा। क्योंकि इन पदों को तीन दलों में बराबर बांटा जाएगा।
भाजपा चिंतित मगर बेहतर की उम्मीद भी
कांग्रेस-एनसीपी से शिवसेना की दोस्ती से भाजपा चिंतित तो है, मगर उसे भविष्य में पार्टी के लिए बेहतर होने की भी उम्मीद है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव दो-दो चुनावों में भाजपा निर्विवाद रूप से सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। शिवसेना के साथ रहते हिंदुत्व की सियासत पर दो दलों का कब्जा था।
अब शिवसेना के कांग्रेस-एनसीपी का हाथ थामने के बाद पार्टी हिंदुत्व की सियासत की पूरी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास करेगी। यह गठबंधन वैसा ही है जैसे जम्मू-कश्मीर में भाजपा-पीडीपी गठबंधन था। विपरीत विचारधारा वाले दलों के बीच गठबंधन के कारण सरकार लगातार अंतर्विरोधों में घिरी रही। इससे खासतौर से शिवसेना के खिलाफ विपरीत सियासी माहौल बनेगा।
शिवसेना ने दायर नहीं की याचिका
शिवसेना ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए तीन दिन का समय नहीं देने के राज्यपाल के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की। इससे पहले कोर्ट रजिस्ट्री ने उन्हें बुधवार सुबह साढ़े दस बजे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ के समक्ष याचिका दायर करने को कहा था।
शिवसेना के वकील सुनील फर्नांडिस ने बताया, राष्ट्रपति शासन लगने के बाद पार्टी ने याचिका नहीं दायर करने का फैसला किया। हमने राष्ट्रपति शासन के फैसले के खिलाफ नई याचिका तैयार की है, इसे कब दायर किया जाएगा इस पर फिलहाल फैसला नहीं लिया गया है।
जयपुर से वापस मुंबई लौटे कांग्रेस विधायक
महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के एक दिन बाद बुधवार को कांग्रेस के विधायक मुंबई लौट आए। खरीद फरोख्त की आशंका के बीच कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को जयपुर भेज दिया था। वापस लौटे एक विधायक ने कहा कि हमें कोई नहीं खरीद सकता क्योंकि कांग्रेस हम सभी के खून में है। जो पार्टी छोड़कर जाना चाहते थे, वे पहले ही जा चुके हैं।