{"_id":"5fccc0178ebc3ecf613393c5","slug":"maharashtra-rs-4-89-lakh-compensation-to-a-woman-who-was-a-victim-of-a-road-accident","type":"story","status":"publish","title_hn":"महाराष्ट्र : 2017 में सड़क हादसे की शिकार हुई महिला को 4.89 लाख रुपये का मुआवजा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
महाराष्ट्र : 2017 में सड़क हादसे की शिकार हुई महिला को 4.89 लाख रुपये का मुआवजा
Sun, 06 Dec 2020 05:19 PM IST
दीप्ति मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ठाणे
Published by: दीप्ति मिश्रा
Updated Sun, 06 Dec 2020 05:19 PM IST
विज्ञापन
सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला।
महाराष्ट्र के ठाणे शहर में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क हादसे की शिकार एक महिला को मुआवजे के तौर पर 4.89 लाख रुपये दिए जाने का आदेश दिया है। 34 वर्षीय महिला को वर्ष 2017 में एक सड़क हादसे का शिकार होने के बाद लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था।
विज्ञापन
छात्रों को घर में पढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह कमाने वाली सुनीता भानुशाली के स्कूटर को एक चौपहिया पहिया ने तीन मई, 2017 को टक्कर मार दी थी, जिसके कारण भानुशाली को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था और लंबे समय तक उनकी आय का कोई साधन नहीं था।
विज्ञापन
मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के सदस्य एवं जिला न्यायाधीश एम एम वली मोहम्मद ने एक दिसंबर को जारी अपने आदेश में चौपहिया वाहन के मालिक और बीमा कंपनी को भानुशाली को 4.89 लाख रुपये देने को कहा है। वाहन के मालिक और बीमा कंपनी को आदेश दिया गया है कि वे पीड़िता को सात प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भुगतान करें।
विज्ञापन
14.58 लाख रुपये का मुआवजा
इससे पहले एमएसीटी ने वर्ष 2016 में सड़क दुर्घटना में मारी गयी एक महिला के परिवार को 14.58 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया था। 28 वर्षीय वर्षा वैटी एक व्यक्ति के साथ 27 नवंबर, 2016 को मोटरसाइकिल पर अपने घर जा रहीं थीं। इसी दौरान तेज गति से आ रहे टैंपो ने ओवला गांव के पास पीछे से टक्कर मार दी। मोटरसाइकिल पर सवार दोनों लोग नीचे गिर गए। दुर्घटना में वैटी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। वैटी उस समय स्वरोजगार करती थी और हर महीने 12,000 रुपये कमाती थी। उनके घर के लोग उनकी आमदनी पर आश्रित थे।
न्यायाधिकरण के सदस्य आर एन रोकडे ने पिछले सप्ताह अपने आदेश में दुर्घटना के लिए टैंपो को जिम्मेदार माना। इसलिए उन्होंने वाहन के मालिक और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से याचिका दायर करने की तारीख से आठ प्रतिशत की ब्याज दर के साथ दावे का भुगतान करने को कहा। न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि टैंपो ड्राइवर की लापरवाही से दुर्घटना हुई। टैंपो की बीमाकर्ता रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने दावे को चुनौती दी, लेकिन न्यायाधिकरण ने उसकी दलीलों को खारिज कर दिया।