Maharashtra : राज्यसभा चुनाव ने लिख दी थी 'महा'संकट की पटकथा, यहां पढ़ें पर्दे के पीछे की कहानी
महाराष्ट्र में पर्दे के पीछे का क्या गणित है इसका खुलासा नहीं हुआ है। शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने मंगलवार शाम तक अपने पत्ते नहीं खोले। वहीं, राजनीतिक हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री व विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस की चुप्पी से संदेह बढ़ गया है। शिवसेना के नाराज नेता एकनाथ शिंदे की शिवसेना में अहमियत रही है।
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महाराष्ट्र विधान परिषद के ताजा चुनावी नतीजों के बाद राज्य एक बार फिर नए सियासी मोड़ पर आ खड़ा हुआ है, जिसकी सबसे बड़ी वजह भाजपा की पांच सीटों पर अप्रत्याशित जीत है। इसके चलते मौजूदा महाविकास आघाड़ी सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, महाराष्ट्र में मौजूदा सियासी संकट की पटकथा असल में राज्यसभा चुनावों के दौरान ही रख दी गई थी। तब संसद के उच्च सदन के लिए हुए चुनावों में 106 विधायकों वाली भाजपा 123 वोट लेकर तीन सांसद बनवाने में कामयाब रही।
अब सोमवार को विधान परिषद चुनावों में उसने सत्ता पक्ष में सेंधमारी जारी रखते हुए 134 विधायकों का समर्थन हासिल कर अपने पांचों उम्मीदवार जितवा लिए। इस हिसाब से उसने 10 दिन में ही 11 विधायकों का समर्थन बढ़ा लिया है और आगे सरकार बनाने के लिए भी इतने ही समर्थन की दरकार है। वहीं, इसके उलट 162 विधायकों को अपने पाले में बताने वाली आघाड़ी के पांच सदस्य ही जीत पाए। खुद सत्तारूढ़ शिवसेना को 55 विधायकों के बावजूद 52 वोट ही हासिल हुए।
पर्दे के पीछे की कहानी... नंबर गेम में यूं आगे हुई भाजपा
विधान परिषद की कुल 30 में से 10 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा ने पांच उम्मीदवार उतारे थे जबकि उसके पास संख्या केवल चार को जिताने लायक ही थी। लेकिन सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से हुई क्रॉस वोटिंग और निर्दलियों के समर्थन ने उसका रास्ता साफ कर दिया। राज्यसभा की तरह तरजीही आधार पर हुए चुनाव के पहले राउंड में भाजपा को चार, राकांपा-शिवसेना को दो-दो और कांग्रेस को एक सीट मिली।
दूसरे राउंड में भाजपा के पांचवें उम्मीदवार प्रसाद लाड और कांग्रेस के भाई जगताप व चंद्रकांत हंडोरे के बीच कड़ी टक्कर हुई। जीत के लिए न्यूनतम जरूरत 26 वोटों की थी। लिहाजा, 44 विधायकों वाली कांग्रेस के लिए दोनों उम्मीदवारों को जिताना मुश्किल था। ऐसे में जगताप को 26 वोट मिले पर हंडोरे को 22 ही मत पड़े और वे हार गए। लेकिन इस टक्कर में 28 वोट लेकर लाड ने सबको चौंका दिया।
फडणवीस ने निर्दलीयों को साधा
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है, लाड की जीत से साफ है कि शिवसेना और कांग्रेस के कई विधायकों ने अपने दल के बजाय भाजपा के समर्थन में क्रॉस वोटिंग की है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस निर्दलियों से भी समर्थन हासिल करने में सफल रहे।
शिंदे ने नहीं खोले पत्ते, फडणवीस की चुप्पी से बढ़ा संदेह
महाराष्ट्र में पर्दे के पीछे का क्या गणित है इसका खुलासा नहीं हुआ है। शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे ने मंगलवार शाम तक अपने पत्ते नहीं खोले। वहीं, राजनीतिक हलचल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री व विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस की चुप्पी से संदेह बढ़ गया है। शिवसेना के नाराज नेता एकनाथ शिंदे की शिवसेना में अहमियत रही है। उनके अचानक बागी होने से पूरा राजनीतिक समीकरण ही बदल गया है।
हालांकि शिंदे ने अभी तक यह साफ नहीं किया कि वे भाजपा के साथ जाना चाहते हैं या फिर शिवसेना में अपना एक अलग गुट बनाकर अपना दबदबा कायम रखना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार शिंदे से मिलने गए शिवसेना के मिलिंद नार्वेकर और रवींद्र फाटक ने उनकी सीएम ठाकरे से फोन पर बात कराई जिसमें शिंदे ने एनसीपी का साथ छोड़ने की शर्त रखी है। लेकिन यह खुलासा नहीं किया है कि वे भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन करना चाहते है।