ठाणे जिले की एक अदालत ने लड़की से कथित तौर पर दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि दोनों अब शादीशुदा हैं और अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा है। विशेष (पॉक्सो) न्यायाधीश वीवी वीरकर ने छह मार्च को आदेश पारित किया था। इस आदेश की एक प्रति मंगलवार को उपलब्ध कराई गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में क्या कहा?
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, नांदेड़ का रहने वाला व्यक्ति (27 वर्षीय) अक्सर ठाणे में अपने रिश्तेदार के घर जाता था, जहां लड़की रहती थी और जहां दोनों दोस्त बन गए। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि दिसंबर 2017 में वे वहां से नांदेड़ भाग गए और व्यक्ति ने वहां उसके साथ दो बार दुष्कर्म किया।
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सांकेतिक तस्वीर।
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पॉक्सो और आईपीसी के तहत दर्ज किया गया था मामला
लड़की के लौटने पर उसके माता-पिता ने पुलिस से संपर्क किया। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसके बाद व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई।
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शारीरिक संबंध (सांकेतिक)
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सहमति से संबंध बनाने का था मामला
न्यायाधीश ने कहा कि लड़की ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह अपनी मर्जी से उस व्यक्ति के साथ गई थी क्योंकि उसके पिता उनके रिश्ते के खिलाफ थे। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे मामले में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि व्यक्ति ने उसका अपहरण किया। अदालत ने कहा कि उस समय यह भी साबित नहीं हुआ कि लड़की नाबालिग थी। न्यायाधीश ने यह भी कहा कि दोनों अब शादीशुदा हैं और एक साथ रह रहे हैं। उन्होंने आदेश में कहा, 'इस प्रकार यह स्पष्ट है कि यह सहमति से संबंध बनाने का मामला था।
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(सांकेतिक तस्वीर)
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अदालत ने नाबालिग को लेकर कही ये बात
अदालत ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि लड़की तब 17 साल की थी, तब भी वह इतनी परिपक्व है कि वह अपने साथ हुए कृत्य के परिणामों को समझ सकती है। न्यायाधीश ने व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी का अभियोक्ता के साथ भाग जाना या उसके साथ यौन संबंध बनाना, यदि कोई हो, तो यह आईपीसी और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं के तहत अपराध होगा।