{"_id":"62a82177ee202831d7089c22","slug":"maharashtra-pain-of-husbands-spilled-on-vat-savitri-poonam-anti-clockwise-rounds-of-peepal","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharashtra: वट सावित्री पूनम पर छलकी पतियों की पीड़ा, पीपल की 108 उल्टी परिक्रमा कर की अनूठी कामना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Maharashtra: वट सावित्री पूनम पर छलकी पतियों की पीड़ा, पीपल की 108 उल्टी परिक्रमा कर की अनूठी कामना
Tue, 14 Jun 2022 11:19 AM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 14 Jun 2022 11:19 AM IST
सार
दरअसल औरंगाबाद के कुछ पति अपनी पत्नियों से खुश नहीं हैं। उन्होंने 'पत्नी पीड़ित आश्रम' बनाया है। सोमवार को इन पीड़ित पतियों ने अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश में आज अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर वट सावित्री पूनम का पर्व मनाया जा रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के औरंगाबाद से चौंकाने वाली खबर आई है। पत्नी पीड़ित पुरुषों के एक समूह ने पत्नियों के अत्याचार व अन्याय से मुक्ति दिलाने और अगले जीवन में ऐसी पत्नियां नहीं मिलने की कामना को लेकर पीपल के पेड़ की 108 उल्टी परिक्रमाएं की।
विज्ञापन
दरअसल औरंगाबाद के कुछ पति अपनी पत्नियों से खुश नहीं हैं। उन्होंने 'पत्नी पीड़ित आश्रम' बनाया है। सोमवार को इन पीड़ित पतियों ने अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया।
विज्ञापन
ऐसा जीवन साथी दोबारा न मिले
आश्रम के संस्थापक भरत फुलारे ने बताया कि मंगलवार को मनाई जा रही 'वट सावित्री पूर्णिमा' के अवसर पर महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन और सात जन्मों के लिए एक ही पति पाने की प्रार्थना करती हैं। इसलिए उससे एक दिन पहले हमने यहां एक पीपल के पेड़ की पूजा की और प्रार्थना की कि ऐसा जीवन साथी दोबारा न मिले।
विज्ञापन
पुरुषों के लिए कानून बनाने की मांग
उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कानून बनाए गए हैं, लेकिन उनका दुरुपयोग भी हो रहा है। अब पुरुषों के लिए भी कानून बनाने की जरूरत है ताकि वे अपने साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें। इसलिए हमने यह आंदोलन किया।