आरे मेट्रो कारशेड मामले में उद्धव ठाकरे को झटका, फडणवीस की योजना पर एनजीटी की मुहर
- एनजीटी के फैसले के बाद समिति ने दी रिपोर्ट, कहा- आरे में ही बने मेट्रो कारशेड
- रिपोर्ट में कहा गया कि आरे कालोनी से मेट्रो कारशेड हटाया जाना अव्यवहारिक है
- अन्य जगह कारशेड बनाने से सरकार की तिजोरी पर हजारों करोड़ का पड़ेगा भार
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मुंबई में संजय गांधी नेशनल पार्क से जुड़े आरे कालोनी में मेट्रो कारशेड बनाने की पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की योजना पर एनजीटी ने सहमति की मुहर लगा दी है। वहीं, महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति ने भी कहा है कि मेट्रो कारशेड आरे में ही बनना चाहिए। इससे मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को जोर का झटका लगा है। हालांकि पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने बुधवार को कहा कि इस रिपोर्ट से कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्री के शपथ लेने के बाद उद्धव ठाकरे ने आरे कालोनी में मेट्रो कारशेड बनाने पर रोक लगा दी थी। साथ ही इसको लेकर एक समिति गठित की थी। राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) मनोज सौनिक की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय इस समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंप दी है जिसमें कहा गया है कि आरे कालोनी से मेट्रो कारशेड हटाया जाना अव्यवहारिक है। क्योंकि इसके लिए मुंबई में कोई और विकल्प नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कांजुर मार्ग के अलावा किसी किसी अन्य जगह कारशेड बनाने से सरकार की तिजोरी पर हजारों करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। लिहाजा, खर्च और मेट्रो प्रकल्प में हो रही देरी को टालने के लिए आरे में ही मेट्रो कारशेड बनाया जाना चाहिए।
क्या है मामला
मुंबई में मेट्रो कारशेड 33 हेक्टेयर जमीन पर बनना है। इसके लिए आरे कालोनी में जगह निश्चित कर कारशेड का काम शुरू किया गया है। अक्तूबर 2019 में पर्यावरणवादियों और गैरसरकारी संगठनों ने इसका विरोध किया था। शिवसेना भी इसके खिलाफ थी। लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद चार अक्तूबर को एक ही रात में आरे के 2141 पेड़ काट दिए गए थे। जिसको लेकर भारी विरोध हुआ था। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 11 दिसंबर को समिति गठित की थी।