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Maharashtra: मंत्री उदय सामंत बोले- BMC अस्पतालों पर 'श्वेत पत्र' जारी करेगी सरकार, दवा खरीद की होगी जांच

Fri, 04 Aug 2023 05:26 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 04 Aug 2023 05:26 PM IST
सार

Maharashtra: महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने शुक्रवार को राज्य की विधानसभा में कहा कि बीएमसी संचालित अस्पतालों द्वारा दवाओं की खरीद में हेराफेरी के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी।

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Maharashtra News Update: Govt to issue 'white paper' on BMC hospitals, probe their medicine purchases
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री उदय सामंत। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) संचालित अस्पतालों द्वारा दवाओं की खरीद में हेराफेरी के आरोपों की उच्च स्तरीय जांच की जाएगी। यह बात महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने शुक्रवार को राज्य की विधानसभा में कही। उन्होंने कहा कि मुंबई में सरकारी अस्पतालों द्वारा अपने मरीजों को दी जाने वाली सेवाओं पर एक 'श्वेत पत्र' (एक व्यापक रिपोर्ट) भी प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि उनके द्वारा सेवाएं प्रदान करने में हेराफेरी और कमी के आरोपों की पूरी जांच की जाएगी।

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उद्योग विभाग का प्रभार संभाल रहे सामंत शहरी विकास विभाग के प्रभारी के तौर पर बोल रहे थे, जो उन्हें राज्य विधानमंडल के मौजूदा मानसून सत्र के लिए सौंपा गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास शहरी विकास विभाग है। कांग्रेस के अमीन पटेल ने मुंबई में स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा सदन में उठाया। इस मामले पर बोलते हुए पूर्व मंत्री आशीष शेलार (भाजपा) ने मुंबई में चिकित्सा सुविधाओं पर एक अवलोकन (ओवरव्यू) प्रस्तुत किया।

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उन्होंने कहा कि चूंकि मुंबई एक राजधानी शहर है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज बड़ी संख्या में इलाज के लिए यहां आते हैं। मुंबई में नगर निकाय, राज्य सरकार, निजी और धर्मार्थ संगठनों द्वारा संचालित कई अस्पताल हैं और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए विभिन्न अस्पताल हैं, लेकिन इन सभी चिकित्सा प्रतिष्ठानों के बीच कोई समन्वय नहीं है। इसलिए, राज्य सरकार को मुंबई आने वाले रोगियों की संख्या पर एक श्वेत पत्र के साथ आना चाहिए कि क्या उनकी देखभाल के लिए पर्याप्त सुविधाएं मौजूद हैं। महानगर में बांद्रा (पश्चिम) से भाजपा विधायक ने मांग की कि श्वेत पत्र प्रकाशित करते समय इन सभी स्वास्थ्य सुविधाओं पर किए गए खर्च का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।


 

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शेलार ने कहा कि चैरिटी आयुक्त के अधिकार क्षेत्र में आने वाले अस्पतालों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि वे राज्य सरकार द्वारा निर्धारित निर्देशों का पालन कर रहे हैं या नहीं। मुंबई नगर निकाय हर साल स्वास्थ्य सुविधाओं पर औसतन लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च करता है, जिसका मतलब है कि पिछले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। यह राशि लगभग 45,000 रोगियों पर खर्च की गई होगी। लेकिन दुर्भाग्य से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में हेराफेरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई के लोगों को हर साल दिए जाने वाले करों के बराबर सुविधाएं नहीं मिलती हैं। सभी स्तरों पर असमानता है। भाजपा विधायक ने कहा कि हालांकि बीएमसी ने स्वास्थ्य सेवाओं पर पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, लेकिन लोगों को इस राशि के बराबर सुविधाएं नहीं मिली हैं।

 

उन्होंने कहा, नागरिक अस्पतालों में आने वाले मरीजों को आवश्यक दवाएं खरीदने के लिए कहा जाता है और एक्स-रे और सोनोग्राफी जैसे विभिन्न नैदानिक परीक्षण भी बाहर से किए जाते हैं। इससे साबित होता है कि उनके प्रबंधन में भ्रष्टाचार है जिसकी पूरी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में दी जाने वाली दवाओं और इंजेक्शन की अत्यधिक कीमत है और मरीजों को परेशान किया जा रहा है। इसलिए, सरकार को इन सेवाओं के लिए एक रेट कार्ड के साथ आना चाहिए।

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