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महाराष्ट्र: दक्षिणपंथी नफरत फैलाते हैं, धर्म, जाति का फायदा उठाते हैं, भीमा कोरेगांव जांच आयोग से बोले शरद पवार

Thu, 05 May 2022 11:05 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 05 May 2022 11:05 PM IST
सार

जब आयोग के वकील आशीष सतपुते ने पवार से दक्षिणपंथी और वामपंथी विचारधाराओं की उनकी अवधारणा के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, 'दक्षिणपंथ से मेरा मतलब उन लोगों से है जो समाज में धर्म और जाति व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाते हैं और विभिन्न वर्गों में नफरत फैलाते हैं। जबकि वामपंथी एक विचारधारा है।'

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Maharashtra NCP Leader Sharad Pawar targets Right wing allegation on Religion and Caste at Bhima Koregaon committee news in hindi
एनसीपी प्रमुख शरद पवार - फोटो : PTI

विस्तार

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने गुरुवार को भीमा कोरेगांव जांच आयोग के समक्ष कहा कि वामपंथ एक विचारधारा है, जबकि दक्षिणपंथ के लोग धर्म और जाति की खामियों का लाभ उठाते हैं और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच नफरत फैलाते हैं।
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पवार ने महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक पर जनवरी 2018 में हुई हिंसा के सिलसिले में यहां आयोग के समक्ष अपनी गवाही दर्ज करवाई। आयोग ने उन्हें अपना बयान दर्ज करने के लिए पांच और छह मई को उसके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। गुरुवार को उनका बयान दर्ज हुआ।
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जब आयोग के वकील आशीष सतपुते ने पवार से दक्षिणपंथी और वामपंथी विचारधाराओं की उनकी अवधारणा के बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, 'दक्षिणपंथ से मेरा मतलब उन लोगों से है जो समाज में धर्म और जाति व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाते हैं और विभिन्न वर्गों में नफरत फैलाते हैं। जबकि वामपंथी एक विचारधारा है।'
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राजद्रोह के आरोपों के बारे में उन्होंने कहा, 'हाल के दिनों में, यह देखा गया है कि आईपीसी की धारा 124 ए (देशद्रोह) का अक्सर लोगों के खिलाफ दुरुपयोग किया जाता है। मैंने अपने हलफनामे में समझाया है। इसका आह्वान उनकी स्वतंत्रता को दबाने और शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई किसी भी असहमति की आवाज को दबाने के लिए किया जाता है।' पवार ने कहा कि राजनीतिक नेताओं के भाषणों में कोई 'भड़काऊ तत्व' नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा, 'जब कोई राजनीतिक नेता लोगों को संबोधित करना चुनता है, तो उसे आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए कि उसके भाषण में ऐसे भड़काऊ तत्व न हों , जो शांति और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ें और विभिन्न वर्गों, धार्मिक समूहों और समाज के सदस्यों के बीच दुश्मनी पैदा करें।'

एक सवाल के जवाब में शरद ने कहा कि पुलिस को महाराष्ट्र पुलिस नियमावली के अनुसार काम करना चाहिए ताकि वे सबूत इकट्ठा कर सकें जिनका इस्तेमाल अदालत में किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे और असामाजिक तत्वों को घुसपैठ करने और ऐसे किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने से रोकने के लिए उचित कदम उठाए।

भीमा कोरेगांव घटना के बारे में पूछे जाने पर पवार ने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से इसके बारे में पता चला। उन्होंने कहा, 'जांच आयोग के गठन के बाद, मुझे आयोग से एक नोटिस प्राप्त हुआ जिसमें मुझसे संदर्भ की शर्तों के अनुसार इस मामले में अपने सुझाव देने का अनुरोध किया गया था, और तदनुसार मैंने अपना हलफनामा दायर किया है, जिसमें सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध है।'

पवार ने आयोग को बताया कि वह दक्षिणपंथी नेताओं संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते और उनके बारे में केवल मीडिया में पढ़ा था। यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने मीडिया में कोई बयान दिया कि एल्गार परिषद मामले में पुलिस की जांच विभाग पर कलंक है, पवार ने कहा, 'यह ठीक नहीं है।'


'भीमा कोरेगांव और एल्गार परिषद दो अलग-अलग प्रकरण हैं। एल्गार परिषद से संबंधित पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामलों के संबंध में, मैंने कहा है कि पुलिस की ओर से कुछ व्यक्तियों के खिलाफ मामले दर्ज करना सही/उचित नहीं था, जो 31 दिसंबर, 2017 को शनिवारवाड़ा, पुणे में आयोजित एल्गार परिषद में उपस्थित नहीं थे।' कलकत्ता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश जे एन पटेल और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव सुमित मलिक का दो सदस्यीय जांच आयोग भीमा कोरेगांव मामले की जांच कर रहा है।
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