कोरोना से जंग: महाराष्ट्र की मंत्री यशोमति ने अमरावती में अपनाए गए तरीके को बताया प्रभावी
महाराष्ट्र सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री यशोमति ठाकुर ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में अमरावती में जिस तरह ते कदम उठाए गए, उनके चलते 13 दिनों में नए मामलों की संख्या को करीब 1000 के मुकाबले 300 तक लाने में सफलता मिली।
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महाराष्ट्र में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ने के बीच फरवरी के अंतिम सप्ताह के दौरान अमरावती में जनता कर्फ्यू की तर्ज पर लॉकडाउन लागू करने के निर्णय से इस जिले में अन्य जिलों के मुकाबले हालात काबू करना ज्यादा आसान साबित हुआ। जिले की प्रभारी मंत्री यशोमति ठाकुर ने सोमवार को यह बात कही।
राज्य सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री ठाकुर ने कहा कि शुरुआत में ही 'अमरावती पैटर्न' को राज्यभर में लागू किया जाता तो महाराष्ट्र में परिस्थितियां वर्तमान से काफी अलग होतीं। उन्होंने कहा कि जब फरवरी में 1000-1200 मामले तेजी से सामने आने लगे, तब व्यापक प्रतिबंध लागू करने का ठोस निर्णय लिया गया।
यशोमति ठाकुर ने दावा किया, 'विपक्ष की आलोचना के बावजूद हमने 26 फरवरी को लॉकडाउन लागू करने का ठोस निर्णय लिया। हमने जनता कर्फ्यू की तर्ज पर सप्ताहांत लॉकडाउन से शुरुआत की। इसके बाद 10-12 दिन हमने संपूर्ण लॉकडाउन लगाया, जिसमें आवश्यक सेवाओं और गतिविधियों को राहत दी गई। '
मंत्री ने कहा कि संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका के बीच अमरावती ऐसा पहला जिला था, जहां ऐसा कदम उठाया गया। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे हालात सामान्य होने के बाद दुकानों को शाम पांच बजे तक खोलने की अनुमति दी गई और जिले में प्रतिदिन पांच हजार लोगों का टीकाकरण करने जैसे कदम उठाए गए।
'महाराष्ट्र के जिलों में कोविड-19 की रोकथाम के उपाय मानक से कम'
कोरोना वायरस संक्रमण से निपटने में समन्वय के लिए महाराष्ट्र भेजे गए केंद्रीय दल ने पाया है कि सतारा, सांगली और औरंगाबाद जिले में रोकथाम उपाय मानक से कम हैं। केंद्र की ओक से राज्य सरकार को भेजी गई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भेजी गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दल ने पाया है कि नियंत्रण के लिए संतोषजनक कदम नहीं उठाए जा रहे और निगरानी उपायों में कमी भी देखने को मिली।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘कम कार्यबल के कारण बुलढाना, सतारा, औरंगाबाद और नांदेड़ में निगरानी और संपर्क में आए लोगों का पता लगाने का काम भी मानक से कम है। भंडारा गए दल ने कहा है कि ज्यादातर मामले निषिद्ध क्षेत्रों से बाहर से आ रहे हैं।’ महाराष्ट्र के प्रधान सचिव (स्वास्थ्य) प्रदीप व्यास को संबोधित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रालय महामारी से निपटने की तैयारी और कदमों को लेकर समन्वय कर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र ने महाराष्ट्र के 30 सबसे प्रभावित जिलों के लिए केंद्रीय दल भेजे हैं और ये दल कोविड-19 के प्रसार के कारणों को समझने के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
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