{"_id":"66d83c230eee4bf4560e2983","slug":"maharashtra-marathwada-region-heavy-rains-crops-destroyed-news-in-hindi-2024-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharashtra: भारी बारिश के कारण मराठवाड़ा क्षेत्र में 10 की मौत, 11.67 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Maharashtra: भारी बारिश के कारण मराठवाड़ा क्षेत्र में 10 की मौत, 11.67 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद
Wed, 04 Sep 2024 04:23 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्वेता महतो
Updated Wed, 04 Sep 2024 04:23 PM IST
सार
भारी बारिश के कारण एक सितंबर से छत्रपति संभाजीनगर से पांच, हिंगोली से दो, लातूर, बीड और जालना से एक लोगों ने जान गंवा दी। नांदेड़ में 3.34 लाख फसल हेक्टेयर फसल नष्ट हुई है। बारिश के कारण 523 पशुओं की भी मौत हो गई।
विज्ञापन
मराठवाड़ा क्षेत्र
- फोटो : PTI
विस्तार
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में भारी बारिश के कारण 10 लोगों की मौत हो गई। पिछले तीन दिनों से इस क्षेत्र में भारी बारिश हो रही है। एक सितंबर से जारी भारी बारिश के बाद मंगलवार की शाम के बाद बारिश पर ब्रेक लग गया। इस भारी बारिश के कारण 11.67 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई। नांदेड़ में इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिला।
भारी बारिश के कारण एक सितंबर से छत्रपति संभाजीनगर से पांच, हिंगोली से दो, लातूर, बीड और जालना से एक लोगों ने जान गंवा दी। नांदेड़ में 3.34 लाख फसल हेक्टेयर फसल नष्ट हुई है। बारिश के कारण 523 पशुओं की भी मौत हो गई। इसके अलावा 1,126 घर क्षतिग्रस्त हो गए। बारिश ने मराठवाड़ा क्षेत्र में जल भंडारण स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। सिंचाई विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि क्षेत्र की कोई भी परियोजना अब डेड स्टोरेज में नहीं है। यह पानी की उपलब्धता में सुधार का संकेत देती है।
विज्ञापन
भारी बारिश के कारण एक सितंबर से छत्रपति संभाजीनगर से पांच, हिंगोली से दो, लातूर, बीड और जालना से एक लोगों ने जान गंवा दी। नांदेड़ में 3.34 लाख फसल हेक्टेयर फसल नष्ट हुई है। बारिश के कारण 523 पशुओं की भी मौत हो गई। इसके अलावा 1,126 घर क्षतिग्रस्त हो गए। बारिश ने मराठवाड़ा क्षेत्र में जल भंडारण स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। सिंचाई विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि क्षेत्र की कोई भी परियोजना अब डेड स्टोरेज में नहीं है। यह पानी की उपलब्धता में सुधार का संकेत देती है।
विज्ञापन