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Maharashtra: भारत भूमि से कैलाश पर्वत दर्शन की थी प्रतिज्ञा, अब पूरी होगी गौरीश महाराज की मनोकामना
Sun, 15 Sep 2024 02:41 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 15 Sep 2024 02:41 PM IST
सार
मान्यता है कि कैलाश पर्वत के दर्शन से मोक्ष मिलता है। गौरीश महाराज ने कहा कि जिस दिन भारत भूमि से कैलाश पर्वत के दर्शन होंगे हम भगवान शिव का आभार मानेंगे।
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गौरीश गुरुजी महाराज
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
भगवान शिव का घर माने जाने वाले कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए शिव भक्तों की अभिलाषा होती है। मुंबई से सटे ठाणे के संत गौरीश गुरुजी महाराज ने 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के बाद प्रण लिया था कि वे भारत भूमि से ही कैलाश पर्वत के दर्शन करेंगे। लिपुलेख को दर्शन के लिए खोलने के केंद्र सरकार के फैसले से अब गौरीश गुरुजी महाराज की प्रतिज्ञा पूरी हो सकेगी।
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गौरीश गुरुजी महाराज ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्होंने सबसे अंत में 12 ज्योतिर्लिंग में से एक महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित घृष्णेश्वर महादेव का दर्शन करने के बाद यह प्रतिज्ञा की थी कि वे भारतभूमि से कैलाश पर्वत का दर्शन करेंगे। अब उनकी मनोकामना पूरी होने वाली है। पहले शिव भक्तों को कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए चीन के कब्जे वाले तिब्बत से होकर जाना पड़ता था। गौरीश महाराज ने कहा कि दुरूह रास्ता होने के कारण चंद श्रद्धालु ही अपने आराध्य देव के घर का दर्शन कर पा रहे थे। लेकिन अब अब यह मार्ग पूरे देश के शिव भक्तों के लिए खोले जाने से बड़ी खुशी हुई है। हमारे कदम भारत भूमि पर होंगे और नजर कैलाश पर्वत पर। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। गौरीश गुरुजी महाराज का ठाणे जिले के शाहपुर तालुका स्थित रनविहार गांव में आश्रम है। वे श्रीदंबा काली के उपासक होने के साथ ही भगवान शिव के परम भक्त हैं।
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मान्यता है कि कैलाश पर्वत के दर्शन से मोक्ष मिलता है। गौरीश महाराज ने कहा कि जिस दिन भारत भूमि से कैलाश पर्वत के दर्शन होंगे हम भगवान शिव का आभार मानेंगे। उन्होंने कहा कि कैलाश पर्वत पहले से ही लिपुलेख पहाड़ियों से दिखता था। इस नए दर्शन मार्ग को स्थानीय लोगों ने तलाशा तो सरकार ने वहां जाने के लिए पक्की सड़क बनवाई। कैलाश पर्वत के भारत में शामिल करने के सवाल पर गौरीश महाराज ने कहा कि रावण भी कैलाश पर्वत को लंका ले जाना चाहता था लेकिन सफल नहीं हुआ। भगवान शिव की जहां रहने की इच्छा है वहीं रहेंगे। लेकिन भारत का विशाल भूभाग हो सकता है।
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