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Maharashtra: महाराष्ट्र में आपसी तालमेल की कमी से जूझ रही महायुति, केंद्रीय नेता सक्रिय

Wed, 06 Nov 2024 05:01 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 06 Nov 2024 05:01 PM IST
सार

Maharashtra election 2024: सूत्रों के अनुसार, महायुति गठबंधन में दरार उसी समय से आनी शुरू हो गई थी जब से भाजपा की ओर से यह संकेत दे दिए गए थे कि चुनाव बाद मुख्यमंत्री उसके दल से हो सकता है। इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से एकनाथ शिंदे और अजित पवार को भी संकेत दे दिया गया है।

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Maharashtra election 2024 Mahayuti is facing lack of coordination in Maharashtra, central leaders are active
महायुति गठबंधन - फोटो : एएनआई

विस्तार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदान में केवल 15 दिन का समय ही शेष बचा है, लेकिन इस अंतिम समय में महायुति गठबंधन में आपसी तालमेल की कमी से गठबंधन के नेता परेशान हैं। अजित पवार कैंप से इस तरह की खबरें सामने आ रही हैं कि चुनाव बाद चाचा-भतीजे के बीच की दूरी कम हो सकती है, वहीं, एकनाथ शिंदे ने भी भाजपा टीम से पूरा सहयोग न मिलने की बात कही है। महाराष्ट्र में किसी भी कीमत पर सरकार में वापसी का लक्ष्य लेकर उतरी भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस मामले में दखल देकर मामला सुलटाने का प्रयास कर रहा है। 
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सूत्रों के अनुसार, महायुति गठबंधन में दरार उसी समय से आनी शुरू हो गई थी जब से भाजपा की ओर से यह संकेत दे दिए गए थे कि चुनाव बाद मुख्यमंत्री उसके दल से हो सकता है। इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से एकनाथ शिंदे और अजित पवार को भी संकेत दे दिया गया है। इसके बाद से ही सहयोगी दलों के बीच खींचतान शुरू हो गई थी। 
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भाजपा के विरोध के बाद भी नवाब मलिक को चुनाव मैदान में उतारना भी भाजपाई खेमे में चिंता का विषय बना हुआ है। इसे अजित पवार की ओर से भाजपा को दिए गए एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यानी यदि चुनाव के बाद समीकरण अजित पवार के अनुसार नहीं हुए तो उनके दरवाजे सभी विकल्पों के लिए खुले रह सकते हैं। स्वयं नवाब मलिक ने इसी तरह की बात कहकर इस पर मुहर लगा दी है। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि चुनाव के बाद चाचा-भतीजे के बीच दूरी कम हो सकती है। 
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चर्चा है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भाजपा शीर्ष नेतृत्व से इस बात की शिकायत की है कि चुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को प्रचार में भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। इससे चुनाव के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। यदि इसके कारण आपसी तालमेल गड़बड़ाई तो शिवसेना के कार्यकर्ता भी भाजपा उम्मीदवारों के प्रचार के दौरान सहयोग देने में कमी कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो महायुति का समीकरण गड़बड़ हो सकता है। 

यही कारण है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस खाई को पाटने में जुट गया है। कथित तौर पर पार्टी के एक केंद्रीय नेता और महाराष्ट्र के एक शीर्ष भाजपा नेता को इस आपसी तालमेल को ठीक करने के लिए कहा गया है। वे सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं से मिलकर बातचीत कर सकते हैं। पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को भी संदेश देकर सभी सहयोगी दलों के नेताओं-प्रत्याशियों को बेहतर सहयोग करने के लिए कह सकती है।    

'आपसी तालमेल से ही हासिल होगी जीत'
महाराष्ट्र भाजपा के एक नेता ने अमर उजाला को बताया कि 2019 के विधानसभा चुनाव का अनुभव यही बताता है कि यदि महाराष्ट्र में महायुति की सरकार बनानी है तो इसके लिए आवश्यक था कि भाजपा अधिक से अधिक सीटों पर लड़े और जीत हासिल करे। पिछले चुनाव में जब उद्धव ठाकरे के साथ पार्टी ने चुनाव लड़ा था, तब भी भाजपा की जीत का स्ट्राइक रेट बेहतर था। सहयोगी दलों को भी इस समीकरण से अवगत कराया गया और यही कारण है कि काफी खींचतान के बाद भी भाजपा को 148 सीटों पर चुनाव लड़ने की सहमति मिल गई। 

नेता के अनुसार, सभी दल यह समझते हैं कि सरकार बनाने के लिए आपसी तालमेल आवश्यक है, लेकिन कई बार बड़ा परिवार होने पर थोड़ी बहुत खींचतान आपस में देखने को मिल जाती है, लेकिन इसे मनभेद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नेता के अनुसार, पार्टी अभी भी महाराष्ट्र सरकार की योजनाओं और केंद्र सरकार की लाभार्थी योजना के दम पर जीत हासिल करने में सफल रहेगी।    


स्टार प्रचारकों के बाद बदलेगी स्थिति
भाजपा के शीर्ष नेताओं ने चुनाव में प्रचार करना शुरू कर दिया है। भाजपा नेताओं के साथ-साथ महायुति के नेताओं को भी उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ जैसे स्टार प्रचारकों के प्रचार के बाद महाराष्ट्र की चुनावी स्थिति बदलेगी और पार्टी एक बार फिर जीत हासिल करने में कामयाब रहेगी।
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