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दुष्कर्म पीड़िता की सहमति के बावजूद हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से किया इनकार

Tue, 08 Jan 2019 02:47 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: संदीप भट्ट Updated Tue, 08 Jan 2019 02:47 AM IST
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Maharashtra: Despite the consent of the victim, the High Court refused to cancel the FIR
bombay high court

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म की शिकार नाबालिग की सहमति के बावजूद आरोपी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया। अदालत ने सोमवार को कहा कि मामले में पॉक्सो कानून के तहत कड़े प्रावधान हैं। इसलिए पीड़िता के सहमत होने के बावजूद अभियोजन पक्ष की कार्यवाही को रद्द नहीं किया जा सकता। 

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पिछले साल जून में दुष्कर्म की कथित घटना के बाद पीड़िता की ओर से याचिका दायर की गई थी। सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति बीपी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते ने मामले की सुनवाई की। 
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पीड़िता मुंबई की रहने वाली है और घटना के बाद वह गर्भवती हो गई थी। पिछले महीने ही उसने एक बेटे को जन्म दिया है। पीड़िता ने बेटे के प्रति अपने अधिकार का त्याग करते हुए उसे अनाथालय को दे दिया। उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि पुलिस के अनुसार आरोपी को पकड़े जाने की संभावना कम है। इसलिए निश्चित रूप से प्राथमिकी रद्द कर देनी चाहिए। पीड़िता ने पीठ को बताया कि वह स्नातक प्रथम वर्ष में पढ़ती है और खुद को या अपने बेटे की परवरिश के लिए उसके पास आय का कोई जरिया नहीं है।
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इसलिए इस मामले में सभी कार्यवाहियों को खत्म करने का अनुरोध किया था। पीड़िता ने अपने वकील के जरिए यह भी दलील दी कि प्राथमिकी रद्द करना उसके नवजात शिशु के हित में होगा, जिसके बाद उसे अनाथालय को दिया जा सकेगा। सरकारी वकील अरुणा पई ने पीठ को बताया कि पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता ने जो बयान रिकॉर्ड कराया था उसमें उसने ऐसी कोई भी सूचना नहीं दी जिससे कि आरोपी की पहचान में मदद मिल सके। इसलिए आरोपी की पहचान करना और उसे गिरफ्तार करना बेहद मुश्किल हो गया है। पीठ ने पई की दलील को यह कहकर खारिज कर दिया कि यह ‘पूरी तरह असंतोषजनक’ है। गोवंडी पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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