Ground Report: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में बुलेट-बैलेट की जंग, BJP नेता अशोक को कांग्रेस के किरसान की चुनौती
Maharashtra: आदिवासी कार्यकर्ता लालसू सोमा नागोटी कहते हैं कि हर चुनाव में यहां बुलेट बनाम बैलेट की लड़ाई होती रही है। इस बार भी स्थिति कमोवेश वैसी ही है। हालांकि बीते पांच साल में 100 से अधिक नक्सली मुठभेड़ में ढेर हुए हैं, जिससे इलाके में उनकी कमर टूट गई है। चुनाव नजदीक हैं पर उत्तर और दक्षिण गढ़चिरोली में भयावह सन्नाटा है।
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क्षेत्रफल की दृष्टि से महाराष्ट्र का सबसे बड़ा गढ़चिरोली-चिमूर लोकसभा क्षेत्र तेलंगाना और छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा से सटा है। नक्सल गतिविधियों के लिए चर्चित गढ़चिरोली में लाल सलाम का बोलबाला रहा है। यहां कांग्रेस-भाजपा के बीच सीधी टक्कर है। कांग्रेस खोई हुई जमीन वापस पाने की लड़ाई लड़ रही है, तो भाजपा लगातार तीसरी बार भगवा सलामी देना चाहती है। 70 फीसदी वन क्षेत्र से घिरे इस सीट पर 10 प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं।
आदिवासी कार्यकर्ता लालसू सोमा नागोटी कहते हैं कि हर चुनाव में यहां बुलेट बनाम बैलेट की लड़ाई होती रही है। इस बार भी स्थिति कमोवेश वैसी ही है। हालांकि बीते पांच साल में 100 से अधिक नक्सली मुठभेड़ में ढेर हुए हैं, जिससे इलाके में उनकी कमर टूट गई है। चुनाव नजदीक हैं पर उत्तर और दक्षिण गढ़चिरोली में भयावह सन्नाटा है। जंगल के बीच से गुजरने वालीं सड़कों के किनारे दीवारों पर आदिवासियों से चुनाव के बहिष्कार की अपील करते चित्र दिखाई देते हैं। नागोटी कहते हैं कि भले ही नक्सली बैकफुट पर हैं फिर भी छिटपुट घटनाओं को अंजाम देकर वे मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं। इसलिए ग्रामीणों में खौफ बरकरार है। ऐसा पहली बार है जब गढ़चिरोली-चिमूर में वामपंथी दलों का कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं है। उम्मीदवारों के लिए इस दुर्गम इलाके में जनसंपर्क करना आसान नहीं है। उत्तर व दक्षिण गढ़चिरोली और छत्तीसगढ़ व तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों में प्रत्याशियों के बैनर पोस्टर नदारद हैं। कहीं-कहीं तो लोगों को यह भी नहीं पता कि उनका उम्मीदवार कौन है। इन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क सेवाएं सुचारु नहीं हैं, जिससे सोशल मीडिया से भी चुनाव प्रचार नहीं हो पा रहा है।
आदिवासी समुदाय में भी जातीय समीकरण हावी
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस नक्सल प्रभावित सीट पर भाजपा ने सांसद अशोक नेते को तीसरी बार उतारा है। वहीं, विपक्षी दलों के गठबंधन महा विकास आघाड़ी (एमवीए) की ओर से कांग्रेस के डॉ. नामदेव किरसान मैदान में हैं। पड़ोस के गोदिया जिले के पूर्व आबकारी अधिकारी किरसान कुछ वर्षों से गढ़चिरोली में सक्रिय हैं। इसके बावजूद यहां स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा बना हुआ है। डॉ. किरसान हल्बा जनजाति से हैं, जबकि गढ़चिरोली में यह समुदाय नगण्य है। यहां गोंड और मांडिया समुदाय का वर्चस्व है। वहीं, भाजपा के अशोक नेते औद्योगिक, रेल, राजमार्ग और अन्य क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों और स्थानीय समीकरणों के सहारे तीसरी बार बाजी मारने का दावा करते हैं। नेते कहते हैं कि नक्सलियों का गढ़ कहा जाने वाला गढ़चिरोली अब स्टील हब बन रहा है। सूरजागढ़ के स्टील प्लांट से लोगों को रोजगार मिला है।
गढ़चिरोली : पिछले दो चुनावों के हाल
2019
उम्मीदवार दल मत मत%
अशोक नेते भाजपा 5.20 लाख 45.50
नामदेव उसेंडी कांग्रेस 4.42 लाख 38.72
2014
उम्मीदवार दल मत मत%
अशोक नेते भाजपा 5.36 लाख 52.11
नामदेव उसेंडी कांग्रेस 2.99 लाख 29.80
गढ़चिरोली का राजनीतिक इतिहास
वर्ष 2009 में अस्तित्व में आई संसदीय सीट पर तब कांग्रेस के मारोतराव कोवासे ने भाजपा के अशोक नेते को 28 हजार से अधिक मतों से हराया था। नेते ने अगले दोनों चुनावों में कांग्रेस को पटखनी दी। पिछले पांच सालों में सियासी उथल-पुथल से गढ़चिरोली भी अछूता नहीं रहा। 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी रहे नामदेव उसेंडी अब भाजपा के साथ हैं। एनसीपी के धर्मराव बाबा अत्राम के महायुति में आने से गढ़चिरोली में भाजपा की स्थिति पिछली बार की तुलना में बेहतर हुई है। हालांकि, कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. नामदेव किरसान क्षेत्र में सत्ता विरोधी लहर होने का दावा करते हैं।
ड्रोन और हेलिकॉप्टरों की निगहबानी में होगा मतदान
गढ़चिरोली-चिमूर लोकसभा क्षेत्र में बुलेट और बैलेट के संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। इसलिए चुनावी मौसम में गढ़चिरोली छावनी में तब्दील हो गई है। संवेदनशील इलाकों में अपराह्न 3 बजे तक मतदान संपन्न कराने की योजना है। इलाके में हेलिकॉप्टर से नियमित हवाई निगरानी की जा रही है। गढ़चिरोली के पुलिस अधीक्षक नीलोत्पल ने बताया कि 19 अप्रैल को 130 ड्रोन और 6 एमआई 17 हेलिकॉप्टरों की निगहबानी में मतदान कराया जाएगा। सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के 15 हजार जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेंगे। अभी सीएपीएफ की 47 कंपनियां हैं। मतदान के दिन 40 कंपनियां तैनात की जाएंगी।