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भिवंडी में मेयर-डिप्टी मेयर को लेकर सियासत: एक साथ आए कांग्रेस-NCP और बागी भाजपा पार्षद; बने नए समीकरण
Thu, 19 Feb 2026 05:03 PM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 19 Feb 2026 05:03 PM IST
सार
भिवंडी-निजामपुर नगर निगम में मेयर पद के लिए कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और बागी भाजपा पार्षदों ने सेक्युलर फ्रंट बनाया है। 30 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने का रणनीति बना रही है। वह बागी पार्षदों के समर्थन से अपना मेयर और डिप्टी मेयर बनने की कोशश में है।
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हर्षवर्धन सपकाल, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष
- फोटो : ANI
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विस्तार
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार को कहा कि उनकी पार्टी, एनसीपी (एसपी) के पार्षदों और भाजपा के बागी पार्षदों के एक समूह ने मिलकर एक 'सेक्युलर फ्रंट' बनाया है। यह फ्रंट ठाणे जिले के भिवंडी-निजामपुर नगर निगम (बीएनएमसी) में मेयर और डिप्टी मेयर के पद हासिल करने की कोशिश करेगा।
क्या बोले कांग्रेस नेता?
पत्रकारों से बातचीत में सपकाल ने बताया कि 15 जनवरी को हुए चुनाव में कांग्रेस 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। उसे एनसीपी (एसपी) के 12 पार्षदों का समर्थन मिला है। 90 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए उसे सिर्फ चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भाजपा या एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया है और अपने वैचारिक रुख से समझौता नहीं किया है। उनके मुताबिक कुछ भाजपा पार्षद पार्टी छोड़कर इस सेक्युलर फ्रंट में शामिल हो गए हैं, जिससे मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव जीतने का रास्ता आसान होगा।
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भाजपा को सत्ता से बाहर रखने की है रणनीति
सपकाल ने बताया कि नारायण चौधरी और उनके साथियों ने भाजपा छोड़कर एक स्वतंत्र समूह बनाया और कांग्रेस-नेतृत्व वाले फ्रंट को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ पिछले 24 दिनों से बातचीत चल रही थी, जो अब सफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के पदों पर अंतिम फैसला लेने के लिए जल्द ही पार्टी पर्यवेक्षक भेजे जाएंगे। भाजपा को सत्ता से बाहर रखना कांग्रेस की स्पष्ट रणनीति है।
वहीं, भिवंडी से एनसीपी (एसपी) के लोकसभा सांसद सुरेश म्हात्रे (बाल्या मामा) ने कहा कि कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) सेक्युलर फ्रंट बनाने की कोशिश करीब 24 दिनों से चल रही थी। समाजवादी पार्टी से भी बात हुई थी, लेकिन उसने शिंदे गुट का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के बागी पार्षदों के समर्थन से अब नगर निगम में सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या रहा चुनाव का समीकरण?
हालिया चुनाव में 90 सदस्यीय भिवंडी-निजामपुर नगर निगम में कांग्रेस को 30 सीटें मिलीं। इसके बाद भाजपा (22), शिवसेना (12), एनसीपी (एसपी), समाजवादी पार्टी (छह), पाटिल की केवीए (चार) और भिवंडी विकास अघाड़ी (तीन) रहीं। एक निर्दलीय उम्मीदवार भी जीता।
अन्य वीडियो-
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क्या बोले कांग्रेस नेता?
पत्रकारों से बातचीत में सपकाल ने बताया कि 15 जनवरी को हुए चुनाव में कांग्रेस 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। उसे एनसीपी (एसपी) के 12 पार्षदों का समर्थन मिला है। 90 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए उसे सिर्फ चार और पार्षदों के समर्थन की जरूरत है।
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उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भाजपा या एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ गठबंधन न करने का फैसला किया है और अपने वैचारिक रुख से समझौता नहीं किया है। उनके मुताबिक कुछ भाजपा पार्षद पार्टी छोड़कर इस सेक्युलर फ्रंट में शामिल हो गए हैं, जिससे मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव जीतने का रास्ता आसान होगा।
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भाजपा को सत्ता से बाहर रखने की है रणनीति
सपकाल ने बताया कि नारायण चौधरी और उनके साथियों ने भाजपा छोड़कर एक स्वतंत्र समूह बनाया और कांग्रेस-नेतृत्व वाले फ्रंट को समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ पिछले 24 दिनों से बातचीत चल रही थी, जो अब सफल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मेयर, डिप्टी मेयर और स्थायी समिति के पदों पर अंतिम फैसला लेने के लिए जल्द ही पार्टी पर्यवेक्षक भेजे जाएंगे। भाजपा को सत्ता से बाहर रखना कांग्रेस की स्पष्ट रणनीति है।
वहीं, भिवंडी से एनसीपी (एसपी) के लोकसभा सांसद सुरेश म्हात्रे (बाल्या मामा) ने कहा कि कांग्रेस-एनसीपी (एसपी) सेक्युलर फ्रंट बनाने की कोशिश करीब 24 दिनों से चल रही थी। समाजवादी पार्टी से भी बात हुई थी, लेकिन उसने शिंदे गुट का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के बागी पार्षदों के समर्थन से अब नगर निगम में सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है।
क्या रहा चुनाव का समीकरण?
हालिया चुनाव में 90 सदस्यीय भिवंडी-निजामपुर नगर निगम में कांग्रेस को 30 सीटें मिलीं। इसके बाद भाजपा (22), शिवसेना (12), एनसीपी (एसपी), समाजवादी पार्टी (छह), पाटिल की केवीए (चार) और भिवंडी विकास अघाड़ी (तीन) रहीं। एक निर्दलीय उम्मीदवार भी जीता।
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