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Badlapur: पुलिस हिरासत में मौत का मामला, हाईकोर्ट का न्यायिक जांच रिपोर्ट 18 नवंबर तक पेश करने का निर्देश

Thu, 03 Oct 2024 03:37 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 03 Oct 2024 03:37 PM IST
सार

जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने मामले से जुड़े सारे सबूत इकट्ठा करने और उनकी फोरेंसिक विशेषज्ञों से जांच कराने का भी निर्देश दिया। 

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Maharashtra Badlapur case High court asks magistrate to submit by Nov 18 inquiry report in custodial death
बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने बदलापुर में अक्षय शिंदे की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में न्यायिक जांच की रिपोर्ट 18 नवंबर तक पेश करने का निर्देश दिया है। अक्षय शिंदे बदलापुर के स्कूल में बच्चियों के यौन शोषण का आरोपी था। जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने मामले से जुड़े सारे सबूत इकट्ठा करने और उनकी फोरेंसिक विशेषज्ञों से जांच कराने का भी निर्देश दिया। 
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अक्षय शिंदे के पिता की याचिका पर सुनवाई कर रहा है हाईकोर्ट
कानून के अनुसार, पुलिस हिरासत में होने वाली हर मौत की जांच मजिस्ट्रेट द्वारा की जानी चाहिए। मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल बीरेंद्र सराफ ने कहा कि सभी दस्तावेज जांच के लिए भेज दिए गए हैं। कोर्ट ने अक्षय शिंदे के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। अक्षय शिंदे के पिता ने पुलिस पर उनके बेटे का फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप लगाया है और इसकी कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। अभी सीआईडी मामले की जांच कर रही है। 
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एनकाउंटर में ढेर हुआ था अक्षय शिंदे
24 वर्षीय अक्षय शिंदे पर ठाणे जिले के बदलापुर के एक स्कूल में दो नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। 23 सितंबर को जब उसे एक मामले की जांच के सिलसिले में नवी मुंबई की तलोजा जेल से बदलापुर वापस लाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, तभी अक्षय ने एक पुलिस अधिकारी की पिस्टल छीनकर गोलीबारी की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अक्षय की मौत हो गई थी। यह घटना ठाणे में मुंब्रा बाईपास के पास हुई।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने उठाए क्या-क्या सवाल
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि सभी साक्ष्य एकत्र किए जाएं, संरक्षित किए जाएं और फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा जांच की जाए। शव सबसे मूक तथा ईमानदार गवाह होता है। अदालत ने कहा कि घटना में दो अलग-अलग बन्दूकों से गोलियां चलाई गई थीं। दो अलग-अलग बन्दूकों के खाली खोल मिले हैं। हर बन्दूक की फायरिंग पिन अलग-अलग होती है। यह इस बात का निर्णायक प्रमाण हो सकता है कि किस बन्दूक में कौन सी फायरिंग पिन होगी।'अदालत ने कहा, 'हम इस बात को निर्णायक रूप से दर्शाने वाली रिपोर्ट देखना चाहते हैं।'

अदालत ने यह भी पूछा कि क्या उसे वह गोली मिल गई है जो आरोपी को भेद गई थी। इस पर सराफ ने कहा कि गोली पुलिस वाहन की टिन की छत को भेद गई थी। अदालत ने कहा, 'गोली कितनी दूर तक गई? यह एक सुनसान इलाका था। क्या आपको यह नहीं मिली?' सराफ ने कहा कि सीआईडी इस मामले की जांच कर रही है।अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पुलिस ने उस पानी की बोतल को जब्त नहीं किया है जो आरोपी को वाहन में पानी मांगने पर दी गई थी।


पुलिस का कहना था कि आरोपी के हथकड़ी खोल दी गई थी, जब उसने पानी मांगा था, जिसके बाद उसने एक पुलिस अधिकारी की पिस्तौल छीन ली और गोली चला दी। अदालत ने कहा कि पुलिस घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में विफल रही है। अदालत ने मृतक आरोपी द्वारा की गई गोलीबारी में घायल हुए पुलिस अधिकारी की मेडिकल रिपोर्ट भी मांगी।

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