महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव: उद्धव ठाकरे ने ठोका मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना का दावा
- पितृपक्ष खत्म होते ही शिवसेना ने भाजपा को दिया अंतिम संदेश, महाराष्ट्र में बढ़ी चुनावी सरगर्मी
- शिवसेना प्रमुख ने कहा, बाला साहेब के आखिरी वक्त में किसी शिवसैनिक को सीएम बनाने का दिया था वचन
- भाजपा 144 और शिवसेना 126 सीटों पर लड़ेगी विधानसभा चुनाव, पहले उपमुख्यमंत्री पद पर बनी थी सहमति
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महाराष्ट्र में पितृ पक्ष खत्म होने के साथ ही चुनावी सरगर्मी बढ़ गई है। भाजपा के शिवसेना के साथ सीट बंटवारा होने के दावे के बीच उद्धव ठाकरे ने शनिवार को दो टूक कहा कि मिलकर लड़ने पर जीतने पर उनकी पार्टी मुख्यमंत्री पद का दावा नहीं छोड़ेगी।
उनके इस बयान के बाद भाजपा शिवसेना के बीच गठबंधन को लेकर नए सिरे से अटकलें लगने लगी हैं। इससे पहले बृहस्पतिवार को एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने दावा किया था कि भाजपा 144 और शिवसेना 126 सीट पर चुनाव लड़ेगी और सत्ता में आने पर उपमुख्यमंत्री का पद शिवसेना को दिया जाएगा।
उद्धव ने रंग शारदा सभागृह में राज्य की सभी 288 विधानसभा सीटों के दावेदार उम्मीदवारों और सभी जिला प्रमुखों की बैठक बुलाई थी। कहा जा रहा था कि भाजपा कोई भी चुनावी घोषणा करने से पहले पितृ पक्ष के खत्म होने का इंतजार कर रही है। इस तरह वह शिवसेना के इंतजार को भी बढ़ा रही है। इस पर शिवसेना प्रमुख ने कहा कि पार्टी की स्थापना किसी मुहूर्त को देखकर नहीं की गई थी। एक तरफ देश चंद्रयान भेज रहा है, मंगल ग्रह पर पानी ढूंढ रहा है और मगर हम आज भी पत्रिका देख कर मंगल मुहूर्त निकाल रहे हैं।
मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना का दावा ठोकते हुए उन्होंने कहा कि आखिरी वक्त में बाला साहेब को उन्होंने वचन दिया था कि एक न एक दिन मुख्यमंत्री पद पर शिवसैनिक को जरूर बैठाऊंगा। इस वचन को पूरा करने की कसम खाई है। अगर शिवसैनिक उनके साथ हैं तो वह अपनी मर्जी के फैसले ले सकते हैं। उन्होंने शिवसैनिकों से कहा कि अगर हम भाजपा के साथ मिलकर लड़ते हैं तो उनके साथ अपनी ताकत लगानी है और हमें उम्मीद है कि भाजपा के लोग भी हमारे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। उन्होंने कहा कि हम शिवसैनिक हैं और हमारे अंदर कपट नहीं है।
कांग्रेस को भी इंतजार
कांग्रेस भी भाजपा-शिवसेना के सीट बंटवारे का इंतजार कर रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस 125 सीटों पर उम्मीदवारों की सूची दिल्ली में बना चुकी है, मगर उसे रोके हुए है। पार्टी रणनीतिकारों को उम्मीद है कि भाजपा-शिवसेना मिलकर लड़ती हैं तो कई प्रमुख नेता टिकट से वंचित रह जाएंगे और वे टूटकर उनके पाले में सकते हैं। कांग्रेस-एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ रही हैं। 288 में से दोनों 125-125 सीटों पर लड़ेंगी। जबकि उन्होंने 38 सीटें साथी दलों के लिए छोड़ी हैं।