क्या हार सुनिश्चित देख महाराष्ट्र में नहीं आईं सोनिया-प्रियंका? राहुल भी पड़े फीके
- प्रदेश में शनिवार की शाम पांच बजे थम जाएगा चुनाव प्रचार
- देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी का राज्य में चुनाव प्रचार फीका
- भाजपा और शिवसेना की ओर से ताबड़तोड़ की जा रही रैलियां
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार शनिवार 19 अक्तूबर की शाम पांच बजे खत्म हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री तथा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे विभिन्न जगहों पर जनसभाओं में गरज रहे हैं। बढ़ती उम्र के बावजूद एनसीपी सुुप्रीमो शरद पवार भी बढ़-चढ़ कर सभाएं कर रहे हैं। मगर देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद कांग्रेस का प्रचार फीका पड़ा है।
ऐसे में यह कहा जाने लगा है कि हार सुनिश्चित देख कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी प्रचार में नहीं आईं। कांग्रेस राज्य में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है, लेकिन पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी मैदान में नहीं उतरी हैं। स्टार प्रचारक प्रियंका वाड्रा के रोड शो की भी केवल चर्चाएं भर रह गईं।
गांधी परिवार के राहुल महाराष्ट्र में आए जरुर, लेकिन उनका असर नहीं दिखा। वह लोकसभा चुनाव की तरह मोदी पर ही हमलावर रहे। पिछली हार से उन्होंने कुछ सीखा है, ऐसा नहीं लगा। फिर जब महाराष्ट्र में प्रचार हो रहा था तो राहुल विदेश निकल गए थे। इस पर भी तरह-तरह की चर्चाएं हुईं। हालांकि राहुल ने लौट कर कोई सफाई भी नहीं दी।
कांग्रेस के शीर्ष परिवार की महाराष्ट्र में उदासीनता से राजनितिक हलकों में चर्चा है कि उसने चुनाव से पहले ही हार मान ली है। यही वजह है कि सोनिया गांधी यहां नहीं आईं और प्रियंका का रोड शो चर्चा के बाद रद्द कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो शीर्ष नेतृत्व राज्य कांग्रेस में फूट और गुटबाजी के चलते चुनाव प्रचार से दूर रहा।
जानकार इसकी एक वजह और बताते हैं कि महाराष्ट्र में कांग्रेस के पास बचाने को कुछ बाकी नहीं है। वह सचमुच भगवान भरोसे है। इस साल मई में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र एक सीट मिली थी। साथ ही, उसके पास राज्य में सत्ताधारी पार्टी को घेरने के लिए कारगर रणनीति भी नहीं थी।
इस बार नहीं हुई कांग्रेस-एनसीपी की संयुक्त सभा
कांग्रेस की तरफ से महाराष्ट्र में राहुल गांधी समेत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सचिन पायलट, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आए, मगर मनमोहन के अलावा किसी की आवाज नहीं सुनी गई। यही नहीं, मिलकर लड़ने के बावजूद कांग्रेस-एनसीपी ने एक भी संयुक्त सभा नहीं की। ऐसे में एकता की बात करने वाले दोनों दलों के नेता कहीं साथ नहीं दिखे।
दूसरी ओर भाजपा में मोदी-शाह-फडणवीस के साथ राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, वित्तममंत्री निर्मला सीतारमण और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनसमर्थन जुटाते दिखे। इन नेताओं ने राज्य के तमाम प्रमुख शहरों में सभाएं व पत्रकार वार्ता भी की।