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Hindi News ›   India News ›   Maharashtra Assembly Election 2019 Results Why no cm completed full term in 50 years

कई दशकों बाद महाराष्ट्र में एक ही व्यक्ति दूसरी बार संभालेगा सीएम की कुर्सी

Fri, 25 Oct 2019 02:36 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Fri, 25 Oct 2019 02:36 PM IST
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Maharashtra Assembly Election 2019 Results Why no cm completed full term in 50 years
आदित्य ठाकरे-देवेंद्र फडणवीस-उद्धव ठाकरे (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

महाराष्ट्र में भाजपा ने 2014 में पहली बार सरकार बनाई और पहली ही बार खास उपलब्धि हासिल कर ली। देवेंद्र फडणवीस से पहले कांग्रेस के मुख्यमंत्री वसंतराव नाइक ने न सिर्फ पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा किया था बल्कि फिर से मुख्यमंत्री भी बने। 1960 से 2014 तक महाराष्ट्र में 26 मुख्यमंत्रियों ने शपथ ली। लेकिन नाइक के बाद सिर्फ फडणवीस ही अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रहे।

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आपातकाल में गंवाया पद  

नाइक ने 1967 से 1972 तक अपना सीएम कार्यकाल पूरा किया था। वसंतराव नाइक दोबारा जीतकर आए और फिर से मुख्यमंत्री बने। मगर 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें पद से हटाकर शंकरराव चव्हाण को सीएम बना दिया गया। माना जाता था कि चव्हाण इंदिरा गांधी के वफादारों में से एक थे। मगर आपातकाल हटने के बाद वसंतदादा पाटिल सीएम बन गए। 

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महाराष्ट्र को मिला सबसे युवा सीएम 

आपातकाल के बाद कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में वापसी की कोशिशें की और पाटिल ने गठबंधन की सरकार बनाई। मगर पार्टी के भीतर उपजे मतभेदों के चलते उन्हें पद गंवाना पड़ा। उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने वाला शख्स उन्हीं की पार्टी का एक युवा नेता था। जिसका नाम था शरदराव गोविंदराव पवार। महज 37 साल की उम्र में यहां तक पहुंच शरद पवार राज्य के सबसे युवा सीएम बन गए। मगर 1980 में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। 

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जबरन वसूली के केस ने ली बलि 

वर्ष 1980 में महाराष्ट्र को अब्दुल रहमान अंतुले के रूप में पहला मुस्लिम मुख्यमंत्री मिला। मगर दो साल के बाद ही उन्हें पद गंवाना पड़ा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जबरन वसूली के एक मामले में दोषी ठहरा दिया। 

'पार्ट टाइम' बनकर रह गया पद 

इसके बाद महाराष्ट्र अपने सबसे बुरे दौर से गुजरा। मुख्यमंत्री का पद एक तरह से 'पार्ट टाइम' नौकरी हो गया था। इंदिरा गांधी ने अंतुले के विकल्प के तौर पर बाबासाहेब भोसले को सीएम बनाया। मगर 1983 में वसंतदादा पाटिल फिर से मुख्यमंत्री बन गए।

घोटाले में फंसे मुख्यमंत्री 

1985 में वसंतदादा पाटिल की जगह शिवाजीराव पाटिल निलांगेकर मुख्यमंत्री बने। मगर एक साल बाद ही मेडिकल परीक्षा घोटाले में नाम आने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। कांग्रेस ने फिर से शंकरराव चव्हाण पर भरोसा जताया। मगर दो साल बाद शरद पवार फिर से मुख्यमंत्री पद पर काबिज हो गए। 

मुंबई दंगों के बाद दिया इस्तीफा 

शरद पवार के केंद्रीय राजनीति में जाने के बाद सुधाकरराव पाटिल मुख्यमंत्री बने। मगर 1993 के दंगों के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पवार फिर से सीएम बन गए। 

गठबंधन का दौर शुरू 

1995 में राज्य को पहला गैर—कांग्रेसी मुख्यमंत्री मिला। शिवसेना—भाजपा गठबंधन में मनोहर जोशी सीएम बने। मगर जमीन घोटाले के चलते उन्हें चार साल में इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद नारायण राणे, विलासराव देशमुख, सुशील शिंदे, अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण भी सीएम बने, लेकिन कोई भी पांच साल पूरे नहीं कर पाया। 

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