Maharashtra: विधानसभा से मंत्रियों के गायब रहने पर बिफरे अजित पवार, उपमुख्यमंत्री फडणवीस ने मांगी माफी
अजित पवार की नाराजगी पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रियों की गैरमौजूदगी को लेकर माफी मांगी। फडणवीस ने कहा कि कल मध्य रात्रि तक सदन की कार्यवाही चली थी, इस वजह से कई मंत्री सदन में मौजूद नहीं रहे।
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महाराष्ट्र विधानसभा में नेता विपक्ष अजित पवार ने बुधवार को सदन से मंत्रियों के गायब रहने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए गए थे लेकिन मंत्रियों की गैरमौजूदगी के चलते आठ में से सात ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रद्द करने पड़े। अजित पवार की नाराजगी पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने माफी मांगी और आगे से मंत्रियों के मौजूद रहने की बात कही।
अजित पवार बोले- यह बेशर्मी की हद
बता दें कि बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में आठ ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए गए थे लेकिन जिन विभागों से संबंधित ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाए गए थे, उनसे संबंधित मंत्री विधानसभा की कार्रवाई में शामिल ही नहीं थे। इस पर नेता विपक्ष अजित पवार नाराज हो गए। उन्होंने बिफरते हुए कहा कि यह बेशर्मी की हद है। मंत्री विधायी कामों को गंभीरता से नहीं लेते हैं। वह मंत्री तो बनना चाहते हैं लेकिन अपने विभागों से संबंधित काम को लेकर गंभीर नहीं हैं। संसदीय कार्यमंत्री चंद्रकांत पाटिल भी सदन में मौजूद नहीं थे। इस पर भी अजित पवार ने नाराजगी जाहिर की। मंत्रियों की गैरमौजूदगी के चलते आठ में से सात ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रद्द हो गए।
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फडणवीस ने मांगी माफी
वहीं अजित पवार की नाराजगी पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रियों की गैरमौजूदगी को लेकर माफी मांगी। फडणवीस ने कहा कि कल मध्य रात्रि तक सदन की कार्यवाही चली थी, इस वजह से कई मंत्री सदन में मौजूद नहीं रहे। फडणवीस ने कहा कि आगे से जब भी मंत्रियों के विभागों से संबंधित चर्चा होगी तो उन्हें मौजूद रहने के लिए कहा जाएगा। ऐसे में मंत्रियों से चर्चा का समय नहीं मिला। बता दें कि मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा की बजट प्रस्ताव पर चर्चा मध्य रात्रि एक बजे तक चली थी।
'पुरानी पेंशन योजना' पर डिप्टी सीएम ने कही यह बात
'पुरानी पेंशन योजना' पर डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि हम इस बात से भी सहमत हैं कि कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और सामाजिक सुरक्षा मिलनी चाहिए। मैं यूनियनों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने अपनी हड़ताल वापस ले ली और फिर से दूसरों से ऐसा करने का अनुरोध करता हूं। सरकार इन कर्मचारियों के पीछे दृढ़ है और उनकी मांगों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि चर्चा से ही इस मुद्दे का समाधान हो सकता है। उन्होंने बताया कि कल सीएम ने 3 सदस्यीय समिति से 3 महीने के भीतर सिफारिश रिपोर्ट पेश करने को कहा है। यह हमें एक दीर्घकालिक समाधान देगा।
क्या होता है ध्यानाकर्षण प्रस्ताव
जब संसद या विधानसभा में कोई सदस्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर संबंधित मंत्री से बयान मांगता है तो संबंधित मंत्री और व्यापक पैमाने पर सरकार की जिम्मेदारी तय होती है। महत्वपूर्ण मुद्दे पर संबंधित मंत्री से बयान मांगने के लिए सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया जाता है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने के लिए सदस्यों को सदन के अध्यक्ष की पूर्व अनुमति लेनी होती है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर ना तो किसी तरह की चर्चा होती है और ना ही इसमें कोई मतदान होता है। संबंधित मंत्री सुविधानुसार उसी समय या फिर बाद में किसी अन्य दिनों में अपना जवाब दे सकते हैं।
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