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महाराष्ट्र: राज्यपाल ने भाजपा को सरकार बनाने के लिए किया आमंत्रित

Sun, 10 Nov 2019 06:07 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 10 Nov 2019 06:07 PM IST
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Maharashtra Assembly Aditya and Uddhav Thackeray will meet with Shiv Sena MLAS today
प्रतीकात्मक तस्वीर

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने रविवार को भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया। बहुमत साबित करने को लेकर आज महाराष्ट्र भाजपा कोर ग्रुप की मैराथन बैठक हुई। जिसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि राज्यपाल ने हमें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है क्योंकि हम सबसे बड़ी पार्टी हैं। हम आज शाम चार बजे दोबारा मिलेंगे और राज्यपाल के निमंत्रण पर फैसला लेंगे

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इससे पहले संजय राउत ने कहा कि शिवसेना सरकार बनाने की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य की दुश्मन नहीं है। सभी पार्टियों की कुछ मुद्दों पर अलग राय हो सकती है। उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि भाजपा अभी तक इंतजार क्यों कर रही है, जबकि कम सीटों में उन्होंने अन्य राज्य में सरकार बनाई है। 

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यदि कोई और सरकार गठित नहीं करता तो रणनीति की घोषणा करेंगे: राउत

शिवसेना के नेता संजय राउत ने रविवार को कहा कि यदि महाराष्ट्र में कोई और सरकार गठित नहीं कर पाता है तो उनकी पार्टी अपनी अगली रणनीतिक की घोषणा करेगी। राउत ने मुंबई में रविवार को संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार गठित करने के लिए भाजपा को आमंत्रित करने के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के निर्णय का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि अब हम उम्मीद करते हैं कि राज्यपाल के हस्तक्षेप से राज्य को सरकार मिल जाएगी।


राउत ने कहा, ‘सबसे बड़े एकल दल को बुलाया जाना था। हमें समझ नहीं आता कि यदि भाजपा को बहुमत का भरोसा था तो उसने (परिणाम घोषित होने के) 24 घंटे बाद ही दावा क्यों नहीं किया।’ शिवसेना की आगे की योजना के बारे में पूछे जाने पर राउत ने कहा कि राज्यपाल के पहले कदम पर तस्वीर साफ हो जाने दीजिए। यदि कोई और सरकार गठित नहीं कर पाता है तो शिवसेना अपनी रणनीति घोषित करेगी।’’

राउत ने फड़णवीस का नाम लिए बगैर कहा, ‘जब राजनीतिक सहयोग हासिल करने की कोशिश और धमकाने के तरीके काम नहीं करते तो यह स्वीकार करने का समय होता है कि हिटलर मर चुका है और गुलामी के गहराते बादल छंट गए हैं।’उन्होंने अपने लेख में कहा कि फड़णवीस को दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद मिला था, इसके बावजूद वह इस पद पर नहीं बैठ पाए।

उन्होंने कहा कि एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार और कांग्रेस के कई नेताओं ने अपनी पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी से कहा है कि उनकी प्राथमिकता यह है कि राज्य में कोई गैर भाजपाई मुख्यमंत्री बने।

महाराष्ट्र में हो महाराष्ट्र की राजनीति

सामना के लेख में शिवसेना ने भाजपा की तुलना हिटलर से की। उन्होंने कहा कि पांच साल दूसरों को डर दिखाकर शासन करने वाली टोली आज खुद खौफजदा है। यह उल्टा हमला है। डराकर मार्ग या समर्थन नहीं मिलता है। महाराष्ट्र की राजनीति महाराष्ट्र में ही होनी चाहिए। महाराष्ट्र दिल्ली का गुलाम नहीं है। इस बार ऐसी स्थिति है कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा ये उद्धव ठाकरे तय करेंगे। राज्य के बड़े नेता शरद पवार की भूमिका महत्वपूर्ण साबित होगी। कुछ भी हो लेकिन इस बार भाजपा का मुख्यमंत्री न हो, यह महाराष्ट्र का एक स्वर है।

मातोश्री के बाहर लगे पोस्टर

चुनाव के परिणाम आने के बाद शिवसेना के नेता और विधायक उद्धव ठाकरे के बेटे और पहली बार वर्ली विधानसभा से जीते आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। वहीं अब वह शिवसेना अध्यक्ष को महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं। इसका सबूत है मुंबई में मातोश्री (ठाकरे आवास) के बाहर लगा पोस्टर। इस पोस्टर में लिखा है, 'महाराष्ट्र को मुख्यमंत्री के तौर पर उद्धव की जरूरत है।'
 

एनसीपी-कांग्रेस को बुलाएं राज्यपाल

कांग्रेस नेता मिलिंद देवड़ा ने कहा, 'महाराष्ट्र के राज्यपाल को एनसीपी-कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए बुलाना चाहिए। यह दूसरा बड़ा गठबंधन है। भाजपा और शिवसेना ने सरकार बनाने से मना कर दिया है।'

वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश करेंगे

एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि गैर भाजपा-शिवसेना सरकार बनाती है तो हम विपक्ष में बैठेंगे। अगर वे सरकार नहीं बनाना चाहते तो कांग्रेस-एनसीपी एक वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश करेगी। हमने राज्य की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करने के लिए 12 नवंबर को अपने सभी विधायकों की बैठक बुलाई है। शनिवार को मलिक ने कहा था कि एनसीपी विधानसभा में बहुमत साबित करने के दौरान भाजपा के खिलाफ वोट करेगी। 

मलिक ने कहा, राज्यपाल ने इसमें देरी कर दी। हम इस दौरान भाजपा के खिलाफ वोट करेंगे। मलिक ने यह भी कहा कि अगर शिवसेना ने भी भाजपा के विरोध में वोट किया तो हमारी पार्टी एक विकल्प पर विचार कर सकती है। हालांकि शिवसेना प्रमुख ने कहा इससे पहले कहा था कि शिवसेना को समर्थन देने पर कोई चर्चा नहीं हुई है। 

जयपुर में पहुंचे कांग्रेस विधायक

इधर जारी खींचतान के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों से मुलाकात कर राज्य की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानिकराव ठाकरे ने बताया कि महाराष्ट्र में सरकार गठन पर पार्टी के रुख को तय करने के लिए कांग्रेस के महासचिव खड़गे ने पार्टी विधायकों से अनौपचारिक रूप से मुलाकात की। ठाकरे ने कहा कि खड़गे विधायकों के रुख से पार्टी नेतृत्व को अवगत कराएंगे।

अशोक चव्हाण, पृथ्वीराज चव्हाण और बालासाहेब थोराट जैसे वरिष्ठ नेताओं सहित सभी 44 विधायक महाराष्ट्र में सरकार बनाने के गतिरोध के मद्देनजर खरीद फरोख्त का शिकार होने के डर से कांग्रेस शासित राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक रिसॉर्ट में ठहरे हैं।

 

राज्यपाल ने भाजपा से पूछा अगर सरकार बना सकते हों तो बताएं

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शनिवार को सबसे बड़ी पार्टी भाजपा को 14वीं विधानसभा में सरकार बनाने के बारे में राय मांगी है। भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि राज्यपाल के पत्र पर विचार के लिए रविवार को कोर कमेटी की बैठक होगी, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला होगा। 13वीं विधानसभा का कार्यकाल शनिवार को समाप्त हो गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को ही पद से इस्तीफा दे दिया था।

महाराष्ट्र में एक साथ सरकार बनाने का दावा करने वाली भाजपा व शिवसेना के बीच सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर मतभेद के कारण 21 अक्तूबर को आए फैसलों के बाद अभी तक किसी भी दल ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया है। इस बीच शनिवार को एडवोकेट जनरल आशुतोष कुंभाकोनी ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की। इसके बाद देर शाम राजभवन ने भाजपा से पूछा कि क्या सरकार बना सकते हैं? इस बीच पूर्व सचिव अनंत कलसे ने कहा, राज्यपाल द्वारा नई विधानसभा के लिए पार्टी को बुलाने क विधानसभा निलंबित रहेगी।

सरकार बनाने के दो विकल्प 

पहला अगर भाजपा शिवसेना में सुलह हो जाए तो गठबंधन सरकार बन जाएगी, हालांकि शिवसेना अड़ी हुई है। इसके अलावा दूसरा विकल्प है कि अगर भाजपा को अन्य 29 विधायकों का समर्थन मिल जाता है तो उसकी संख्या 105 से बढ़कर 134 हो जाएगी। इसमें अगर सदन से 22 विधायक अनुपस्थित रहते हैं तो 288 सीटों वाला सदन घटकर 266 का रह जाएगा और बहुमत के लिए जरूरी 134 सीटों का आंकड़ा भाजपा के पास उपलब्ध होगा।

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