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महाराष्ट्र: 367 स्थानीय निकाय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की एसईसी को चेतावनी, दोबारा नोटिफिकेशन पर अवमानना कार्रवाई

Thu, 28 Jul 2022 10:10 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 28 Jul 2022 10:10 PM IST
सार

अदालत ने अपने 20 जुलाई के आदेश में उल्लेख किया था कि एसईसी के वकील ने कहा कि 367 स्थानीय निकायों के संबंध में चुनाव कार्यक्रम पहले ही शुरू हो चुका है और इसे पूरा किया जाएगा।

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Maha local bodies polls: SC warns of contempt if elections renotified to include OBC quota
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को ओबीसी आरक्षण के संबंध में 367 स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया को फिर से अधिसूचित करने पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी दी। अदालत ने कहा, एसईसी चुनाव कार्यक्रम को दोबारा नोटिफाई नहीं कर सकता। अदालत ने 20 जुलाई के अपने आदेश की गलत व्याख्या पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उसके निर्देशों का कोई भी उल्लंघन हुआ तो एसईसी और अन्य संबंधित लोगों पर अवमानना कार्रवाई होगी।

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सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को दिया था निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को स्थानीय निकाय चुनावों में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण प्रदान करने वाले बनठिया आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था और निर्देश दिया था कि राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव अगले दो सप्ताह में अधिसूचित किए जाएं। हालांकि, उसी दिन यह स्पष्ट कर दिया था कि नई आरक्षण नीति उन 367 स्थानीय निकायों पर लागू नहीं होगी जहां चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
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367 स्थानीय निकायों में चुनाव प्रक्रिया पहले ही शुरू 
अदालत ने अपने 20 जुलाई के आदेश में उल्लेख किया था कि एसईसी के वकील ने कहा था कि 367 स्थानीय निकायों के संबंध में चुनाव कार्यक्रम पहले ही शुरू हो चुका है और इसे पूरा किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने 2021 की शुरुआत में स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत कोटा प्रदान करने वाली एसईसी अधिसूचना को रद्द कर दिया था। दिसंबर 2021 में स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि सरकार एससी के 2010 के आदेश में निर्धारित ट्रिपल टेस्ट को पूरा नहीं करती है। शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया था कि जब तक ट्रिपल टेस्ट मानदंड पूरा नहीं हो जाता, तब तक ओबीसी सीटों को सामान्य श्रेणी की सीटों के रूप में फिर से अधिसूचित किया जाएगा।
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ट्रिपल टेस्ट के लिए राज्य सरकार को प्रत्येक स्थानीय निकाय में ओबीसी के पिछड़ेपन पर डेटा एकत्र करने के लिए एक आयोग का गठन करना था, ताकि आयोग की सिफारिशों के आलोक में प्रत्येक स्थानीय निकाय में आरक्षण के अनुपात को निर्दिष्ट किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसा आरक्षण एससी/एसटी/ओबीसी के लिए आरक्षित कुल सीटों का 50% से अधिक न हो। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के जवाब में तत्कालीन एमवीए सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव जयंत बनठिया के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया था और उनसे अदालत द्वारा मांगे गए डेटा को एकत्र के लिए कहा था। आयोग द्वारा 7 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद नई शिवसेना-भाजपा सरकार ने ओबीसी कोटा शुरू करने वाले स्थानीय निकायों के चुनाव कराने की अनुमति के लिए अदालत का रुख किया था।


सीबीआई निदेशक की नियुक्ति को चुनौती पर सुनवाई से हटे न्यायाधीश
वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता ने सुबोध जायसवाल की सीबीआई निदेशक के तौर पर नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने यह फैसला याचिकाकर्ता और महाराष्ट्र के पूर्व सहायक पुलिस आयुक्त राजेंद्र त्रिवेदी के उनके खिलाफ एक शिकायत पत्र के चलते लिया। त्रिवेदी ने जायसवाल की नियुक्ति को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि इस साल 22 मार्च को त्रिवेदी ने देश के चीफ जस्टिस एनवी रमण से उनकी शिकायत की थी। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक रह चुके सुबोध जायसवाल को पिछले साल मई में सीबीआई निदेशक नियुक्त किया गया था।

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