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मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी आरक्षण की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करे मद्रास हाईकोर्ट: सुप्रीम कोर्ट

Mon, 13 Jul 2020 01:38 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 13 Jul 2020 01:38 PM IST
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Madras High Court to hear petitions seeking OBC reservation in medical colleges says Supreme Court
supreme court - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट से कहा मेडिकल के 2020-21 के शैक्षणिक सत्र में स्नातक, स्नातकोत्तर और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रमों में अखिल भारतीय कोटे में तमिलनाडु सरकार द्वारा छोड़ी गई सीटों में 50 फीसदी आरक्षण का लाभ राज्य के ओबीसी छात्रों को नहीं देने के केंद्र के निर्णय के खिलाफ लंबित याचिकाओं पर शीघ्र फैसला किया जाए।

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न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और हेमंत गुप्ता की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि हाईकोर्ट को शीर्ष अदालत में एक अन्य मामला लंबित होने के बावजूद राज्य सरकार तथा अन्य की याचिकाओं पर निर्णय करना चाहिए।
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पीठ ने कहा कि उसके समक्ष याचिकाओं में दी गई सभी दलीलों पर हाईकोर्ट को फैसला करना चाहिए। इसके साथ ही पीठ ने हाईकोर्ट से इसे देखने का अनुरोध किया।

इससे पहले, दो जुलाई को तमिलनाडु सरकार ने एक आवेदन दायर कर शीर्ष अदालत से अनुरोध किया था कि हाईकोर्ट को अपने यहां लंबित याचिकाओं का शीघ्र निबटारा करने का निर्देश दे।
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इस आवेदन में तमिलनाडु सरकार ने हाईकोर्ट के 22 जून के आदेश को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने इस आदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण विवाद पर अंतरिम आदेश देने से इंकार कर दिया था। अदालत ने इस मामले की सुनवाई नौ जुलाई के लिए स्थगित करते हुए कहा था कि इसी तरह की याचिका आठ जुलाई को शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

शीर्ष अदालत में यह मामला आठ जुलाई के लिए सूचीबद्ध था लेकिन उसने इसे स्थगित कर दिया है। हाईकोर्ट ने राज्य की याचिका पर नौ जुलाई को सुनवाई की तारीख तय की है।

राज्य सरकार, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, मार्क्सवादी पार्टी, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी और कम्युनिस्ट पार्टी ने 11 जून को शीर्ष अदालत से कोई राहत नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। शीर्ष अदालत ने इन याचिकाओं पर विचार करने से इनकार करते हुए उनसे कहा था कि राहत के लिए वे मद्रास हाईकोर्ट जाएं।

हाईकोर्ट ने केंद्र की इस दलील का संज्ञान लेते हुए कोई भी अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया था कि 1986 से ही शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार मेडिकल में प्रवेश के मामले में अखिल भारतीय स्तर पर सीटों के कोटे में कोई आरक्षण प्रदान नहीं किया गया है।

केंद्र के वकील ने उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि दस साल बाद इसमें सुधार किया गया था और अनुसूचित जाति तथा जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था। ओबीसी के आरक्षण के लिए 2015 में भी याचिकाएं दायर की गईं थीं जो शीर्ष अदालत में अभी भी लंबित हैं।


राज्य सरकार और विभिन्न राजनीतिक दल चाहते हैं कि तमिलनाडु के कानून के अनुसार ओबीसी के लिए 50 फीसदी आरक्षण प्रदान किया जाए।याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र ने 2006 के कानून के तहत भी अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 27 फीसदी स्थान आरक्षित करने की अपनी नीति का अनुपालन नहीं किया है।

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