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Supreme Court: राजनीतिक दलों पर पॉश कानून लागू करने की मांग वाली अर्जी खारिज, सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

Fri, 01 Aug 2025 12:03 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Fri, 01 Aug 2025 12:03 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों पर POSH कानून लागू करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। याचिका वकील योगमाया एम.जी. ने दायर की थी, जिसमें महिला कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक शिकायत समिति की मांग की गई थी।

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POSH Act In Political parties Supreme Court rejects petition to implement law
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया जिसमें देशभर के सभी राजनीतिक दलों पर कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से बचाव संबंधी POSH कानून 2013 को लागू करने की मांग की गई थी। अदालत ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की अनुमति दी, लेकिन इस पर कोई स्पष्ट निर्देश देने से मना कर दिया।
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यह याचिका अधिवक्ता योगमाया एमजी ने दाखिल की थी। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक दलों में काम करने वाली महिलाएं भी कर्मचारी की श्रेणी में आती हैं, इसलिए POSH कानून के तहत उन्हें भी कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि सभी राजनीतिक दलों को इस कानून का पालन करने और आंतरिक शिकायत समिति बनाने का निर्देश दिया जाए।
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पहले भी हुई थी कोशिश
योगमाया ने इस मुद्दे को पहले भी 2024 में सुप्रीम कोर्ट में उठाया था, जिसके बाद अदालत ने उन्हें संबंधित प्राधिकरण से संपर्क करने की सलाह दी थी। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब दोबारा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, पर अदालत ने याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। हालांकि इस बार भी याचिकाकर्ता ने कई संवेदनशील तर्क दिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कोई स्पष्ट आदेश देने से इनकार करते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी।
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कई दलों को बनाया गया था पक्षकार
इस याचिका में केंद्र सरकार के अलावा भाजपा, कांग्रेस और अन्य प्रमुख राजनीतिक दलों को प्रतिवादी बनाया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के 'विशाखा निर्णय' और POSH कानून के तहत हर संगठन में आईसीसी अनिवार्य है, और राजनीतिक दल भी इससे अछूते नहीं होने चाहिए।

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इन महिलाओं को सबसे अधिक खतरा
याचिका में यह भी कहा गया कि चुनाव अभियानों और पार्टी गतिविधियों में सक्रिय जमीनी स्तर की महिला कार्यकर्ता सबसे ज्यादा असुरक्षित होती हैं। उनके पास न तो शिकायत का कोई सुरक्षित मंच है और न ही कानूनी सुरक्षा। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी बताया गया कि दुनियाभर में राजनीतिक रूप से सक्रिय महिलाएं मानसिक और यौन उत्पीड़न का सामना कर रही हैं, और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
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