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Madras High Court: सेंथिल बालाजी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर एकमत नहीं हाईकोर्ट जज, बड़ी बेंच करेगी सुनवाई

Tue, 04 Jul 2023 02:28 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 04 Jul 2023 02:28 PM IST
सार

याचिका पर हाईकोर्ट की बेंच एकमत नहीं है और जजों की अलग-अलग राय है। ऐसे में याचिका को सुनवाई के लिए अब बड़ी बेंच के पास भेजा जाएगा। 

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madras high court split verdict on habeas corpus plea of senthil balaji refer to larger bench
मद्रास हाईकोर्ट

विस्तार

नौकरी के बदले नकदी मामले में फंसे तमिलनाडु के मंत्री सेंथिल बालाजी की पत्नी ने बीते दिनों मद्रास हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। हालांकि इस याचिका पर हाईकोर्ट की बेंच एकमत नहीं है और जजों की अलग-अलग राय है। ऐसे में याचिका को अब बड़ी बेंच के पास भेजा जाएगा। डिविजन बेंच में जस्टिस जे निशा बानु और जस्टिस डी भरत चक्रवर्ती शामिल थे। जस्टिस जे निशा बानु जहां सेंथिल बालाजी को राहत देने पर सहमत थी, वहीं जस्टिस चक्रवर्ती इसके खिलाफ थे। इसके बाद बेंच ने रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिए कि इस मामले को अन्य बड़ी पीठ के पास भेज दिया जाए। 
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डीएमके के राज्य सभा सांसद और वरिष्ठ वकील एनआर एलांगो ने कहा कि 'अभी यथास्थिति बरकरार रहेगी क्योंकि डिविजन बेंच फैसले को लेकर एकमत नहीं है। एक जज ने हमारी याचिका स्वीकार करते हुए माना है कि ईडी के पास बालाजी को हिरासत में रखने का अधिकार नहीं है। हालांकि दूसरे जज ने इसे नहीं माना है।'
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सेंथिल बालाजी की पत्नी ने दायर की थी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
बता दें कि सेंथिल बालाजी को ईडी ने 14 जून गिरफ्तार किया था। इस पर सेंथिल बालाजी की पत्नी मेगाला ने मद्रास हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। याचिका में मेगाला ने आरोप लगाया कि उनके पति को गलत तरीके से हिरासत में रखा गया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने सेंथिल बालाजी के खिलाफ साजिश रची है। हालांकि ईडी की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का विरोध किया था। तुषार मेहता ने कहा कि पीएमएलए कानून  की धारा 19 के तहत ईडी के पास अधिकार है कि वह किसी व्यक्ति को शक के आधार पर गिरफ्तार कर सकती है। 
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क्या होती है बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाती है। यह याचिका तब दायर की जाती है, जब किसी व्यक्ति को अवैध रूप से कस्टडी में रखा जाए। 


बड़ी बेंच करेगी सुनवाई
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्देश में सेंथिल बालाजी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर तीन जजों की पीठ को जल्द से जल्द सुनवाई करने का निर्देश दिया। जस्टिस सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता ने की पीठ ने यह निर्देश दिया। 
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