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Madras High Court: हाईकोर्ट ने कहा- कैपिटेशन फीस कोई दान नहीं, इस पर आयकर लगाना जायज

Tue, 01 Nov 2022 05:34 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, चेन्नई।
एजेंसी, चेन्नई। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 01 Nov 2022 05:34 AM IST
सार

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि संस्थानों ने फीस सीट आवंटन के लिए वसूल की। यह शिक्षण संस्थानों को कैपिटेशन फीस लेने से रोकने के लिए 1992 में बने तमिलनाडु के कानून का खुला उल्लंघन है।

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Madras High Court said Capitation fees are neither donations nor voluntary contributions
मद्रास हाई कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

शिक्षण संस्थानों द्वारा ली गई कैपिटेशन फीस डोनेशन या स्वेच्छा से किया गया दान नहीं है। इन पर आयकर लगाया जा सकता है। यह आदेश देते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को कैपिटेशन फीस वसूली पर स्थिति साफ की। तमिलनाडु में कैपिटेशन फीस पर टैक्स लगाने के खिलाफ दायर एक शैक्षिक व हेल्थ ट्रस्ट सहित नौ अन्य की याचिका को आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल ने सही माना था। इस पर आयकर आयुक्त ने हाईकोर्ट में अपील की, जिसे जस्टिस आर माधवन और जस्टिस मोहम्मद शफीक ने स्वीकार कर लिया।

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हाईकोर्ट ने कहा कि संस्थानों ने फीस सीट आवंटन के लिए वसूल की। यह शिक्षण संस्थानों को कैपिटेशन फीस लेने से रोकने के लिए 1992 में बने तमिलनाडु के कानून का खुला उल्लंघन है। आयकर विभाग अधिकारियों ने कर लगाने का सही आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ ट्रिब्यूनल का आदेश तर्कहीन था, इसे रद्द किया जा रहा है। यह फीस किसी दान के काम के लिए तो ली नहीं गई थी। आयकर अधिनियम की धारा 11 के तहत इसे छूट के काबिल नहीं मान सकते।
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वसूली के पुराने मामले भी फिर से खोलें
हाईकोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया कि वे आयकर वसूली के आदेश को आगे बढ़ाएं, संबंधित संस्थानों व ट्रस्ट को जारी सर्टिफिकेट रद्द करें। अगर पूर्व में कैपिटेशन फीस वसूलने के ठोस साक्ष्य हों और कानूनी अनुमति हो तो पुराने टैक्स मूल्यांकन भी फिर से खोलें। हाईकोर्ट ने कहा, हमारा संविधान सभी को शिक्षा देने पर जोर देता है। समय-समय पर विभिन्न अदालतों ने कैपिटेशन फीस वसूली रोकने पर आदेश दिए हैं, लेकिन यह रुक नहीं रही है। राज्य सरकारें इसका पालन नहीं कर पा रहीं।

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