Madras HC: सुसाइड मामले में CRA और कांचीपुरम DM से जवाब तलब; ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी को विशेष आरक्षण देने को कहा
12 अक्टूबर को अदालत परिसर में एक व्यक्ति की कथित आत्महत्या के मामले में सुनवाई करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने राजस्व प्रशासन आयुक्त और कांचीपुरम के जिला कलेक्टर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा एक अन्य मामले में कोर्ट ने कहा कि ट्रांसजेंडर को विशेष आरक्षण दिया जाना चाहिए।
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मद्रास हाईकोर्ट ने राजस्व प्रशासन आयुक्त और कांचीपुरम के डीएम को फटकार लगाई है, साथ ही दोनों अधिकारियों से 12 अक्टूबर को अदालत परिसर में एक व्यक्ति की कथित आत्महत्या के मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा एक अन्य मामले में हाई कोर्ट ने कहा है कि कि ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को विशेष आरक्षण मिलना चाहिए वे इसके हकदार हैं। इस मामले में उन्होंने तमिलनाडु स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव के साथ ही चिकित्सा शिक्षा निदेशक (डीएमई) और चेन्नई और सचिव (चयन समिति), डीएमई को याचिकाकर्ता को विशेष आरक्षण देने का निर्देश दिया है।
अदालत परिसर में आत्महत्या के मामले में हुई सुनवाई
12 अक्टूबर को अदालत परिसर में एक व्यक्ति की कथित आत्महत्या के मामले में सुनवाई करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने चेन्नई के राजस्व प्रशासन आयुक्त और कांचीपुरम के जिला कलेक्टर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही न्यायमूर्ति एस एम सुब्रमण्यम ने दोनों अधिकारियों को तथ्यों और परिस्थितियों की जांच करने और मृतक वेलमुरुगन के अधिकार और उनके बेटे के अधिकार की जांच करने के लिए अदालत द्वारा शुरू की गई रिट कार्यवाही में पक्ष-प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि सामुदायिक प्रमाण पत्र जारी नहीं करने पर वेलमुरुगन ने अदालत परिसर में आत्महत्या कर ली थी।
ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी को विशेष आरक्षण देने की बात कही
वहीं, एक दूसरे मामले में जिसमें एस तमिलसेल्वी ने मद्रास उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करके शैक्षणिक वर्ष 2022-2023 के लिए बेसिक (नर्सिंग) कोर्स और पोस्ट बेसिक डिप्लोमा इन साइकियाट्री नर्सिंग कोर्स के लिए जारी किए गए प्रॉस्पेक्टस को रद्द करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की थी। अपनी याचिका में इस कोर्स में दाखिले के लिए चयन समिति के सचिव को एक ट्रांसजेंडर के रूप में विशेष श्रेणी के तहत शैक्षणिक वर्ष 2022-2023 के लिए पोस्ट बेसिक बीएससी (नर्सिंग) पाठ्यक्रम में प्रवेश देने के लिए निर्देश देने की मांग भी की थी। उनके वकील ने बताया कि हालांकि इन पाठ्यक्रमों के लिए अन्य प्रावधानों के तहत आरक्षण दिए गए थे, लेकिन थर्ड जेंडर या ट्रांसजेंडर के लिए अलग से कोई आरक्षण नहीं दिया गया था।
एस तमिलसेल्वी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि ट्रांसजेंडर विशेष आरक्षण के हकदार हैं। न्यायमूर्ति आर सुरेश कुमार ने इस मामले में उन्होंने तमिलनाडु स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव के साथ ही चिकित्सा शिक्षा निदेशक (डीएमई) और चेन्नई और सचिव (चयन समिति), डीएमई को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता एस तमिलसेल्वी को ट्रांसजेंडर के रूप में माना जाए। इतना ही नहीं, इस आधार पर शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु विशेष श्रेणी अर्थात ट्रांसजेंडर श्रेणी में रखा जाए। इस पाठ्यक्रम के लिए अभी चयन समिति के सचिव द्वारा वर्तमान सूची केवल महिला एवं पुरुष अभ्यर्थियों के लिए जारी की गई है।
न्यायमूर्ति आर सुरेश कुमार ने आगे कहा कि तमिलसेल्वी के अलावा अगर किसी अन्य ट्रांसजेंडर उम्मीदवार ने भी इस पाठ्यक्रम के लिए आवेदन किया है ऐसी स्थिति में चयन समिति के सचिव द्वारा अलग ट्रांसजेंडर श्रेणी की मेरिट सूची तैयार की जाएगी। ये मेरिट केवल ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों की होंगी और ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के बीच परस्पर योग्यता के आधार पर पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जाए।