मध्यप्रदेश: 7 माह में नौवीं बार एमपी पहुंचे पीएम, कवर की 140 सीटें, जानें BJP ने क्यों आगे किया मोदी का चेहरा
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले सात महीने में 9वीं बार मध्यप्रदेश के दौरे पर पहुंचे। मोदी 9 दौरों से प्रदेश के 25 जिलों की करीब 140 विधानसभा सीटों को कवर कर चुके हैं। पीएम मोदी अपने भाषणों में गरीब, महिलाओं, दलित-आदिवासियों के अलावा पसमांदा मुसलमानों की बात करते हैं। भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टीकरण को लेकर वे कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों पर हमलावर भी दिखाई देते हैं। ऐसे में भाजपा को भरोसा है कि पीएम मोदी के चेहरे की बदौलत वह सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला आसानी से कर लेगी। पार्टी के अलग-अलग धड़े भी एकजुट रहेंगे।
मध्यप्रदेश के साथ ही इसके सीमावर्ती राजस्थान और छत्तीसगढ़ के साथ दक्षिण के तेलंगाना और पूर्वोत्तर के मिजोरम में भी इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इन चुनावी राज्यों में 6 से 17 अक्तूबर के बीच कभी भी चुनावी आचार संहिता लागू हो सकती है। लेकिन इसके बहुत पहले ही पीएम इन राज्यों में सक्रिय हो गए हैं। पिछले छह महीने से वे लगातार चुनावी राज्यों में दौरे कर रहे हैं।
पीएम के सबसे ज्यादा दौरे राजस्थान और मध्यप्रदेश में ही हुए हैं। पिछले एक साल में पीएम मोदी राजस्थान के 11 दौरे कर चुके हैं। जबकि पीएम ने एक अप्रैल के बाद से अब तक सबसे अधिक दौरे मध्यप्रदेश के किए हैं। सात महीने में 9वीं बार मध्यप्रदेश के दौरे पर आ चुके हैं। छत्तीसगढ़ में अब तक पांच दौरे और तेलंगाना में तीन दौरे कर चुके हैं। एक मात्र मिजोरम ही बचा है, जहां पीएम अब तक नहीं जा सके हैं। ये माना जा रहा है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद भी प्रधानमंत्री की चुनावी सभाएं आयोजित होंगी।
जबलपुर के सहारे महाकौशल की 38 सीटों पर नजर
चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री का यह दौरा और रानी दुर्गावती के स्मारक का भूमिपूजन संयोग नहीं है। इसके पीछे महाकौशल की 38 विधानसभा सीटों को साधकर चुनाव में जीत की राह आसान करने की रणनीति है। भाजपा नेतृत्व इसके जरिए विंध्य क्षेत्र की गोंड आबादी को भी भावनात्मक रूप से साधे रखना चाहता है। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इन 47 सीटों में से 37 पर कब्जा किया था, लेकिन 2018 के चुनाव में भाजपा के हाथ केवल 16 सीटें आईं। कांग्रेस ने 31 सीटों पर कब्जा किया था। ये सीटें भाजपा को सत्ता से बाहर करने में महत्वपूर्ण साबित हुईं।
महाकौशल क्षेत्र में जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिले आते हैं। इस क्षेत्र में विधानसभा की 38 सीटें हैं। इनमें से 24 सीटों पर कांग्रेस और 13 पर भाजपा का कब्जा है। एक सीट पर कांग्रेस से बागी होकर लड़े निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई है। इनमें से आदिवासियों के लिए आरक्षित 13 सीटों में से 11 पर कांग्रेस जीती है। केवल दो सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। वहीं, अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सभी तीन सीटें कांग्रेस के कब्जे में हैं। छिंदवाड़ा और डिंडौरी जिलों में तो भाजपा का पूरी तरह सफाया है। केवल कटनी में भाजपा को एक के मुकाबले तीन की बढ़त हासिल है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ इसी क्षेत्र के छिंदवाड़ा का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का गृह क्षेत्र जबलपुर ही है। विधानसभा चुनाव में महाकौशल के राजनीतिक महत्व को कांग्रेस भी समझ रही है। इसी वजह से प्रियंका गांधी ने संकल्प 2023 नाम की सभा से चुनाव अभियान का आगाज किया, वह जबलपुर में ही आयोजित हुई। प्रियंका गांधी ने इसी सभा से पांच वादे जारी किए।
मध्य प्रदेश की इतनी सीटों पर दिखेगा पीएम के दौरे का असर
- पीएम मोदी 1 अप्रैल को रानी कमलापति से वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने पहुंचे थे। पीएम ने यहां भी की थी। इस सभा का प्रभाव भोपाल की सात समेत 29 विधानसभा सीटों पर दिख सकता है।
- 21 अप्रैल को रीवा में पंचायती राज सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे थे। इस सभा का असर रीवा संभाग और पन्ना जिले की 25 सीटों पर दिखाई दे सकता है।
- 27 जून को भोपाल में वंदे भारत ट्रेन का शुभारंभ और कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करने पहुंचे थे। पीएम के इस दौरे का असर भोपाल की सात, रायसेन की चार, राजगढ़ की पांच, नर्मदापुरम की चार, सीहोर की चार और विदिशा की पांच सीटों पर नजर आएगा।
- पीएम मोदी एक जुलाई को शहडोल में आयुष्मान, सिकलसेल मुक्ति कार्यक्रम का शुभारंभ और आदिवासियों से संवाद करने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम का असर आदिवासी बाहुल 26 सीटों पर पड़ने की उम्मीद है।
- 12 अगस्त को पीएम मोदी सागर में संत रविदास मंदिर एवं संग्रहालय के भूमिपूजन में पहुंचे थे। इस असर बुंदेलखंड की 29 सीटों पर नजर आ सकता है।
- 14 सितंबर को सागर जिले के बीना में पेट्रो केमिकल और रिफाइनरी विस्तारीकरण कार्यक्रम की आधारशिला रखने पहुंचे थे। इस रैली का असर बुंदेलखंड समेत 40 सीटों पर दिखाई दे सकता है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को मध्यप्रदेश दौरे पर आए। उन्होंने भोपाल के जंबूरी मैदान में भाजपा के कार्यकर्ता महाकुंभ को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का असर भोपाल संभाग की 16 सीटों पर दिखाई दे सकता है।
- दो अक्तूबर को पीएम मोदी ग्वालियर में विकास योजनाओं के शुभारंभ में पहुंचे थे। इस कार्यक्रम का असर ग्वालियर और आसपास की 15 सीटों पर पड़ने की पार्टी को उम्मीद है।
- पीएम मोदी पांच अक्तूबर को एक बार फिर एमपी पहुंचे। जबलपुर में रानी दुर्गावती स्मारक की नींव रखी। वहीं, छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना की आधारशिला भी रखेंगे। इससे महाकौशल की 30 सीटों को साधने की तैयारी है।
- अपने इन दौरे के दौरान पीएम तीन बार राजधानी भोपाल में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। इसके अलावा दो बार बुंदेलखंड के दौरे पर आए थे। इन दौरे में पीएम सरकारी कार्यक्रमों में शामिल भी हुए और रैलियों को भी संबोधित किया। जिसका असर पार्टी को आसपास के क्षेत्रों की विधानसभा सीटों पर पड़ने की उम्मीद है।
10 साल में एमपी का 35वां दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने नौ साल के कार्यकाल में 34 बार मध्यप्रदेश के दौरे पर आ चुके हैं, जबकि जबलपुर का 35वां दौरा है। इन 34 दौरों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी प्रदेश के 24 जिलों में पहुंचे हैं। अब तक पीएम मध्यप्रदेश के राजधानी भोपाल, इंदौर, रीवा, शहडोल, महाकाल की नगरी उज्जैन, श्योपुर, रतलाम, खरगोन, होशंगाबाद, सीधी, जबलपुर, धार, विदिशा, छतरपुर, मंदसौर, अमरकंटक, महू, झाबुआ, छिंदवाड़ा, राजगढ़, टेकनपुर, सीहोर व खंडवा जिले में आ चुके हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे ज्यादा महाकाल की नगरी उज्जैन, प्रदेश की राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर क्षेत्रों का दौरा किया है।