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Madhya Pradesh Election: पहले अमित शाह अब मोदी, विंध्य पर BJP के फोकस की क्या वजह, पिछली बार कैसे थे नतीजे?

Mon, 24 Apr 2023 04:23 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 24 Apr 2023 04:23 PM IST
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सार
विंध्य क्षेत्र में कुल 30 विधानसभा सीटें पड़ती हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में इन 30 में से 24 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। प्रधानमंत्री मोदी के रीवा में होने वाले कार्यक्रम के साथ भाजपा विंध्य में अपनी पकड़ को मजबूत बनाए रखने की कोशिश करेगी। 
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Madhya Pradesh Election: After Amit Shah now Modi in Vindhya, why BJP is focusing on Region and last result
विंध्य का सियासी रण - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को मध्य प्रदेश के दौरे पर पहुंचे। रीवा में उन्होंने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर आयोजित पंचायती राज सम्मेलन को संबोधित किया। एक महीने के भीतर मोदी का यह दूसरा मध्य प्रदेश दौरा है। वहीं, विंध्य क्षेत्र में मोदी से पहले गृह मंत्री अमित शाह भी आ चुके हैं। शाह फरवरी में सतना आए थे। 


राज्य में साल के अंत में चुनाव है। ऐसे में भाजपा के सबसे बड़े दो नेताओं के विंध्य क्षेत्र के दौरे के बाद इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। भाजपा विंध्य क्षेत्र पर इतना फोकस क्यों कर रही है? 2018 में इस इलाके में क्या नतीजे रहे थे? इस बार विंध्य में भाजपा को क्या उम्मीद है? भाजपा के सामने विंध्य में क्या चुनौतियां हैं? आइये जानते हैं…

पीएम मोदी का रीवा दौरा
पीएम मोदी का रीवा दौरा - फोटो : SOCIAL MEDIA
सबसे पहले जानिए विंध्य का सियासी समीकरण
विंध्य क्षेत्र में रीवा, मऊगंज, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया जिले आते हैं। इन जिलों में कुल 30 विधानसभा सीटें पड़ती हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में इन 30 में से 24 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। 

109 सीटें जीतने वाली भाजपा को ग्वालियर चंबल क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ था। वहीं, बाकी क्षेत्रों में भी पार्टी को 2013 के मुकाबले कम सफलता मिली थी। विंध्य इकलौता क्षेत्र था जहां भाजपा ने 2013 से बेहतर प्रदर्शन किया था। 

2013 के विधानसभा चुनाव में 165 सीटें जीतने वाली भाजपा को इस क्षेत्र 16 सीटें मिलीं थी। जबकि, कांग्रेस के खाते में 12 सीटें गईं थी। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा इस इलाके में मिली सफलता को फिर से दोहराना चाहती है। लेकिन, उसके सामने इस बार कई नई चुनौतियां दिखाई दे रही हैं। इन्हीं से निपटने के लिए पार्टी ने अभी से अपने दो सबसे बड़े नेताओं को मैदान में उतार दिया है। 

बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी
बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी - फोटो : अमर उजाला
भाजपा के सामने विंध्य में क्या चुनौतियां हैं?
मैहर से भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी द्वारा नई पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है। त्रिपाठी ने कहा है कि वह विंध्य क्षेत्र की सभी 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। वहीं, राज्य में चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी आम आदमी पार्टी को भी सबसे ज्यादा उम्मीदें इसी क्षेत्र से है। खासतौर पर सिंगरौली जिले से जहां पार्टी की मेयर हैं। 

पिछले साल जुलाई में हुए नगरीय निकाय चुनाव में यहां पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार नहीं रहा था। क्षेत्र में पार्टी को रीवा और सिंगरौली नगर निगम में हार का सामना करना पड़ा था। यहां तक कि वरिष्ठ भाजपा नेता और विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के बेटे राहुल गौतम को भी हार का मुंह देखना पड़ा था। 

इसे विंध्य क्षेत्र को मंत्रिपरिषद में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से लोगों का सरकार के खिलाफ आक्रोश के रूप में देखा गया। 2020 में बनी शिवराज सरकार में इस क्षेत्र से केवल रामखेलावन पटेल को ही मंत्री बनाया गया था।

पीएम मोदी का रीवा दौरा
पीएम मोदी का रीवा दौरा - फोटो : SOCIAL MEDIA
प्रधानमंत्री के दौरे से विंध्य में क्या बदलेगा?
प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी का यह तीसरा रीवा दौरा है। इससे पहले मोदी मई 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान और दूसरी बार नवंबर 2018 में विधानसभा चुनाव का प्रचार करने रीवा आए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रीवा में होने वाले कार्यक्रम के साथ भाजपा विंध्य में अपनी पकड़ को मजबूत बनाए रखने की कोशिश करेगी। चुनावी जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह इस क्षेत्र में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई में मदद कर सकता है।

अमित शाह का सतना दौरा
अमित शाह का सतना दौरा - फोटो : SOCIAL MEDIA
अमित शाह के दौरे में क्या हुआ था?
दो महीने पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  विंध्य क्षेत्र में भाजपा की स्थिति का जायजा लिया था। शाह सतना के दौरे पर आए थे। शाह ने बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात के अलावा पार्टी के बड़े नेताओं और जिलों की कोर कमेटी के साथ बैठक की।

 बैठक में विंध्य क्षेत्र के नेताओं के अलावा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महासचिव हितानंद शर्मा उपस्थित रहे थे। शाह ने पार्टी नेताओं के साथ बैठक में जातिगत गणित, सरकार की योजनाओं और सरकार के कामकाज की जानकारी ली थी।

इसके अलावा शाह, शबरी माता की जयंती के मौके पर कोल जनजाति के महाकुंभ में शामिल हुए थे। इस दौरान शाह तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर जमकर हमले बोले थे। शाह ने कहा था, कांग्रेस सरकार ने जनजाति वर्ग के कामों को रोका था, जिन्हें शिवराज सरकार ने दोबारा शुरू किया है।

दिग्विजय सिंह का रीवा दौरा
दिग्विजय सिंह का रीवा दौरा - फोटो : SOCIAL MEDIA
विंध्य में फिर पकड़ बनाने के लिए कांग्रेस क्या कर रही? 
2018 में कांग्रेस को सबसे ज्यादा निराशा इस इलाके से मिली थी। यहां तक की पार्टी ने दिग्गज नेता और उस वक्त नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भइया को भी सीधी जिले की चुरहट सीट से हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस इस चुनाव में यहां अपनी खोई हुई जमीन तलाश रही है। उसके सामने भाजपा के साथ आप की चुनौती भी है। 

अमित शाह के दौरे के बाद कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह यहां संगठन को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी दी है।  दिग्विजय ने हाल ही में पार्टी के अलग-अलग धड़ों के नेताओं से मुलाकात की। उन्होंने सभी प्रकोष्ठों की बैठक में हिस्सा लिया।
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