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पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाली माधुरी को तीन साल कैद

Sun, 20 May 2018 04:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 20 May 2018 04:26 AM IST
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Madhuri Gupta gets three years in jail, spying for Pakistan
अदालत ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय सूचनाएं देने की दोषी माधुरी गुप्ता को तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने माधुरी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि महिला होने के नाते सहानुभूति बरती जाए। अदालत ने कहा कि उस पर गंभीर आरोप है और उसने देश की प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचाया है। माधुरी गुप्ता पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रेस एवं सूचना सचिव थी। दिल्ली पुलिस ने उसे 2010 में गिरफ्तार किया था। 
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अदालत ने कहा, आरोप गंभीर, सहानुभूति की हकदार नहीं

पटियाला हाउस अदालत स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्घार्थ शर्मा ने बचाव पक्ष व सरकारी पक्ष को सुनने के बाद फैसले में कहा कि दोषी शिक्षित महिला है। यूपीएससी पास माधुरी विभिन्न देशों के दूतावास में कार्यरत रही हैं। इस घटना के समय वह पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में काफी संवेदनशील पद पर थीं। अदालत ने कहा कि ऐसे पद पर तैनात किसी भी व्यक्ति से अपेक्षा की जाती है कि वह आम नागरिक से ज्यादा जिम्मेदारी से काम करेगा। दोषी के कार्य से देश की प्रतिष्ठा को आघात लगा है। ऐसे में उनका मानना है कि वह किसी भी प्रकार से सहानुभूति की हकदार नहीं है। 
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अदालत ने माधुरी गुप्ता को गोपनीयता अधिनियम की धारा तीन के तहत तीन वर्ष साधारण कैद और धारा पांच के तहत भी तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई है। तीनों सजाएं साथ चलेंगी। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने माधुरी गुप्ता को 22 अप्रैल 2010 में गिरफ्तार किया था। उस पर गोपनीय जानकारी आईएसआई को देने और उसके दो अधिकारियों को मुबशर रजा राणा व जमशेद के संपर्क में रहने के आरोप थे। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद 19 जुलाई 2010 को माधुरी गुप्ता के खिलाफ गोपनीयता अधिनियम समेत कई धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने माधुरी गुप्ता के खिलाफ आपराधिक साजिश, विश्वासघात व गोपनीयता अधिनियम के तहत 12 नवंबर 2016 को आरोप तय किए थे। 

बचाव पक्ष और माधुरी के तर्क

सजा पर जिरह के दौरान बचाव पक्ष ने सहानुभूति बरतने का आग्रह करते हुए कहा कि माधुरी 23 अप्रैल 2010 से 10 जनवरी 2012 के दौरान कुल 20 माह 17 दिन जेल में रह चुकी है। जिस आरोप में उसे दोषी ठहराया गया है, उसमें अधिकतम तीन वर्ष कैद की सजा का प्रावधान है। ऐसे में जेल में काटी गई अवधि को सजा मानते हुए उसे नेकचलनी पर रिहा किया जाए। वहीं, माधुरी ने आंखों में आंसू लिए तर्क रखा कि उसके माता.पिता की जल्द मोत हो गई थी। उसका एक भाई तीन दशक से यूएस में रह रहा है। इस मामले के कारण नौकरी से बर्खास्त होने पर वह रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सभी सुविधाओं से वंचित हो चुकी है। एक सीनियर सिटीजन व परिस्थितियों से पीड़ित महिला होने के नाते उसके साथ सहानुभूति बरती जाए। 

 

सरकारी पक्ष के तर्क

Madhuri Gupta gets three years in jail, spying for Pakistan
बचाव पक्ष के तर्कों पर आपत्ति करते हुए सरकारी पक्ष ने कहा कि दोषी शिक्षित महिला है और घटना के समय इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में काफी अहम पद पर थी। उसे पता था कि जिस प्रकार की गतिविधियों में वह लिप्त है, उसमें क्या सजा मिल सकती है। ऐसे में उसे अधिकतम सजा दी जानी चाहिए।

अपील तक जमानत मिली 

फैसले के तुरंत बाद माधुरी के अधिवक्ता ने जमानत आवेदन दायर करते हुए तर्क रखा कि तीन वर्ष की सजा मिलने पर अपील के निपटारे तक उनकी मुवक्किल को जमानत प्रदान की जाए। अदालत ने 25 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके व एक अन्य जमानती की शर्त पर माधुरी की जमानत स्वीकार कर ली। अदालत ने कहा कि माधुरी पहले से ही जमानत पर थी और उसने कभी भी उसका दुरुपयोग नहीं किया। ऐसे में वह इस फैसले के खिलाफ 30 दिन में अपील करने तक जमानत पाने की हकदार है।
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