फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Madhumala Chattopadhyay is a First woman of India who made friendly contact with sentinelese

वो पहली महिला जिनसे मिलकर खुश हुए थे सेंटिनल, भावुक है ये कहानी   

Tue, 04 Dec 2018 10:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 04 Dec 2018 10:54 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Madhumala Chattopadhyay is a First woman of India who made friendly contact with sentinelese
अंडमान जनजाति के लोगों से मुलाकात करते हुए मधुमाला - फोटो : Sudipto Sengupta/probashionline.com

हाल ही में अंडमान द्वीप पर रहने वाले सेंटिनल जनजाति के लोगों ने अमेरिकी नागरिक जॉन एसन चाऊ (26) की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से एक बार फिर सेंटिनल का मुद्दा पूरी दुनिया में उठ गया। लोगों के मन में इस जनजाति के प्रति काफी डर आ गया। दुनिया की नजर में ये छवि बन गई कि जनजाति के सामने यदि कोई आ जाए तो ये लोग उसे मार सकते हैं। लेकिन एक महिला ऐसी भी हैं जिनसे ये लोग खुशी-खुशी मिले थे। 


loader

हाल ही में अंडमान द्वीप पर रहने वाले सेंटिनल जनजाति के लोगों ने अमेरिकी नागरिक जॉन एसन चाऊ (26) की हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से एक बार फिर सेंटिनल का मुद्दा पूरी दुनिया में उठ गया। लोगों के मन में इस जनजाति के प्रति काफी डर आ गया। दुनिया की नजर में ये छवि बन गई कि जनजाति के सामने यदि कोई आ जाए तो ये लोग उसे मार सकते हैं। लेकिन एक महिला ऐसी भी हैं जिनसे ये लोग खुशी-खुशी मिले थे। 

बात साल 1991 की है। उस वक्त पहली बार इन लोगों ने बाहरियों का स्वागत किया था। इस समूह में 13 लोग थे। इन 13 लोगों के समूह में मधुमाला चट्टोपाध्याय (57) भी थीं। जो इस वक्त केंद्र सरकार के सामाजिक कल्याण और अधिकारिता मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारी के तौर पर दिल्ली में कार्यरत हैं।

इस समूह का सामना जनजाति के लोगों ने तीर कमान से नहीं किया जैसा कि वे अक्सर करते हैं। मधुमाला ऐसी पहली महिला हैं जो इतना करीब से जनजाति से मिलीं। इसके बाद वह उसी साल फरवरी माह में दोबारा वहां अपने दल के साथ पहुंचीं। मधुमाला ने बताया कि जनजाति के लोगों ने दोबारा में उन्हें पहचान लिया और उनकी नाव की ओर आकर नारियल उठाकर ले गए।

मधुमाला सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय में जॉइंट डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। वो कहती हैं कि जब वह अपने दल के साथ द्वीप पर पहुंची तो सुबह के 8 बज रहे थे। जब उन्होंने वहां धुंआ देखा तो वह उसी दिशा में चल दिए। कुछ ही देर बाद वहां सेंटिनल भी आ गए। उनमें अधिकतर पुरुष थे और चार लोग ऐसे थे जिनके पास तीर-कमान थे। उन्होंने कहा कि उनके दल के लोगों ने नारियल पानी में फेंक दिए और सेंटिनल नारियल लेकर चले गए। 

मधुमाला ने बताया, जब उनका दल दोबारा नारियल लेकर लौटा तो सेंटिनल अपनी भाषा में जोर जोर से कहने लगे 'नरियाली जाबा जाबा।' यानी और नारियल। उस समय कई सेंटिनल युवक नाव तक आए और नारियल ले गए। वहीं एक अन्य सेंटिनल युवक नदी के पास खड़ा था और वह तीर कमान लेकर उनके दल पर  निशाना साधने लगा। उतने ही वहां खड़ी सेंटिनल महिला ने उस पुरुष को धक्का दे दिया। ऐसा लगा कि वह उसे निशाना लगाने से रोक रही हो। इसके बाद अब नारियल पानी में नहीं फेके गए बल्कि उनके हाथ में दिए जाने लगे।

मधुमाला कहती हैं, "जब मैंने अध्ययन के लिए अंडमान को चुना तो मेरी मां से ये साइन कराया गया कि अगर मुझे कुछ हो जाता है तो उसके लिए एंथ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया जिम्मेदार नहीं होगा।" मधुमाला कहती हैं कि सेंटिनल लोग अपने क्षेत्र और महिलाओं को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वह काफी ताकतवर हैं। उन्हें बाहरी लोगों से जीने के तरीके सीखने की कोई जरूरत नहीं है। 

सेंटिनल को अकेला छोड़ने की बात पर मधुमाला कहती हैं, "ब्रिटिश लोगों ने अंडमान के लोगों के साथ क्या किया। पहले तो अंडमान में संघर्ष के दौरान उन्होंने हजारों लोगों की हत्या कर दी। फिर वे कई लोगों का अपहरण कर उन्हें अपने साथ ले गए ताकि उन्हें सभ्य बनाया जा सके। जिसके कारण अंडमान के कई लोग बीमारी की चपेट में आ गए।" 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed