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Madarsa Survey: ‘अवैध मदरसों’ का क्या है मतलब, सर्वे होते ही कार्रवाई होने की बात कितनी सही?

Fri, 14 Oct 2022 04:42 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 14 Oct 2022 04:42 PM IST
सार

Madarsa Survey: उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने अमर उजाला से कहा कि सभी जिलों में मदरसों के सर्वे का काम बहुत अच्छी तरह से चल रहा है। सभी मदरसे वांछित सूचनाएं उपलब्ध करा रहे हैं...

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Madarsa Survey: What is the meaning of illegal madrasas?
Madarsa Survey - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

यूपी सरकार ने प्रदेश में मदरसों के सर्वे पूरा होने का समय बढ़ा दिया है। अब 25 अक्तूबर के स्थान पर अगले महीने की 15 तारिख तक मदरसों से संबंधित सूचना सरकार से साझा की जा सकेगी। प्रदेश में अब तक लगभग छह हजार मदरसों के सर्वे का काम पूरा हो चुका है और इनसे संबंधित सभी सूचना संबंधित जिलाधिकारियों के पास आ चुकी है। प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही बारिश और इसी बीच पड़े त्योहारों के कारण कई जिलों में सर्वे के काम में बाधा आ रही थी और जिला प्रशासन की तरफ से समय सीमा बढ़ाये जाने की मांग की जा रही थी। इसे देखते हुए ही सर्वे की समय सीमा बढ़ा दी गई है।

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इसी बीच सर्वे को लेकर कुछ राजनीतिक दलों द्वारा इसका विरोध करने से मामला गरमा गया है। कुछ लोगों ने किसी मदरसे को बंद करने की कोशिश किए जाने पर ‘घर-घर मदरसे’ खोले जाने की ‘धमकी’ दी है। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने इस तरह की कोशिशों को गैर-वाजिब करार दिया है। संगठन ने साफ़ किया है कि सर्वे में किसी मदरसे के वैध या अवैध होने जैसी कोई सूचना नहीं मांगी जा रही है। यह केवल मदरसों में पढाए जा रहे कोर्स और बेसिक सुविधाओं को जानने की कोशिश है जिसका सरकार को अधिकार है।

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उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने अमर उजाला से कहा कि सभी जिलों में मदरसों के सर्वे का काम बहुत अच्छी तरह से चल रहा है। सभी मदरसे वांछित सूचनाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसको लेकर कोई अनुचित टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। यह स्पष्ट है कि सरकार किसी मदरसे को बंद करने या उनकी रोजाना की कार्यप्रणाली में कोई गतिरोध नहीं पैदा करना चाहती है।

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उन्होंने कहा कि सभी बच्चों की बेहतरी के लिए इसके जरिये कुछ आवश्यक सूचनाएं एकत्र की जा रही हैं, सर्वे पूरा होने के बाद प्रशासन बच्चों की शिक्षा को बेहतर करने के लिए कुछ उपाय सुझा सकता है और उन्हें देश-समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए विकास की योजनाएं बनाई जाएंगी। यह प्रशासन का दायित्व और अधिकार दोनों है, लिहाजा उसे इसे करने देना चाहिए और इसे लेकर कोई भ्रम नहीं फैलाना चाहिए।

डॉ. जावेद ने कहा कि अभी जो ग़ैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे हो रहा है, उसमें सही या ग़लत की कोई जानकारी मिलना संभव नहीं है, क्योंकि यह सर्वे केवल ग़ैर मान्यता प्राप्त मदरसों के हालात के अध्ययन के लिए हो रहा है। मदरसे अन्त्योदय की तर्ज़ पर ग़रीब और पसमांदा समाज के बच्चों को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं और सरकार इसको बेहतर करना चाहती है।

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