लोकनायक को नमन: जेपी मौजूदा आंदोलन के समय कितने प्रासंगिक; निडर आवाज और साहस को याद कर पीएम-राजनाथ क्या बोले?
बिहार में जन्मे सपूत जय प्रकाश नारायण को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने नमन किया। संदेशों में निडर आवाज और साहस के अलावा किन बातों को रेखांकित किया गया। जानिए इस खबर में
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बीते कुछ समय से दिल्ली में आंदोलन की खबरें सुर्खियों में हैं। बात चाहे नीट पेपर लीक के समय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए सोनम वांगचुक के अनशन और अभिजीत दीपके के आंदोलन की करें या मौजूदा आंदोलन की, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग हो रही है। दोनों घटनाओं में युवाओं का आक्रोश, उनकी बेबाक अभिव्यक्ति सबका ध्यान खींच रही है। ऐसे आंदोलनों के दौर में बिहार में जन्मी सामाजिक-राजनीतिक हस्ती का जिक्र होना स्वाभाविक है। दरअसल, दशकों पहले जब जय प्रकाश नारायण ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान संपूर्ण क्रांति का आह्वान किया तो इससे राजनीतिक भूचाल आया। आज जब इन्हीं जयप्रकाश नारायण की जयंती है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी निडर आवाज का जिक्र कर उन्हें नमन किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जेपी के अदम्य साहस को रेखांकित किया। संपूर्ण क्रांति जैसे क्रांतिकारी विचार के चार-पांच दशक के बाद भी जेपी के विचार और उनकी शख्सियत कितनी प्रासंगिक है? पीएम मोदी, राजनाथ सिंह और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के संदेशों में इस सवाल के जवाब की तरफ संकेत मिलता है। पढ़िए किसके संदेश में क्या है खास?
कौन थे जयप्रकाश नारायण?
जयप्रकाश नारायण का जन्म 11 अक्टूबर 1902 को बिहार के सिताबदियारा गांव में हुआ था। उनके पिता हरसूदयाल श्रीवास्तव और मां फूलरानी देवी थीं। सिताबदियारा गंगा और घाघरा नदियों के पास बसा गांव है, जिसका क्षेत्र बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा से जुड़ा है। बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखने वाले जेपी आगे चलकर स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी विचारक और जननेता बने। उनकी राजनीति का आधार केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाना था। 1974 में बिहार से शुरू हुए आंदोलन और आपातकाल के विरोध में उनकी भूमिका ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। इसी जनसमर्थन और संघर्ष के कारण उन्हें ‘लोकनायक’ कहा जाने लगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेपी को नमन करते हुए लिखा, उनका प्रभाव हर पीढ़ी के लोगों पर रहा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में जेपी को याद करते हुए कहा, 'उन्होंने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि सार्वजनिक जीवन देश के नवनिर्माण का जरिया बन सकता है। आपातकाल के दौरान उनकी निडर आवाज भी उल्लेखनीय थी। लोकनायक जेपी (जयप्रकाश नारायण) सुशासन सुनिश्चित करने और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों तक पहुंचने के लिए भी बहुत उत्साहित रहते थे। 'विकसित भारत' के निर्माण की दिशा में काम करते हुए हम उनके आदर्शों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
संघर्ष स्मरणीय: अदम्य साहस के साथ तानाशाही का विरोध, सत्ता से बड़ा सिद्धांत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्हें नमन किया। उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में कहा, 'उनका जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। 'संपूर्ण क्रांति' का उनका आह्वान राजनीति में शुचिता, शासन में जवाबदेही और समाज में नैतिक पुनर्जागरण का संकल्प था। आपातकाल के काले अध्याय में उन्होंने अदम्य साहस के साथ तानाशाही का विरोध किया।'
उन्होंने आगे लिखा, 'संविधान, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए उनका संघर्ष भारतीय इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा। लोकनायक का जीवन हमें याद दिलाता है कि सत्ता से बड़ा सिद्धांत और व्यक्तिगत हित से बड़ा राष्ट्रहित होता है।'
लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट संकल्प
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 'लोकनायक' जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए लिखा, 'भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में जयप्रकाश नारायण जी (जेपी) का नाम साहस, सिद्धांतों और जनशक्ति में अटूट विश्वास के साथ सदैव स्मरण किया जाएगा। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा तक, उनका जीवन अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के संकल्प का प्रतीक रहा।'
ओम बिरला ने लिखा, 'सर्वोदय और भूदान आंदोलनों से जुड़कर उन्होंने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान और सामाजिक समानता के विचार को भी आगे बढ़ाया। लोकनायक के विचार और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनका अटूट संकल्प पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।'