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Gujarat: गुजरात में क्या मजबूरी, PM मोदी के 'रेड कार्पेट' पर क्या कहते हैं मुस्लिम, राहुल से क्यों हैं शिकवा?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 27 Apr 2024 12:22 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में लोकसभा की सभी 26 सीटों पर एक ही दिन में मतदान होगा। यानी तीसरे चरण में 7 मई को वोट डाले जाएंगे। पहले और दूसरे चरण के मतदान को लेकर राजनेता और चुनावी विश्लेषक रहे योगेंद्र यादव कहते हैं, ये भाजपा के लिए जोखिम का संकेत है।

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Lok Sabha Polls Election Campaign Gujarat voters pm modi rahul gandhi amit shah
लोकसभा चुनाव - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में आने वाला अहमदाबाद, केंद्र सरकार की 'एक्स' श्रेणी के शहरों की सूची में शुमार है। महंगा शहर है। लोगों की दिनचर्या में एक संयमित भागदौड़ देखी जाती है। यानी घर से दफ्तर या दुकान, इस रिश्ते को ही ज्यादातर लोग तव्वजो देते हैं। ऐसे में तो उनकी राजनीतिक सक्रियता भी कम हो जाती है। जिन लोगों को अपने काम से थोड़ी बहुत फुर्सत मिलती है, वे साबरमती रिवर फ्रंट पर वॉक करने पहुंच जाते हैं। अमित शाह के लोकसभा क्षेत्र 'गांधीनगर' का भी कुछ हिस्सा, अहमदाबाद में पड़ता है। चुनाव को लेकर जब लोगों का मन टटोला गया, तो गुजरात की सियासत को लेकर लोगों में 'मजबूरी' का भाव नजर आया। रेड कार्पेट से मुसलमानों को दिक्कत नहीं है, मगर उन्हें राहुल गांधी से शिकवा तो है। तभी तो नरेंद्र मोदी स्टेडियम से चंद कदमों की दूरी पर अपना कामधंधा करने वाले सोहेब ने कह दिया, वे (राहुल) गुजरात से प्रेम नहीं करते या उनके मन में ऐसा कुछ है कि हम गुजरात में आ ही नहीं सकते।
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चुनावी प्रचार को लेकर खामोशी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य गुजरात में लोकसभा की सभी 26 सीटों पर एक ही दिन में मतदान होगा। यानी तीसरे चरण में 7 मई को वोट डाले जाएंगे। पहले और दूसरे चरण के मतदान को लेकर राजनेता और चुनावी विश्लेषक रहे योगेंद्र यादव कहते हैं, ये भाजपा के लिए जोखिम का संकेत है। इससे उत्तर प्रदेश में राजनैतिक भूचाल आ सकता है। मेरठ से बनारस तक 15 संसदीय क्षेत्रों में सैकड़ों ग्रामीण वोटरों से हुई बात यह इशारा कर रही है कि सभी जगह, सभी जातियों में भाजपा का वोट खिसक रहा है। 70 तो छोड़िए, भाजपा के लिए 60 सीट बचाना भी नामुमकिन है, मुझे तो 50 भी नहीं दिख रहीं। गुजरात की तीन सीटें यानी अहमदाबाद पूर्व, अहमदाबाद पश्चिम और गांधीनगर में इन बातों का कोई असर नजर नहीं आता। आम जनता को न तो राजनीतिक दलों के प्रचार में कोई दिलचस्पी है और न ही सरोकार। अगर अहमदाबाद की मुख्य सड़कों से गुजरेंगे तो वहां चुनावी प्रचार को लेकर पूरी तरह से एक खामोशी सी नजर आएगी।
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भाजपा को शिफ्ट होगा आम आदमी पार्टी का वोट
वाहन पर पार्टी का झंडा नहीं दिख रहा, तो दूसरे राज्यों में जिन बैनर पोस्टर की भरमार रहती है, वो सब यहां, पूरी तरह गायब हैं। घर की दीवार है या दफ्तर की, वहां पोस्टर नहीं दिखेगा। लाउड स्पीकरों का शोर तो पूरी तरह नदारद है। मेट्रो के पिलर हों या फ्लाइओवर के, सब साफ सुथरे हैं। लोगों का कहना है कि निगम की सख्ती का नतीजा है। कुछ चुनींदा जगहों पर ही होर्डिंग्स देखने को मिलेंगे। जब इसकी वजह जानने का प्रयास किया, तो मोटेरा में स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम के निकटवर्ती रोड पर कलपुर्जों के विक्रेता प्रकाश बताते हैं, यहां पर चुनाव में पोस्टर का कोई रोल नहीं रहता। मकान पर झंडा नहीं रहता। किस पार्टी को वोट देना है, वह पहले से ही तय होता है। भाजपा को देना है, कांग्रेस को देना है, पुराने आदमी तो अभी तक यही तरीका अपनाते रहे हैं। नई पीढ़ी वाले थोड़ा चेंज मांगते हैं। आम आदमी पार्टी का ज्यादातर वोट भाजपा की तरफ शिफ्ट होगा। इनके लोग तो कहीं दिखाई नहीं पड़ते। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार भी कम ही नजर आते हैं। लोग, पार्टी सिंबल पर वोट करते हैं।
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राहुल से नाराजगी क्यों है?
वहीं पर सोहेब से मुलाकात हुई। वह मैकेनिक है। उसने बताया, कांग्रेस का शहर में भी प्रचार नजर नहीं आ रहा। लगता है कांग्रेस ने पहले से ही हार मान ली है। मोदी जी ने कहा है, इस बार 400 पार, उस हिसाब से कांग्रेस को लग रहा है कि हम जीतेंगे ही नहीं। राहुल गांधी ने भारत जोड़ा यात्रा निकाली, तो उन्होंने गुजरात में एंट्री नहीं ली। वे बाहर के राज्यों पर ही फोकस कर रहे हैं। इसके दो ही कारण हैं। उन्हें लगता है कि वे गुजरात से प्रेम नहीं करते या उनके मन में ऐसा कुछ भाव समा गया है कि हम गुजरात में आ ही नहीं सकते। राहुल गांधी, भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान गुजरात के दाहोद में पहुंचे थे। उनके साथ आम आदमी पार्टी के गुजरात अध्यक्ष इसुदान गढ़वी और राष्ट्रीय संयुक्त सचिव गोपाल इटालिया ने मंच साझा किया था। राहुल की न्याय यात्रा, झालोद, लिमखेड़ा, गोधरा, कलोल, हलोल और छोटा उदयपुर के बोदेली सहित कई इलाकों से होकर गुजरी थी।

वाडीलाल इलाका, जहां कांग्रेस पार्टी का प्रदेश कार्यालय है, उसके सामने डॉ. कबीर मंसूरी से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया, पिछली बार सभी पार्टियों ने भरपूर प्रचार किया था। तब शहर में नए-नए पुल बन रहे थे, राजनीतिक दलों ने उन पर पोस्टर बैनर लगा दिए थे। यहां तक कि उन पर अपनी पार्टी का रंग लगा दिया। इस बार सभी दलों ने इसका ध्यान रखा है। हालांकि मोदी साहब के होर्डिंग्स लगे हैं। कुछ कांग्रेस के भी लगे हैं, लेकिन बहुत कम। जहां पर उनका थोड़ा बहुत वजूद है, वहीं पर दिख रहे हैं। लोकसभा चुनाव में जो वादे किए गए हैं, उन्हें पूरा कर पाए। ये बड़ी बात होती है। आयकर और जीएसटी में ऑनलाइन सिस्टम होने से कुछ तो अच्छा हुआ है। आम आदमी पार्टी का वोट बैंक, जिस भी इलाके में जिस पार्टी का दबदबा अधिक होगा, उसके पक्ष में चला जाएगा।

डॉ. मंसूरी से जब पूछा गया कि वे 'विरासत टैक्स' को किस तरह से देखते हैं। वे बोले, इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ये आम लोगों की समझ से परे है। कोई पार्टी अगर अपने लोगों को कुछ समझा सकती है तो ही मालूम होगा। बड़े पैमाने पर इससे वोटिंग में कोई अंतर नहीं आएगा। हालांकि इसका राजनीतिक फायदा लेने का प्रयास हुआ है। कांग्रेस की स्थिति पर उन्होंने कहा, देखिये इनके जीतने वाले उम्मीदवार तो भाजपा में चले गए हैं। इससे पार्टी की स्थिति ठीक नहीं रही। हालांकि परिवर्तन होना जरुरी है। मोबाइल कैमरे से हटकर डॉ. मंसूरी बोले, "यहां सब सैट रहता है। पीएम मोदी की पार्टी का ही दबदबा रहता है। अच्छी बात है कि यहां के लोग, चुनाव को लेकर पूरी तरह शांत हैं। सबको मालूम है कि सात मई को ईवीएम में कौन सा बटन दबाना है।"

एक दूसरे के मजहब की करनी चाहिए इज्जत
शुक्रवार की नमाज अता करने का वक्त था। अबूल रहमान और उनके साथी मुनाफ भी वहां मिल गए। बिना कैमरे के अबूल रहमान बोले, देखिये, पीएम मोदी को ऐसा नहीं बोलना चाहिए। इससे हमारे लोगों को कष्ट होता है। चुनाव में वोट लेने के लिए मुस्लिमों को आप चाहे, जो मर्जी बोल देंगे। ये गलत है। फिर उनसे कैमरे पर जब इसी बात को जारी रखने का आग्रह किया, तो उन्होंने कहा, हर इंसान को एक दूसरे के मजहब की इज्जत करनी चाहिए। ऐसे बयानों से दूरी बढ़ती चली जाती है। चुनाव में ऐसी बयानबाजी से, मन में भी दूरी आती है। चुनाव हो, मगर विकास को लेकर हो। मुनाफ भी साथ ही खड़े हुए थे। वे कहते हैं, सांप्रदायिकता का मुद्दा दूर रहे। हमारे आसपास सभी धर्मों के लोग रहते हैं।

बतौर मुनाफ, हमारे ग्राहक तो ज्यादातर हिंदू हैं। कहीं कुछ दिखता नहीं है। आम लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता। ये मुस्लिम है, इसके पास नहीं जाना है। ऐसा कुछ नहीं है। यहां कुछ भी हो, भाजपा आनी ही है। सब सेटिंग ही इस तरह की होती है। सब ऐसा ही चलता है। कांग्रेस है ही नहीं। आम आदमी पार्टी का कुछ है नहीं। मोबाइल कैमरा हट जाता है। मुनाफ, थोड़ा गुस्से से बोल उठते हैं। ये सब कांग्रेस की करनी का फल भुगत रहे हैं। इस पार्टी ने कहीं का नहीं छोड़ा। अब मैदान छोड़कर भाग रही है। मुस्लिमों को लेकर यह फैला दिया कि ये तो कांग्रेसी हैं। भाजपा के सारे रास्ते साफ कर दिए हैं।  

2008 में बनी थी अहमदाबाद पश्चिम सीट
अहमदाबाद पश्चिम सीट, जो परिसीमन के बाद 2008 में बनी थी, पहली बार यहां 2009 में चुनाव हुए थे। यह सीट, अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित है। यहां पर भाजपा उम्मीदवार ने ही जीत हासिल की थी। 2019 में यहां से डॉ. किरीट पी सोलंकी जीते थे। 2009 और 2014 में भी उन्होंने कांग्रेस के निकटतम प्रतिद्वंदी को हराया था। अहमदाबाद पश्चिम, लोकसभा सीट पर भाजपा का प्रभाव रहा है। इसके तहत आने वाली एलिस ब्रिज, अमराईवाड़ी, दारियापुर, मणिनगर और असारवा वविधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। पिछले चुनाव में जमालपुर खड़िया और डनिलिम्बडा विधानसभा सीट, कांग्रेस ने जीती थी। इस बार भाजपा ने दिनेश मकवाणा और कांग्रेस ने भरत मकवाणा को उम्मीदवार बनाया है।


अहमदाबाद पूर्व सीट पर भाजपा का कब्जा
अहमदाबाद पूर्व सीट पर 2019 में भाजपा के हंसमुख भाई सोमा पटेल ने जीत हासिल की थी। इससे पहले भी दो चुनावों में यहां से भाजपा उम्मीदवार ही जीते थे। 2014 के चुनाव में भाजपा ने यहां से परेश रावल को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने भारी मतों से जीत हासिल की थी। 2019 में उनका टिकट काट दिया गया। उनके स्थान पर हंसमुख भाई पटेल को टिकट दिया गया। इस बार यहां से भाजपा ने हंसमुख भाई पटेल को, तो कांग्रेस ने हिम्मत सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया है। इस लोकसभा सीट के तहत सात विधानसभाएं आती हैं। इनमें गांधीनगर साउथ, वातवा, निकोल, दहेगान, नरोड़ा, ठक्करबापा और बापूनगर सीट है। इन सभी विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। गांधीनगर लोकसभा सीट से अमित शाह, चुनाव मैदान में हैं। गांधीनगर लोकसभा सीट हमेशा से हाईप्रोफाइल रही है। इस सीट पर 1989 से भाजपा का कब्जा रहा है। लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी यहां से सांसद रह चुके हैं। मौजूदा समय में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गांधीनगर के सांसद हैं। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने गांधीनगर सीट पर सोनल पटेल को उतारा है।
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