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लोकसभा ने महामारी विधेयक को दी मंजूरी, कोरोना योद्धाओं को मिलेगा संरक्षण  

Tue, 22 Sep 2020 12:28 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Tue, 22 Sep 2020 12:28 AM IST
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Lok Sabha passes The Epidemic Diseases Amendment Bill, 2020
लोकसभा - फोटो : ANI

संसद ने सोमवार को महामारी (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को संरक्षण प्रदान करने के प्रावधान हैं। लोकसभा में इस विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान जवाब देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि पिछले 3-4 वर्षों से हमारी सरकार लगातार महामारी जैसे विषयों से निपटने के बारे में समग्र और समावेशी पहल अपना रही है। 

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डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि इस दिशा में सरकार ‘राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम’ बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस बारे में विधि विभाग ने राज्यों के विचार जानने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा कि पहले दो वर्षों में हमें सिर्फ चार राज्यों मध्यप्रदेश, त्रिपुरा, गोवा और हिमाचल प्रदेश से सुझाव मिले। अभी हमारे पास 14 राज्यों से सुझाव आ चुके हैं। 
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम बनाने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने वायरस पर शोध के संबंध में जीनोम श्रृंखला तैयार करने सहित कई अन्य कार्यों का उल्लेख किया।
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उन्होंने कहा कि पिछले नौ महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर कोविड19 के खिलाफ अभियान चलाया। प्रधानमंत्री ने स्वयं कई बार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ संवाद किया।

मंत्री के जवाब के बाद सदन ने कुछ सदस्यों के संशोधनों को अस्वीकार करते हुए इसे मंजूरी दी। उच्च सदन ने कुछ दिन पहले महामारी (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दी थी।

यह विधेयक संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया। इस संबंध में अध्यादेश अप्रैल में जारी किया गया था।

बता दें कि इस विधेयक के माध्यम से महामारी रोग अधिनियम 1897 में संशोधन किया गया है। इसमें महामारियों से जूझने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को संरक्षण प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है । साथ ही, विधेयक में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार की शक्तियों में विस्तार करने का भी प्रावधान है।

इसके तहत स्वास्थ्य कर्मियों के जीवन को नुकसान, चोट, क्षति या खतरा पहुंचाने कर्तव्यों का पालन करने में बाधा उत्पन्न करने और स्वास्थ्य सेवा कर्मी की संपत्ति या दस्तावेजों को नुकसान या क्षति पहुंचाने पर जुर्माने और दंड का प्रावधान किया गया है। इसके तहत अधिकतम पांच लाख रुपये तक जुर्माना और अधिकतम सात साल तक सजा का प्रावधान किया गया है।

निचले सदन में विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि यह सरकार डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य कर्मियों और आशा कर्मियों की तरफ ध्यान नहीं दे रही, जबकि उन्हें कोरोना योद्धा कहती है।

उन्होंने हालांकि कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्री और उनकी टीम द्वारा रात-दिन किये गए परिश्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और अर्द्धचिकित्साकर्मियों की समस्याओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के सुभाष भामरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सर्वाधिक सम्मान दिया और उनका मनोबल बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी ने समाज के दो रूप दिखाए। एक में जहां समाज के सभी वर्गों ने जरूरतमंदों और गरीबों की मदद की, वहीं समाज ने दूसरा रूप भी देखा कि किसी सोसाइटी में या घर में रोगी पाये जाने पर पड़ोसियों ने उनका बहिष्कार किया।

पेशे से चिकित्सक रहे भामरे ने कहा कि डॉक्टर और अन्य सभी स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित होने का खतरा होते हुए भी दिन रात काम करते रहे। प्रधानमंत्री ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को सर्वाधिक सम्मान दिया। उनका मनोबल बढ़ा।

उन्होंने कहा कि उन पर हमलों से मन व्यथित होता है। डॉक्टरों को सम्मान मिलना चाहिए। द्रमुक की टी सुमति ने कहा कि यह संशोधन ऐसे समय में किया गया, जब तमिलनाडु में हजारों छात्रों ने सरकार से नीट को टालने की मांग की।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह रवैया नहीं चलेगा कि राज्य सरकार काम करे और केंद्र केवल आदेश दे। उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बारे में स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन कार्रवाई करेगा, कौन सी एजेंसी कार्रवाई करेगी।


वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के कृष्ण देवरयालू ने कहा कि हमें डॉक्टरों का सम्मान करना चाहिए। शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, बीजद के बी महताब, बसपा के गिरीश चंद्र, भाजपा की हिना गावित, कांग्रेस के सप्तगिरी उल्का, हनुमाल बेनीवाल आदि सदस्यों ने भी चर्चा में भाग लिया। 

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