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ई-सिगरेट बेचने पर हो सकती है एक साल जेल और जुर्माना, लोकसभा में विधेयक पारित

Wed, 27 Nov 2019 06:05 PM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Wed, 27 Nov 2019 06:05 PM IST
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Lok Sabha passes bill to ban e cigarettes wednesday
e cigarette - फोटो : सोशल मीडिया

लोकसभा ने बुधवार को इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट या ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने वाला एक विधेयक पारित कर दिया। इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि कंपनियों की ओर से इसे एक नए 'फैशन' के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, यह विधेयक युवाओं को नशे के कुप्रभावों से बचाने वाला एक जरूरी उपाय था।

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इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट का निषेध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) विधेयक, 2019, 18 सितंबर को जारी एक अध्यादेश की जगह लाया गया है, जो इसे प्रतिबंधित करता है।
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लोकसभा में यह विधेयक विपक्षी सदस्यों के अध्यादेश के विरोध करने के बावजूद ध्वनि मत से पारित किया गया। इसके साथ ही सदन ने विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए कई संशोधनों को भी खारिज कर दिया।
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विधेयक के संबंध में बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने तर्क दिया कि तंबाकू पर प्रतिबंधों की कमी को "नई लत शुरू करने" के लिए न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। अपनी बात के समर्थन में उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दसवीं मंजिल से या छठवीं मंजिल से गिरे, वह फर्श पर आकर घायलल होता ही जाता है।

उन्होंने कहा कि ई-सिगरेट को बढ़ावा देने के लिए युवाओं के समक्ष से फैशन के तौर पर प्रचारित-प्रसारित किया गया था, जो अंततः उन्हें नशीले पदार्थों की लत की ओर ले जाएगा, इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक था।

विपक्षी दलों सहित अधिकांश दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया, लेकिन इसे कानून बनाने के लिए अध्यादेश लाने का रास्ता अपनाने के सरकार के फैसले पर सवाल भी उठाया। विपक्ष के तर्क का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि "मैं देशवासियों के स्वास्थ्य के लिए असंवेदनशील नहीं हो सकता और अध्यादेश इस खतरनाक लत को रोकने का कदम था। 

उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में अगर शराब और तम्बाकू जैसे खतरनाक मादक पदार्थों को लोगों द्वारा स्वीकार कर लिया जाता है, तो उन्हें जांचना मुश्किल हो जाता है, इसलिए बेहतर होगा कि ऐसे खतरनाक नशीले पदार्थों को उनके उपयोग से पहले ही रोक दिया जाए। 

उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि ये ई-सिगरेट निकोटीन के अलावा सभी नशीले पदार्थों के वितरण को भी शुरू कर सकते हैं, जो खतरनाक है। मंत्री हर्षवर्धन ने जोर देकर यह भी कहा कि ई-सिगरेट के लिए उपयोग किए जाने वाले निकोटीन जैसे रसायन कैंसर, हृदय संबंधी बीमारियों और किशोरों के दिमाग को प्रभावित कर सकते हैं।

मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने ई-सिगरेट पर एक श्वेत पत्र जारी कर इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।

क्या कहता है यह विधेयक

यह विधेयक ऐसे वैकल्पिक धूम्रपान उपकरणों के निर्माण, उत्पादन, आयात, निर्यात, वितरण, परिवहन, बिक्री, भंडारण या विज्ञापनों को संज्ञेय अपराध बनाता है। इसके तहत इन अपराधों के लिए जेल भेजने और जुर्माना लगाने की सजा का प्रावधान किया गया है।

अब इस कानून का पहली बार उल्लंघन करने वालों को एक साल तक की जेल और एक लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। इसके अनुसार, दोबारा पकड़े जाने पर तीन साल तक की जेल या पांच लाख रुपये का जुर्माना, या दोनों लगाया जाएगा। कानून के अनुसार, ई-सिगरेट के भंडारण पर छह महीने तक की कैद या 50,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों ही सजा से दंडित किया जा सकेगा।

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