{"_id":"68914ef9a8b7b24fb50e2c37","slug":"lok-sabha-opposition-disrupted-proceedings-for-more-than-1450-hours-in-11-years-2025-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकसभा: 11 साल में विपक्ष ने 1450 घंटे से अधिक कार्यवाही रोकी; कुल कार्य दिवसों का 32% समय व्यवधान में नष्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
लोकसभा: 11 साल में विपक्ष ने 1450 घंटे से अधिक कार्यवाही रोकी; कुल कार्य दिवसों का 32% समय व्यवधान में नष्ट
Tue, 05 Aug 2025 05:53 AM IST
शिव शुक्ला
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Tue, 05 Aug 2025 05:53 AM IST
सार
2018 से 2025 के बीच पेगासस जासूसी मामला, कृषि कानून, अदाणी -हिंडनबर्ग विवाद व संसद सुरक्षा उल्लंघन जैसे मुद्दों पर बार-बार हंगामे के चलते सत्र बाधित हुए। 18वीं लोकसभा के आरंभिक सत्रों में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने जोरदार नारेबाजी की और संसद परिसर में सुरक्षा चूक पर प्रश्नकाल व शून्यकाल रोक दिए थे।
विज्ञापन
अमित शाह
- फोटो : संसद टीवी वीडियो ग्रैब
विस्तार
पिछले ग्यारह वर्षों में विपक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित कर संसद के समय व संसाधनों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। संसदीय सचिवालय और संसदीय अनुसंधान संस्थानों के ताजा विश्लेषण से यह खुलासा हुआ है कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच लोकसभा की कुल 1,450 घंटे से अधिक की कार्यवाही शोरगुल, वॉकआउट, नारेबाजी और स्थगनों की भेंट चढ़ चुकी है।
विज्ञापन
यह भारतीय संसदीय इतिहास में सबसे लंबी व्यवधान वाली अवधि मानी जा रही है, जिसमें अधिकतर बार विपक्षी दलों विशेषकर कांग्रेस के साथ इंडी गठबंधन ने सरकार की नीतियों, विधेयकों व संवेदनशील मुद्दों पर सत्र के भीतर उग्र विरोध प्रदर्शन किया। संसदीय रिकार्ड में यह भी सामने आया है कि 16वीं, 17वीं व वर्तमान लोकसभा के कुल कार्यदिवसों का 32 प्रतिशत समय व्यवधान में नष्ट हो गया, जो पिछले दशक की तुलना में 5 प्रतिशत अधिक है। 2018 से 2025 के बीच पेगासस जासूसी मामला, कृषि कानून, अदाणी -हिंडनबर्ग विवाद व संसद सुरक्षा उल्लंघन जैसे मुद्दों पर बार-बार हंगामे के चलते सत्र बाधित हुए। 18वीं लोकसभा के आरंभिक सत्रों में राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने जोरदार नारेबाजी की और संसद परिसर में सुरक्षा चूक पर प्रश्नकाल व शून्यकाल रोक दिए थे।
विज्ञापन
2,175 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष नुकसान
लोकसभा की 1,450 घंटे से अधिक की कार्यवाही बाधित होेने से राष्ट्र को लगभग 2,175 करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान हो चुका है। संसद सत्रों पर औसतन प्रति मिनट 2.5 लाख का खर्च आता है। इसमें सत्र संचालन पर आने वाला खर्च जिसमें सांसदों के भत्ते, प्रशासनिक व्यय, सुरक्षा, तकनीकी प्रबंधन व संसदीय सचिवालय का खर्च शामिल होता है।
विज्ञापन